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Agra News: अंगारकी योग में आज मनेगी सकट चौथ, रखा जाएगा व्रत
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कासगंज। माघ मास की संकष्टी चतुर्थी, जिसे लोकभाषा में सकट चौथ कहा जाता है। मंगलवार को अंगारकी योग में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जाएगी। माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उपवास रखेंगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी विशेष फलदायी मानी जाती है।
ज्योतिषाचार्य पं. मुकुंद बल्लभ भट्ट ने बताया कि माघ मास की संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ, माघी चौथ, संकटा चौथ और तिलकुट चौथ भी कहा जाता है। जब यह तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस योग में भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणेश मंत्र का जाप करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।
उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, नंदी और चंद्रदेव की पूजा का भी विधान है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
-प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
-भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा स्थल की सफाई करें
-हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें
-दूर्वा, लाल फूल, मोदक, फल, धूप-दीप से पूजा करें
-सायंकाल गणेश प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं
-रात्रि में चंद्रदर्शन कर जल या दूध से अर्घ्य दें
-भोग लगाकर व्रत का पारण करें
रिपोर्ट: मनोज माहेश्वरी
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ज्योतिषाचार्य पं. मुकुंद बल्लभ भट्ट ने बताया कि माघ मास की संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ, माघी चौथ, संकटा चौथ और तिलकुट चौथ भी कहा जाता है। जब यह तिथि मंगलवार को पड़ती है, तो इसे अंगारकी संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस योग में भगवान गणेश की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और गणेश मंत्र का जाप करने से मंगल दोष का प्रभाव कम होता है।
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उन्होंने बताया कि इस दिन भगवान गणेश के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, नंदी और चंद्रदेव की पूजा का भी विधान है। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया जाता है।
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संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि
-प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
-भगवान गणेश का ध्यान कर पूजा स्थल की सफाई करें
-हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें
-दूर्वा, लाल फूल, मोदक, फल, धूप-दीप से पूजा करें
-सायंकाल गणेश प्रतिमा के समक्ष दीपक जलाएं
-रात्रि में चंद्रदर्शन कर जल या दूध से अर्घ्य दें
-भोग लगाकर व्रत का पारण करें
रिपोर्ट: मनोज माहेश्वरी