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सावन: चंबल में गूंज रही सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचहाहट, 'सतबहना' ने दूर किया कोरोना का सूनापन
Wed, 08 Jul 2020 12:01 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 08 Jul 2020 12:01 PM IST
सार
- गौरैया समूह की चिड़िया
- 10 मिनट में 500 मीटर की दूरी तय करती हैं
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सेवन सिस्टर बर्ड्स
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना काल में सावन भी सूना-सूना है। लेकिन चंबल के गांवों में यह सन्नाटा सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचहाहट से टूट रहा है। यह नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया सात बहनें होती हैं और हमेशा साथ ही रहती हैं। चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से भी जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है।
यूपी के बाह, इटावा, एमपी के भिंड, मुरैना से लेकर राजस्थान के धौलपुर तक चंबल किनारे के गांवों में सेवन सिस्टर बर्ड्स की मौजूदगी है। बाघराजपुरा के गांव के धीरेंद्र पाल सिंह, देवेंद्र सिंह भदौरिया, भगवानपुरा के दिलीप वर्मा, गोहरा के राकेश यादव, हरलालपुरा के रामवीर ने बताया कि यह चिड़िया उड़ान भी समूह में भरती है।
इनका प्रजनन बारिश के दिनों में होता है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि उत्तर भारत में प्रजनन काल जुलाई और सितंबर में होता है। तीन से चार अंडे देती है। कीड़े, अनाज और जामुन इनका भोजन होते हैं।
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यूपी के बाह, इटावा, एमपी के भिंड, मुरैना से लेकर राजस्थान के धौलपुर तक चंबल किनारे के गांवों में सेवन सिस्टर बर्ड्स की मौजूदगी है। बाघराजपुरा के गांव के धीरेंद्र पाल सिंह, देवेंद्र सिंह भदौरिया, भगवानपुरा के दिलीप वर्मा, गोहरा के राकेश यादव, हरलालपुरा के रामवीर ने बताया कि यह चिड़िया उड़ान भी समूह में भरती है।
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इनका प्रजनन बारिश के दिनों में होता है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि उत्तर भारत में प्रजनन काल जुलाई और सितंबर में होता है। तीन से चार अंडे देती है। कीड़े, अनाज और जामुन इनका भोजन होते हैं।
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सेवन सिस्टर बर्ड्स
- फोटो : अमर उजाला
चिड़िया के बारे में खास बातें
रेंजर के मुताबिक यह गौरैया समूह की चिड़िया है, कीट पतंगे इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। यह चिड़िया अंड़े अलग-अलग देती हैं। 9 से 24 सेमी तक इनकी लंबाई होती है। यह 10 मिनट में 500 मीटर की दूरी तय करती हैं।
सावन में चहचहाहट दिलाती है मल्हार की याद
सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचहाहट सावन के महीने में मल्हार की याद दिलाती है। वनकर्मी कहते हैं कि आमने-सामने चोंच कर चूं चूं करती इन चिड़ियों को देखकर ऐसा लगता है कि मानो आपस में लड़ रही हों।
रेंजर के मुताबिक यह गौरैया समूह की चिड़िया है, कीट पतंगे इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। यह चिड़िया अंड़े अलग-अलग देती हैं। 9 से 24 सेमी तक इनकी लंबाई होती है। यह 10 मिनट में 500 मीटर की दूरी तय करती हैं।
सावन में चहचहाहट दिलाती है मल्हार की याद
सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचहाहट सावन के महीने में मल्हार की याद दिलाती है। वनकर्मी कहते हैं कि आमने-सामने चोंच कर चूं चूं करती इन चिड़ियों को देखकर ऐसा लगता है कि मानो आपस में लड़ रही हों।