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'कालिंदी' को बचाने के लिए 84 कोस की पदयात्रा करेंगे साधु-संत, एक फरवरी से शुरू होगा अभियान
Fri, 24 Jan 2020 01:21 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jan 2020 01:21 PM IST
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यमुना नदी में व्याप्त गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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एक फरवरी से ब्रज में यमुना नदी (कालिंदी) को बचाने की अलख जगेगी। आगरा के बटेश्वर से वृंदावन तक 84 कोस की पदयात्रा कर साधु-संत और श्रद्धालु यमुना की निर्मलता के लिए सामाजिक चेतना जगाने का काम करेंगे।
36 दिन की पदयात्रा में बिहार, बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश के संतों के साथ देश भर के श्रद्धालु शामिल होंगे। महादेव गोशाला मथुरा के वंदनदास गिरि महाराज के नेतृत्व में पदयात्रा निकाली जाएगी।
बटेश्वर में बृहस्पतिवार को वंदनदास गिरि, सियाराम दास ने इसकी रणनीति बनाई। उन्होंने बताया कि यमुना की निर्मलता तक मुहिम जारी रहेगी। इस दौरान बृज के पहाड़, नदियां, धर्म स्थल, वन की उजड़ी पड़ी विरासत से साधु-संत और श्रद्धालु रूबरू होंगे।
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एक फरवरी से सात मार्च तक आयोजित होने वाली ब्रज धाम के दिव्य दर्शन की यात्रा बटेश्वर की ऐतिहासिक शिव मंदिर शृंखला पर यमुना पूजन के साथ शुरू होगी।
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36 दिन की पदयात्रा में बिहार, बंगाल, राजस्थान, मध्य प्रदेश के संतों के साथ देश भर के श्रद्धालु शामिल होंगे। महादेव गोशाला मथुरा के वंदनदास गिरि महाराज के नेतृत्व में पदयात्रा निकाली जाएगी।
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बटेश्वर में बृहस्पतिवार को वंदनदास गिरि, सियाराम दास ने इसकी रणनीति बनाई। उन्होंने बताया कि यमुना की निर्मलता तक मुहिम जारी रहेगी। इस दौरान बृज के पहाड़, नदियां, धर्म स्थल, वन की उजड़ी पड़ी विरासत से साधु-संत और श्रद्धालु रूबरू होंगे।
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एक फरवरी से सात मार्च तक आयोजित होने वाली ब्रज धाम के दिव्य दर्शन की यात्रा बटेश्वर की ऐतिहासिक शिव मंदिर शृंखला पर यमुना पूजन के साथ शुरू होगी।
इन स्थानों से गुजरेगी यात्रा
वंदनदास गिरि महाराज ने बताया कि दिव्य दर्शन यात्रा के दौरान बटेश्वर, रेणुकाधाम च्यवन ऋषि आश्रम, पांडव तपो भूमि, व्यास जन्म स्थान, सत्यवती जन्म स्थान, शृंगी ऋषि तपो भूमि, सूरदास तपो भूमि, नारद गुफा, श्रीकृष्ण स्वधाम गमन स्थल, दाऊजी, चिंता हरण, गोकुल, रमण रेती, कृष्ण जन्म भूमि, ध्रुव तप स्थान, शांतनु कुंड, गोवर्धन, बरसाना, नंदगांव, कोकिला वन, चमेली वन, बलराम कुंड, भद्रवन धाम, वंशीवट, राधा रानी मंदिर के दर्शन भी लोग करेंगे। साथ ही विरासत के संरक्षण का संकल्प भी लिया जाएगा।
ये होंगे यात्रा के पड़ाव
- एक फरवरी को सियाराम दास आश्रम बटेश्वर
- दो फरवरी को चौसिंगी
- तीन फरवरी को भदरौली
- चार फरवरी को अरनौटा
- पांच फरवरी को फतेहाबाद
- छह फरवरी गोसाईं गढ़ी
- सात फरवरी को घाघपुरा
- आठ फरवरी को परशुराम की गढ़ी
- नौ फरवरी को रामपाल की गढ़ी
- 10 फरवरी को दिगनेर
- 11 फरवरी को कहरई
- 12 फरवरी को बोदला
- 13 फरवरी को अकबरा
- 14 फरवरी सेलखेड़ा
- 15 फरवरी को दाऊजी
- 16 फरवरी को गोकुल
- 17 फरवरी अडीग
- 18 फरवरी गोवर्धन
- 19 फरवरी बहज
- 20 फरवरी टांकौली
- 21 फरवरी आदिबद्री
- 22 फरवरी केदारनाथ
- 23 फरवरी को कामा
- 24 फरवरी बरसाना
- 25 फरवरी कोकिला वन
- 26 फरवरी कोटवन
- 27 फरवरी चमेलीवन
- 28 फरवरी वनचारी
- 29 फरवरी नंद वन
- 1 मार्च पैगांव
- 2 मार्च शेरगण
- 3 मार्च हनुमानजी की झाड़ी
- 4 मार्च नौझील
- 5 मार्च टैंटीगांव
- 6 मार्च को वंशीवट
- 7 मार्च को वृंदावन।
ये होंगे यात्रा के पड़ाव
- एक फरवरी को सियाराम दास आश्रम बटेश्वर
- दो फरवरी को चौसिंगी
- तीन फरवरी को भदरौली
- चार फरवरी को अरनौटा
- पांच फरवरी को फतेहाबाद
- छह फरवरी गोसाईं गढ़ी
- सात फरवरी को घाघपुरा
- आठ फरवरी को परशुराम की गढ़ी
- नौ फरवरी को रामपाल की गढ़ी
- 10 फरवरी को दिगनेर
- 11 फरवरी को कहरई
- 12 फरवरी को बोदला
- 13 फरवरी को अकबरा
- 14 फरवरी सेलखेड़ा
- 15 फरवरी को दाऊजी
- 16 फरवरी को गोकुल
- 17 फरवरी अडीग
- 18 फरवरी गोवर्धन
- 19 फरवरी बहज
- 20 फरवरी टांकौली
- 21 फरवरी आदिबद्री
- 22 फरवरी केदारनाथ
- 23 फरवरी को कामा
- 24 फरवरी बरसाना
- 25 फरवरी कोकिला वन
- 26 फरवरी कोटवन
- 27 फरवरी चमेलीवन
- 28 फरवरी वनचारी
- 29 फरवरी नंद वन
- 1 मार्च पैगांव
- 2 मार्च शेरगण
- 3 मार्च हनुमानजी की झाड़ी
- 4 मार्च नौझील
- 5 मार्च टैंटीगांव
- 6 मार्च को वंशीवट
- 7 मार्च को वृंदावन।