{"_id":"673d6cc968353fa36b0a7555","slug":"sarthak-nursing-home-running-with-fake-noc-of-cfo-inspection-exposed-2024-11-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"गजब का खेल: सीएफओ की फर्जी एनओसी से चलता मिलता सार्थक नर्सिंग होम, निरीक्षण में खुल गई पोल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गजब का खेल: सीएफओ की फर्जी एनओसी से चलता मिलता सार्थक नर्सिंग होम, निरीक्षण में खुल गई पोल
Wed, 20 Nov 2024 10:29 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Wed, 20 Nov 2024 10:29 AM IST
सार
आगरा में अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने कमला नगर के सात हॉस्पिटलों का निरीक्षण किया। इस दौरान सार्थक नर्सिंग होम में गजब का खेल सामने आया। इस अस्पताल में सीएफओ की फर्जी एनओसी मिली।
विज्ञापन
निरीक्षण करने पहुंची टीम
- फोटो : संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आगरा में स्वास्थ्य विभाग और अग्निशमन विभाग की संयुक्त टीम के निरीक्षण में अस्पतालों में चिकित्सकीय और अग्निशमन मानकों की पोल खुल गई। कमला नगर के 7 हॉस्पिटल बिना फायर एनओसी के चलते मिले। सार्थक नर्सिंग होम के संचालक ने फर्जी एनओसी दिखा दी, जिस पर मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) का नाम विवेक कुमार शर्मा लिखा हुआ था।
9 सितंबर वर्ष 2022 में एनओसी जारी करना दिखाया। तब विवेक कुमार शर्मा नाम के कोई सीएफओ नहीं थे। अस्पताल संचालक डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि ये एनओसी अग्निशमन विभाग से ही जारी हुई है। आवेदन के बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने निरीक्षण भी किया था। रिपोर्ट बनाकर डीएम और सीएमओ को भेज दी है।
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त टीम ने कमला नगर स्थित हृदयम हॉस्पिटल, अभिलाषा हॉस्पिटल, बीएम हॉस्पिटल, ओम अशोक हॉस्पिटल और सर्वोदय हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इन पर अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं थी। जांच टीम में नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र लवानिया, डॉ. जगपाल चाहर, एसएफओ सोमदत्त सोनकर मौजूद रहे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - UP: मेहंदी लगे हाथों से अपने आंसू पोंछती रह गई दुल्हन, बरात से पहले दूल्हे को लेकर आई ऐसी खबर...मचा कोहराम
डाॅक्टर नहीं मिले
भाटिया क्रिटिकल केयर यूनिट का क्लीनिक के तौर पर पंजीकरण है, लेकिन अस्पताल चलता मिला। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। 10 बेड का आईसीयू था। अस्पताल में 4 मरीज भर्ती मिले। कोई डॉक्टर नहीं था। संचालक के रूप में बोर्ड पर डॉ. अमित सिंह लिखा था, ये भी मौजूद नहीं थे।
ये मिली अस्पतालों में स्थित
1- ह्रदयम हास्पिटल में करीब 10 मरीज भर्ती थे। संचालक डॉ. दीपक अग्रवाल नहीं मिले। कई बार फोन किया। मगर, नहीं आए।
2- सर्वोदय हॉस्पिटल में पीवीसी के पैनलों का प्रयोग मिला। टीम ने बताया कि ये अत्यधिक ज्वलनशील होता है। लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं कराया था। इसमें 10 मरीज भर्ती थे। आईसीयू भी चलता मिला।
3- ओम अशोका हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। अस्पताल में 4 मरीज भर्ती थे। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं था।
4- बीएम हॉस्पिटल को अग्निशमन मानकों की कमी पर पहले नोटिस जारी हुआ था। फिर भी बिना एनओसी के चल रहा था। भवन भी मानकों के हिसाब से नहीं बना था। आईसीयू में मरीज भर्ती थे। बाहर निर्माण कार्य चल रहा था।
5- अभिलाषा हॉस्पिटल सुल्तानगंज पुलिया पर ऊपरी मंजिल को आवास के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑफिस भी संचालित है। 10-12 कर्मचारी कार्य करते मिले। चार मरीज भर्ती थे। एक बेड का एनआईसीयू भी मिला।
ये भी पढ़ें - UP: सास और नंद के कमरे में किया बंद... फिर नई नवेली दुल्हन ने किया ऐसा कांड, दूल्हे के छूटे पसीने; ऐसी करतूत पर नहीं होगा यकीन
ये बोले मुख्य अग्निशमन अधिकारी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त अभियान चला रही है। बिना एनओसी चलते मिले अस्पतालों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। -
जब एनओसी नहीं तो लाइसेंस कैसे हुए जारी
सीएफओ के मुताबिक, शासनादेश के तहत बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी जारी हुए, किसी भी अस्पताल का पंजीकरण नहीं कराया जा सकता है। अब सवाल उठ रहा है कि जब एनओसी नहीं थी तो अस्पताल कैसे संचालित थे? इनके लाइसेंस कैसे जारी हो गए?
विज्ञापन
9 सितंबर वर्ष 2022 में एनओसी जारी करना दिखाया। तब विवेक कुमार शर्मा नाम के कोई सीएफओ नहीं थे। अस्पताल संचालक डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि ये एनओसी अग्निशमन विभाग से ही जारी हुई है। आवेदन के बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने निरीक्षण भी किया था। रिपोर्ट बनाकर डीएम और सीएमओ को भेज दी है।
विज्ञापन
सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि संयुक्त टीम ने कमला नगर स्थित हृदयम हॉस्पिटल, अभिलाषा हॉस्पिटल, बीएम हॉस्पिटल, ओम अशोक हॉस्पिटल और सर्वोदय हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इन पर अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं थी। जांच टीम में नोडल अधिकारी डॉ. जितेंद्र लवानिया, डॉ. जगपाल चाहर, एसएफओ सोमदत्त सोनकर मौजूद रहे।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें - UP: मेहंदी लगे हाथों से अपने आंसू पोंछती रह गई दुल्हन, बरात से पहले दूल्हे को लेकर आई ऐसी खबर...मचा कोहराम
डाॅक्टर नहीं मिले
भाटिया क्रिटिकल केयर यूनिट का क्लीनिक के तौर पर पंजीकरण है, लेकिन अस्पताल चलता मिला। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है। 10 बेड का आईसीयू था। अस्पताल में 4 मरीज भर्ती मिले। कोई डॉक्टर नहीं था। संचालक के रूप में बोर्ड पर डॉ. अमित सिंह लिखा था, ये भी मौजूद नहीं थे।
ये मिली अस्पतालों में स्थित
1- ह्रदयम हास्पिटल में करीब 10 मरीज भर्ती थे। संचालक डॉ. दीपक अग्रवाल नहीं मिले। कई बार फोन किया। मगर, नहीं आए।
2- सर्वोदय हॉस्पिटल में पीवीसी के पैनलों का प्रयोग मिला। टीम ने बताया कि ये अत्यधिक ज्वलनशील होता है। लाइसेंस का नवीनीकरण भी नहीं कराया था। इसमें 10 मरीज भर्ती थे। आईसीयू भी चलता मिला।
3- ओम अशोका हॉस्पिटल में कोई डॉक्टर नहीं मिला। अस्पताल में 4 मरीज भर्ती थे। लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं था।
4- बीएम हॉस्पिटल को अग्निशमन मानकों की कमी पर पहले नोटिस जारी हुआ था। फिर भी बिना एनओसी के चल रहा था। भवन भी मानकों के हिसाब से नहीं बना था। आईसीयू में मरीज भर्ती थे। बाहर निर्माण कार्य चल रहा था।
5- अभिलाषा हॉस्पिटल सुल्तानगंज पुलिया पर ऊपरी मंजिल को आवास के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। ऑफिस भी संचालित है। 10-12 कर्मचारी कार्य करते मिले। चार मरीज भर्ती थे। एक बेड का एनआईसीयू भी मिला।
ये भी पढ़ें - UP: सास और नंद के कमरे में किया बंद... फिर नई नवेली दुल्हन ने किया ऐसा कांड, दूल्हे के छूटे पसीने; ऐसी करतूत पर नहीं होगा यकीन
ये बोले मुख्य अग्निशमन अधिकारी
मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र सिंह ने बताया कि अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की टीम संयुक्त अभियान चला रही है। बिना एनओसी चलते मिले अस्पतालों की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। -
जब एनओसी नहीं तो लाइसेंस कैसे हुए जारी
सीएफओ के मुताबिक, शासनादेश के तहत बिना अग्निशमन विभाग की एनओसी जारी हुए, किसी भी अस्पताल का पंजीकरण नहीं कराया जा सकता है। अब सवाल उठ रहा है कि जब एनओसी नहीं थी तो अस्पताल कैसे संचालित थे? इनके लाइसेंस कैसे जारी हो गए?