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इंटर कॉलेज की जमीन की अदला-बदली कर किया 41 लाख का घपला, ऐसे हुआ खुलासा

Mon, 16 Sep 2019 04:18 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Mon, 16 Sep 2019 04:18 PM IST
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scam of 41 lakh by exchange land of inter college in agra
घोटाला - फोटो : amar ujala
आगरा के खेरागढ़ के नगला विष्णु स्थित श्री महात्मा दूधादारी इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति ने जमीन की अदला-बदली कर 43 लाख रुपये का घपला कर दिया। शिकायत पर कराई गई जांच में आरोप सही पाए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक ने प्रबंध समिति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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शिकायत नगला उदया के धर्मेन्द्र सिसौदिया ने की। उनका कहना है कि यह घपला वर्ष 2011 में हुआ। उस समय जो लोग प्रबंध समिति में थे, वे अभी भी हैं। सिसौदिया का आरोप है कि इन लोगों ने विद्यालय की जमीन सर्किल रेट के हिसाब से लगभग 80 लाख रुपये प्राइवेट विद्यालय जीवी इंटर कॉलेज को दी। 
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इसके बदले जो जमीन ली, उसकी सर्किल रेट के हिसाब से कीमत लगभग 37 लाख की है। दोनों की कीमत में अंतर देखें तो 43 लाख रुपये है। इसकी शिकायत लंबे समय से की जा रही थी लेकिन जांच अब जाकर पूरी हुई है। अब भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
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और भी गोलमाल मिले

1. विद्यालय की भूमि से प्राप्त आय खाते में जमा नहीं कराई जाती है। विधिवत लेखा-जोखा नहीं है। कृषि से प्राप्त आय का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसके लिए प्रबंध समिति दोषी है।
2. बिना अनुमति के विद्यालय की जमीन प्राइवेट स्कूल को दी और बदले में जमीन ली। यह शिकायत सही पाई गई।
3. विद्यालय की भूमि पर प्राइवेट आईटीआई कॉलेज बनाया गया। प्रबंध समिति की ओर से संचालित है। विभाग से अनुमति नहीं ली गई।
4. आईटीआई कॉलेज का लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं कराया जाता। कॉलेज में इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति के सगे संबंधी कार्यरत हैं।

सरकारी जमीन पर प्राइवेट आईटीआई कॉलेज खोले जाने और बगैर अनुमति के जमीन विक्रय में विद्यालय की प्रबंध समिति जांच में दोषी मिली है। नोटिस जारी किया है। अगर जवाब नहीं मिला तो समिति भंग कर एफआईआर कराई जाएगी। - रविंद्र सिंह, डीआईओएस

इसी विद्यालय के मामले में फंसे हैं डीआईओएस

इस विद्यालय की प्रबंध समिति की जांच डीआईओएस ने कराई। जांच रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर हैं लेकिन वह खुद इसी प्रकरण से जुड़े मामले में फंस गए हैं। दरअसल, पिछले साल प्रबंधक देवेंद्र सिंह की मौत के बाद प्रबंध समिति में विवाद हुआ। 

कई समितियां बन गई हैं, असली भी और फर्जी भी। डीआईओएस रविंद्र सिंह पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी समिति के हस्ताक्षर सत्यापित कर दिए। इसकी जांच आजमगढ़ के डीआईओएस को सौंपी गई है। रिपोर्ट आने का इंतजार है।

प्रबंध समिति के अध्यक्ष ने कहा, मुझे खास जानकारी नहीं

प्रबंध समिति के वर्तमान अध्यक्ष लाखन सिंह हैं। उनका कहना है कि आईटीआई खोले जाने के संबंध में तत्कालीन प्रधानाचार्य जेपी शर्मा ने लिखापढ़ी की थी, उन्हें ही जानकारी थी। वह सेवानिवृत्त हो गए। जमीन बेची नहीं गई, तबादला (अदला बदली) हुआ था। इसकी जानकारी देवेंद्र सिंह को थी, उनकी मौत हो चुकी है।
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