पृथ्वी दिवस: आगरा में काट दिए सवा लाख पेड़...घट गई हरियाली, 10 गुना अधिक तैयार करने का था लक्ष्य
आगरा में विकास के लिए 10 वर्षों में करीब सवा लाख पेड़ काट दिए गए। इससे जिले की हरियाली घट गई। जबकि काटने का 10 गुना अधिक हरियाली तैयार करने का लक्ष्य था।
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उत्तर प्रदेश के आगरा में मार्च में पारा 44 डिग्री सेल्सियस पार पहुंच गया। विशेषज्ञों ने इसकी वजह पेड़ों की कटाई और घटती हरियाली बताई। इसकी पुष्टि भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट कर रही है। इसके आंकड़े बताते हैं कि इन 10 साल में .35 फीसदी हरियाली कम हो गई।
आगरा का क्षेत्रफल 4041 वर्ग किमी है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार 2011 में 6.85 फीसदी हरियाली थी। मतलब 276 वर्ग किमी क्षेत्र में वन थे। हाईवे, एक्सप्रेसवे, सड़क, परियोजनाओं समेत कॉलोनियों के निर्माण में करीब 1.25 लाख पेड़ कट गए।
टीटीजेड ने इसके एवज में 10 गुना पेड़ लगाकर हरियाली के आदेश दिए। संबंधित विभागों ने दावा भी किया लेकिन हकीकत में इतनी संख्या में पेड़ नहीं लगे। लगाए भी गए तो इनकी देखभाल न किए जाने से नष्ट हो गए। नतीजतन साल दर साल हरियाली क्षेत्र कम होता गया। 2021 में 6.50 फीसदी क्षेत्र (262 वर्ग किमी) ही हरा-भरा रह गया है।
पर्यावरणविद डॉ. शरद गुप्ता ने कहा कि बीते 10 साल में सवा लाख से अधिक पेड़ कटे होंगे। पेड़ आगरा में काटे जाते हैं। यहां जगह न होने का हवाला देकर दूसरे जिलों में हरियाली विकसित का दावा किया जाता है। हालांकि इनकी मॉनिटिरिंग और ऑडिट भी नहीं होती।
इस साल 1.25 लाख पौधे लगाएंगे
डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि बीते 10 सालों में सड़क, परियोजना और अन्य कार्यों के लिए टीटीजेड की अनुमति पर पेड़ काटे। इसके बदले हरियाली विकसित भी की है। किन्हीं कारणों से हरियाली घटी है। इस साल 1.25 लाख पौधे लगाएंगे।
सप्ताह में एक दिन न चलाएं वाहन
शिक्षक डीईआई डॉ. अरुण प्रताप सिकरवार ने कहा कि सप्ताह में एक दिन वाहनों का उपयोग न करें। स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण रक्षा के लिए जागरूक करने की जरूरत है। लोग पूरी तरह से पॉलीथिन का उपयोग बंद करें। इससे काफी हद तक धरती की सेहत ठीक होगी।
ये है स्थिति-
साल |
हरित क्षेत्र(प्रतिशत में) |
वर्ग किमी |
2011 |
6.85 |
276 |
2013 |
6.78 |
273 |
2015 |
6.75 |
273 |
2017 |
6.73 |
272 |
2019 |
6.69 |
262.6 |
2021 |
6.50 |
262 |