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कासगंज में उफान पर गंगा: तटवर्ती गांव, खेतों में तेजी से भर रहा पानी, जलस्तर देख दहशत में ग्रामीण; पलायन शुरू
Fri, 18 Aug 2023 11:26 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Fri, 18 Aug 2023 11:26 PM IST
सार
पानी का प्रवाह तेज होने के कारण यहां लोग आने जाने के लिए ट्रैक्टर, बुग्गी और नाव का सहारा ले रहे थे। यही हाल सहवाजपुर मार्ग के बमनपुरा गांव पर बना हुआ था। यहां गांव के रास्ते पर और ताल में कई फुट पानी भर जाने के कारण आवागमन ठप हो गया। ऐसी स्थिति में प्रशासन के द्वारा नाव डलवाई गई तब गांव के लोगों का आवागमन शुरू हो सका।
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कासगंज में उफान पर बह रही गंगा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कासगंज में गंगा का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। बृहस्पतिवार की रात से नदी का पानी तटवर्ती गांवों और खेत खलिहानों में तेजी से भर गया। बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों की आंखों में ही रात कट गई। लोग अपने परिजन और सामान आदि की सुरक्षा के लिए चौकन्ने नजर आए। पशुओं को बचाने के लिए रातभर जुगत चलती रही। भोर में चारों और पानी ही पानी देखकर लोग हतप्रभ रह गए। 40 गांव तक बाढ़ की आपदा पहुंचने का अनुमान है। पटियाली क्षेत्र के बाढ़ के लिए संवेदनशील इलाकों में आज शनिवार को बाढ़ का प्रकोप पहुंचने के आसार बने हुए हैं।
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बाढ़ के प्रकोप के कारण कई मार्ग ऐसे थे जिनके ऊपर पानी बह रहा था। नगरिया से सहवाजपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर अजीतनगर के बाद बाढ़ का पानी सडक़ के उत्तरी किनारे से दक्षिणी किनारे की ओर तेजी से बह रहा था। जिससे दक्षिणी किनारे के गांव में भी बाढ़ की दस्तक पहुंच गई। खेतों में होता हुआ यह पानी आबादी में पहुंच गया। कछला से कासगंज की सीमा से सटे बदायूं जनपद के गांव लक्ष्मीनगला, पंखिया नगला में हालात काफी विकराल थे। गंगा का पानी कासगंज-बरेली मार्ग के दक्षिण की ओर तेजी से बह रहा था।
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बमनपुरा गांव के घरों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। लोग जैसे तैसे अपना सामान लेकर अन्य ग्रामीणों के पक्के मकानों और सरकारी भवनों में रहने को विवश हो गए हैं। अजीतनगर, उलाईखेड़ा की आबादी में पानी भरा हुआ है। गांव की गलियों और मार्गों पर पानी है। बाढ़ का सर्वाधिक प्रकोप सोरोंजी क्षेत्र के गांव में देखने को मिला। यहां दतलाना, बघेला, पाठकपुर, डिंगलेशनगर के मार्ग पर बाढ़ का पानी था। वहीं लहरा-नगरिया मार्ग पर भी बाढ़ का पानी उत्तरी किनारे से दक्षिणी किनारे की ओर बहने लगा था। बघेला, दतलाना, डिंगलेशनगर, लहरा, तारापुर नसीर, गुलाबगढ़ी इलाकों में भी बाढ़ का पानी आबादी में काफी पहुंच गया था। तमाम स्थानों में लोगों ने मिट्टी भरी बोरियां लगाकर घरों में पानी घुसने से रोका, लेकिन लोगों को ज्यादा सफलता नहीं मिल सकी। लहरा की आबादी में चारों ओर पानी ही पानी था। यहां लहरा मार्ग पर पश्चिम से पूरब की ओर बाढ़ का पानी सडक़ पर होते हुए गिर रहा था। जिससे खेतों में कहीं 4 फुट तो कहीं 5 फुट तक पानी भरा हुआ था।
लहरा में लहरे मंदिर तक बाढ़ का पानी था वहीं उसके आगे आश्रमों और बगीचियों की ओर पानी भर रहा था। पिछले कई वर्षों में ऐसी बाढ़ के हालात नहीं हुए। केवल वर्ष 2010 और 2013 में ही ऐसे हालात बने थे। कुष्ठ आश्रम के चौराहे पर भी बाढ़ का पानी सडक़ से होते हुए पाठकपुर की ओर जा रहा था। पूरे दिन बाढ़ के पानी का प्रकोप इसी तरह बना रहा। ग्रामीण जलस्तर में वृद्धि को लेकर काफी भयभीत और बेचैन थे। पूरा दिन लोगों का बाढ़ से बचाव करने में निकल गया। गऊपुरा के देवेंद्र ने बताया कि खेतों में बाढ़ का पानी भरा होने से पशुओं के लिए चारे का संकट होने लगा है। स्थिति काफी खराब है। वहीं दतलाना के हरिओम, रामौतार ने बताया कि गांव में बाढ़ का पानी भर गया है। बाढ़ का पानी लगातार बढ़ता जा रहा है। लहरा के कुनाल, देवेश, संजीव कुमार ने बताया कि पानी काफी बढ़ गया है। बृहस्पतिवार रात से लगातार पानी बढ़ा हुआ चल रहा है। सब खेत खलियान पानी से भरे हुए हैं। कोई ऐसी जगह नहीं बची है जहां बाढ़ का पानी न हो।