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Agra News: वाहनों के पंजीकरण में गलत मोबाइल नंबर से हो रही परेशानी, वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने उठाया मुद्दा, बोले- नहीं मिल पाता ओटीपी
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आगरा। देश में मोटर वाहन सेवाओं के डिजिटलीकरण से जुड़ी एक बड़ी समस्या सामने आई है। वाहन पंजीकरण अभिलेखों में गलत मोबाइल नंबर दर्ज होने से वाहन मालिकों को परेशानी हो रही है। अधिवक्ता केसी जैन ने इस मुद्दे को उठाया है और लोगों से अपना सही नंबर दर्ज कराने की अपील की है।
मोटर वाहन व्यवस्था तेजी से डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, ई-चालान, फिटनेस और परमिट जैसी सेवाओं में ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य है। ऐसे में वाहन पंजीकरण में सही मोबाइल नंबर का होना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, बड़ी संख्या में वाहन खरीदते समय डीलरशिप कर्मचारी अपना नंबर दर्ज कर देते हैं। इससे वास्तविक वाहन मालिकों को ओटीपी नहीं मिल पाता।
अधिवक्ता जैन ने अपनी गाड़ी का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने का अनुभव साझा किया। बताया कि दो साल पहले गाड़ी खरीदते समय कर्मचारी ने अपना नंबर डाल दिया था। वह कर्मचारी नौकरी छोड़कर चला गया और नंबर भी बंद हो गया। बाद में एजेंसी मालिक से संपर्क करने पर ओटीपी मिल सका। उन्होंने कहा कि यह समस्या कई वाहन मालिकों के साथ हो रही है। इससे उन्हें विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने में बाधा आ रही है।
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परिवहन मंत्री को लिखेंगे पत्र
अधिवक्ता जैन ने लोगों से अपील की है कि वाहन खरीदते समय अपना ही मोबाइल नंबर पंजीकृत कराएं। इससे सभी संदेश और प्रमाण सीधे उनके मोबाइल पर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री को भी पत्र लिखेंगे। इसका उद्देश्य इस समस्या का स्थायी समाधान खोजना है। यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी दिक्कतें न हों।
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मोटर वाहन व्यवस्था तेजी से डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली पर आधारित हो रही है। प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र, ई-चालान, फिटनेस और परमिट जैसी सेवाओं में ओटीपी आधारित सत्यापन अनिवार्य है। ऐसे में वाहन पंजीकरण में सही मोबाइल नंबर का होना अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, बड़ी संख्या में वाहन खरीदते समय डीलरशिप कर्मचारी अपना नंबर दर्ज कर देते हैं। इससे वास्तविक वाहन मालिकों को ओटीपी नहीं मिल पाता।
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अधिवक्ता जैन ने अपनी गाड़ी का प्रदूषण प्रमाणपत्र बनवाने का अनुभव साझा किया। बताया कि दो साल पहले गाड़ी खरीदते समय कर्मचारी ने अपना नंबर डाल दिया था। वह कर्मचारी नौकरी छोड़कर चला गया और नंबर भी बंद हो गया। बाद में एजेंसी मालिक से संपर्क करने पर ओटीपी मिल सका। उन्होंने कहा कि यह समस्या कई वाहन मालिकों के साथ हो रही है। इससे उन्हें विभिन्न ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठाने में बाधा आ रही है।
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परिवहन मंत्री को लिखेंगे पत्र
अधिवक्ता जैन ने लोगों से अपील की है कि वाहन खरीदते समय अपना ही मोबाइल नंबर पंजीकृत कराएं। इससे सभी संदेश और प्रमाण सीधे उनके मोबाइल पर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि वे इस संबंध में उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री को भी पत्र लिखेंगे। इसका उद्देश्य इस समस्या का स्थायी समाधान खोजना है। यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में ऐसी दिक्कतें न हों।