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Agra: पौने तीन सौ साल बाद सिद्धि विनायक मंदिर पहुंचा ग्वालियर का राजघराना, पूजा के वाद किया ये वादा
Fri, 31 Mar 2023 12:53 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Fri, 31 Mar 2023 12:53 PM IST
सार
ग्वालियर का राजघराने के वारिस महा आर्यन सिंधिया दर्शन करने गोकुलपुरा पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंदिर को विशाल रूप दिया जाएगा। वह गणेश चतुर्थी पर फिर आएंगे।
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गणेश जी
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
ग्वालियर राजघराने के मराठा सरदार राजा महादजी सिंधिया ने वर्ष 1760 में गोकुलपुरा स्थित प्राचीन देवा गणेश मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था। तब इसका नामकरण श्रीसिद्धि विनायक गणेश मंदिर किया था। करीब पौने तीन सौ साल बाद ग्वालियर राजघराने के वारिस महा आर्यन सिंधिया ने रामनवमी पर मंदिर में पूजा की। उन्होंने कहा कि मंदिर को विशाल रूप दिया जाएगा। वह गणेश चतुर्थी पर फिर आएंगे।
मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि महादजी सिंधिया ने अपने राजकाल में गणेश मंदिरोंं का जीर्णोद्धार कराया था। उनके पूर्वजों ने बताया था कि महादजी ने गोकुलपुरा के इस मंदिर के रखरखाव का जिम्मा लिया। देखरेख के लिए आठ आने रोजाना तय किए थे, जोकि काफी वर्षों तक ग्वालियर से आते रहे। इस मंदिर से गणेश चतुर्थी पर शोभायात्रा की शुरुआत भी की गई, जो सिलसिला आज तक जारी है।
कालांतर में सिंधिया घराने का मंदिर से संपर्क टूट गया। डेढ़ साल पहले सिंधिया घराने के व्यक्ति ने मंदिर में आकर यहां के बारे में जानकारी हासिल की थी। अब लंबे अरसे के बाद सिंधिया घराने के महा आर्यन सिंधिया मंदिर को खोजते हुए गोकुलपुरा पहुंचे। उन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा भेजे गए पत्रों को देखा। मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। आधा घंटे तक पूजा की। उन्होंने मंदिर में उनके पूर्वजों द्वारा लगाए प्राचीन पीपल के पेड़ पर मत्था भी टेका।
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मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि महादजी सिंधिया ने अपने राजकाल में गणेश मंदिरोंं का जीर्णोद्धार कराया था। उनके पूर्वजों ने बताया था कि महादजी ने गोकुलपुरा के इस मंदिर के रखरखाव का जिम्मा लिया। देखरेख के लिए आठ आने रोजाना तय किए थे, जोकि काफी वर्षों तक ग्वालियर से आते रहे। इस मंदिर से गणेश चतुर्थी पर शोभायात्रा की शुरुआत भी की गई, जो सिलसिला आज तक जारी है।
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कालांतर में सिंधिया घराने का मंदिर से संपर्क टूट गया। डेढ़ साल पहले सिंधिया घराने के व्यक्ति ने मंदिर में आकर यहां के बारे में जानकारी हासिल की थी। अब लंबे अरसे के बाद सिंधिया घराने के महा आर्यन सिंधिया मंदिर को खोजते हुए गोकुलपुरा पहुंचे। उन्होंने अपने पूर्वजों द्वारा भेजे गए पत्रों को देखा। मंदिर के इतिहास के बारे में जानकारी हासिल की। आधा घंटे तक पूजा की। उन्होंने मंदिर में उनके पूर्वजों द्वारा लगाए प्राचीन पीपल के पेड़ पर मत्था भी टेका।
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