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यहां है शाहजहां के साले का मकबरा, स्मारक का प्रचार-प्रसार न होने से नहीं जाते सैलानी
Tue, 24 Nov 2020 12:49 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 24 Nov 2020 12:49 PM IST
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सलावत खां का मकबरा
- फोटो : अमर उजाला
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आगरा में मुगल बादशाह शाहजहां के साले और वजीर सलावत खां के मकबरे पर ताला लगा हुआ है। इसका प्रचार प्रसार भी नहीं है, इस कारण सैलानी नहीं जाते। ताजमहल, किला, सीकरी सहित अन्य स्मारकों के आस पास ऐसा कोई बोर्ड नहीं लगा है जिस पर सलावत खां के मकबरे तक पहुंचने का रास्ता बताया गया हो।
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इस स्मारक में 64 खंभे हैं, इसलिए इसे 64 खंभा भी कहा जाता है। यह आईएसबीटी के सामने की तरफ है। हाईवे से सटा होने के बावजूद इसे देखने सैलानी नहीं जाते हैं। इसके आसपास अवैध निर्माण हो गए। नजदीक जाने पर ही पता चलता है कि यहां स्मारक है।
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इतिहासकार राज किशोर शर्मा राजे ने बताया कि सलावत के पास कोषागार का जिम्मा था। वह शाहजहां का चहेता वजीर था। उसके कत्ल के बारे में इतिहास में दो विवरण है। पहले के अनुसार, मारवाड़ के राजकुमार एवं मुगल मनसबदार अमर सिंह राठौर एक बार स्वीकृत अवकाश से अधिक दिनों तक दरबार से गैरहाजिर रहे। इस पर सलावत खां के कहने पर शाहजहां ने उन पर बड़ी रकम का जुर्माना कर दिया। इससे उत्तेजित होकर अमर सिंह ने भरे दरबार में उसका कत्ल कर दिया।
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दूसरे विवरण के अनुसार, कई दिन की गैरहाजिरी के बाद अमर सिंह 25 जुलाई 1644 को दारा शिकोह की यमुना किनारे स्थित हवेली पर पहुंचा। उसने अचानक तलवार निकाली और वहां खड़े सलावत खां की पसलियों में घुसेड़ दी। सलावत मौके पर मर गया। उसी समय खलीतुल्ला खां, सैयद सालार ने अमर सिंह राठौर को काट डाला।
अराजकतत्वों के लिए बंद किया गया है गेट
एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के मुताबिक सभी स्मारक पर्यटकों के लिए खुली हैं। कई ऐसे स्मारक हैं, जहां पर अराजकतत्व ज्यादा हैं और स्मारकों के अंदर अराजकता न फैलाएं, इसलिए गेट बंद कर केवल उन्हीं को प्रवेश देते हैं, जो पर्यटक हैं। पर्यटक किसी भी स्मारक के अंदरूनी हिस्सों का भ्रमण कर सकते हैं।
ऐसे पहुंचे
आईएसबीटी के सामने ही तरफ गैलाना के लिए रास्ता गया है। इसी रोड पर सलावत खां का मकबरा है।
अराजकतत्वों के लिए बंद किया गया है गेट
एएसआई अधीक्षण पुरातत्वविद वसंत कुमार स्वर्णकार के मुताबिक सभी स्मारक पर्यटकों के लिए खुली हैं। कई ऐसे स्मारक हैं, जहां पर अराजकतत्व ज्यादा हैं और स्मारकों के अंदर अराजकता न फैलाएं, इसलिए गेट बंद कर केवल उन्हीं को प्रवेश देते हैं, जो पर्यटक हैं। पर्यटक किसी भी स्मारक के अंदरूनी हिस्सों का भ्रमण कर सकते हैं।
ऐसे पहुंचे
आईएसबीटी के सामने ही तरफ गैलाना के लिए रास्ता गया है। इसी रोड पर सलावत खां का मकबरा है।