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Agra News: नालों पर स्कूल, दुकानें और अस्पताल...जलभराव झेल रहे लाखों लोग
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नालों पर अवैध निर्माण
आगरा। सोमवार रात हुई बारिश में बालूगंज के बेनी सिंह इंटर काॅलेज के अंदर से निकला नाला ढहने से पांच मकान गिर गए। स्कूल के अंदर से निकले नाले को देखकर डीएम भी हैरत में पड़ गए। शहर में बेनी सिंह इंटर कॉलेज की तरह नालों पर कई कॉलेज, दुकानें, अस्पताल और होटल बने हुए हैं। अवैध निर्माण के कारण नालों की सफाई न होने से सिल्ट ठोस होकर बांध की तरह पानी को रोक देती है, जिससे नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं। जलभराव से लाखों लोगों को परेशानी हो रही है।
बाग मुजफ्फर खां में सेंट जॉर्जेज कॉलेज की बाउंडरी के अंदर से नाला निकल रहा है, जिसे पाट दिया गया है। इसकी सफाई में नगर निगम को हर साल परेशानी आती है। इसी तरह हरीपर्वत से दिल्ली गेट और मदिया कटरा तक 38 दुकानें और मकान बने हुए हैं। पूर्व में क्वीन विक्टोरिया इंटर कॉलेज की ओर से चेन मशीन उतारकर दिल्ली गेट पर सफाई हो जाती थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गया। मदिया कटरा पर रवि हॉस्पिटल के अंदर से नाला निकलने की रिपोर्ट निगम अधिकारी कर चुके हैं, लेकिन यहां भी नाला खुलवाया नहीं गया। मंटोला और काजीपाड़ा नाले के साथ खतैना और लोहामंडी में भी नाले के ऊपर मकान बने हुए हैं।
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नालों के लिए ये हैं नियम
- नालों को पाटा नहीं जा सकता, उन्हें खुला रखना होगा।
- नालों के दोनों ओर सफाई के लिए जगह छोड़नी होगी।
- नालों से छह फीट छोड़कर बैरिकेडिंग की जा सकती है।
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7 मकानों को नोटिस
बालूगंज में बेनी सिंह इंटर कॉलेज के पास नाला ढहने से गिरे मकानों के बाद बृहस्पतिवार को नगर निगम ने सर्वे किया। निगम ने मकान जर्जर मिलने पर सात लोगों को नोटिस दिए हैं, जिसमें कहा है कि जर्जर मकानों को क्षतिग्रस्त घोषित किया जाता है। तीन दिन में मकानों को अपने खर्च पर गिरवाएं। भवन गिरने से कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। निगम ने मुकेश, सुरेश, प्रदीप, अनिल, अजय, प्रमोद और अतीश को नोटिस जारी किए हैं।
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120 नालों पर खर्च किए 70 करोड़
नगर निगम ने 120 नालों के निर्माण पर बीते साल अवस्थापना निधि से 49 करोड़ से अधिक और नगर निगम निधि एवं अन्य निधियों से 20 करोड़ रुपये खर्च किए थे। करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी इस साल शहर में जलभराव बढ़ गया। बिजलीघर, काजीपाड़ा, मदिया कटरा, कैलाशपुरी रोड, आवास विकास, लोहामंडी, खतैना, राजपुर चुंगी समेत क्षेत्रों में नए बने नालों पर ही अवैध निर्माण कर लिए गए, जिससे उनकी सफाई ही नहीं हो पाई।
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पार्षदों ने साधा निशाना
- 70 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए। नाला सफाई के लिए दो करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन पर दो माह में खर्च हुए हैं। तब ये हाल है कि पूरा शहर पानी में डूब गया। - रवि माथुर, पार्षद
- नालों के ऊपर किए गए अवैध निर्माण हटाने थे, लेकिन हटाए नहीं गए। सदन में भी मेयर ने निर्देश दिए। अब नतीजा सबके सामने है। न जाने कितने मकान और गिरेंगे। - राकेश जैन, पार्षद
- नाले के ऊपर किए गए निर्माण बिना भेदभाव तोड़े जाएं। हरीपर्वत से मदिया कटरा के बीच नाले की सालों से सफाई नहीं हुई है। एक किमी. का हिस्सा पूरी तरह से ढका है, जिससे कैलाशपुरी तक जलभराव होता है। - शरद चौहान, पार्षद
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हटाए जाएंगे नालों पर बने निर्माण
- नालों के ऊपर किए गए निर्माण हटाए जाएंगे। निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर नालों की सफाई कराने को कहा गया है। सभी अवरोध हटेंगे। - संतोष कुमार वैश्य, नगर आयुक्त
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बाग मुजफ्फर खां में सेंट जॉर्जेज कॉलेज की बाउंडरी के अंदर से नाला निकल रहा है, जिसे पाट दिया गया है। इसकी सफाई में नगर निगम को हर साल परेशानी आती है। इसी तरह हरीपर्वत से दिल्ली गेट और मदिया कटरा तक 38 दुकानें और मकान बने हुए हैं। पूर्व में क्वीन विक्टोरिया इंटर कॉलेज की ओर से चेन मशीन उतारकर दिल्ली गेट पर सफाई हो जाती थी, लेकिन अब वह भी बंद हो गया। मदिया कटरा पर रवि हॉस्पिटल के अंदर से नाला निकलने की रिपोर्ट निगम अधिकारी कर चुके हैं, लेकिन यहां भी नाला खुलवाया नहीं गया। मंटोला और काजीपाड़ा नाले के साथ खतैना और लोहामंडी में भी नाले के ऊपर मकान बने हुए हैं।
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नालों के लिए ये हैं नियम
- नालों को पाटा नहीं जा सकता, उन्हें खुला रखना होगा।
- नालों के दोनों ओर सफाई के लिए जगह छोड़नी होगी।
- नालों से छह फीट छोड़कर बैरिकेडिंग की जा सकती है।
7 मकानों को नोटिस
बालूगंज में बेनी सिंह इंटर कॉलेज के पास नाला ढहने से गिरे मकानों के बाद बृहस्पतिवार को नगर निगम ने सर्वे किया। निगम ने मकान जर्जर मिलने पर सात लोगों को नोटिस दिए हैं, जिसमें कहा है कि जर्जर मकानों को क्षतिग्रस्त घोषित किया जाता है। तीन दिन में मकानों को अपने खर्च पर गिरवाएं। भवन गिरने से कोई नुकसान होता है तो उसकी जिम्मेदारी भवन स्वामी की होगी। निगम ने मुकेश, सुरेश, प्रदीप, अनिल, अजय, प्रमोद और अतीश को नोटिस जारी किए हैं।
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120 नालों पर खर्च किए 70 करोड़
नगर निगम ने 120 नालों के निर्माण पर बीते साल अवस्थापना निधि से 49 करोड़ से अधिक और नगर निगम निधि एवं अन्य निधियों से 20 करोड़ रुपये खर्च किए थे। करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी इस साल शहर में जलभराव बढ़ गया। बिजलीघर, काजीपाड़ा, मदिया कटरा, कैलाशपुरी रोड, आवास विकास, लोहामंडी, खतैना, राजपुर चुंगी समेत क्षेत्रों में नए बने नालों पर ही अवैध निर्माण कर लिए गए, जिससे उनकी सफाई ही नहीं हो पाई।
पार्षदों ने साधा निशाना
- 70 करोड़ रुपये बर्बाद हो गए। नाला सफाई के लिए दो करोड़ रुपये कर्मचारियों के वेतन पर दो माह में खर्च हुए हैं। तब ये हाल है कि पूरा शहर पानी में डूब गया। - रवि माथुर, पार्षद
- नालों के ऊपर किए गए अवैध निर्माण हटाने थे, लेकिन हटाए नहीं गए। सदन में भी मेयर ने निर्देश दिए। अब नतीजा सबके सामने है। न जाने कितने मकान और गिरेंगे। - राकेश जैन, पार्षद
- नाले के ऊपर किए गए निर्माण बिना भेदभाव तोड़े जाएं। हरीपर्वत से मदिया कटरा के बीच नाले की सालों से सफाई नहीं हुई है। एक किमी. का हिस्सा पूरी तरह से ढका है, जिससे कैलाशपुरी तक जलभराव होता है। - शरद चौहान, पार्षद
हटाए जाएंगे नालों पर बने निर्माण
- नालों के ऊपर किए गए निर्माण हटाए जाएंगे। निर्माण विभाग और स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय बनाकर नालों की सफाई कराने को कहा गया है। सभी अवरोध हटेंगे। - संतोष कुमार वैश्य, नगर आयुक्त

नालों पर अवैध निर्माण

नालों पर अवैध निर्माण

नालों पर अवैध निर्माण