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किराया नहीं निकला तो 216 बसें की गई सरेंडर
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03एमएनपी-10-मैनपुरी डिपो में खड़ी रोडवेज बसें
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। कोरोना संक्रमण के चलते परिवहन विभाग को भी बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। किराया न निकलने पर रोडवेज और निजी बस संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। उन्होंने एआरटीओ कार्यालय में अपने वाहन सरेंडर कर दिए हैं।
रोडवेज बसों के संचालन से परिवहन निगम को जिले से बड़ी आमदनी होती है। लॉकडाउन के दौरान बसों का संचालन बंद होने काफी नुकसान हो चुका है। हाल ये है कि सवारियां कम होने के कारण रोडवेज को डीजल निकालना भी मुश्किल हो रहा है। निजी बस संचालकों को भी यही समस्या आ रही है। इसे देखते हुए रोडवेज ने 70 और निजी बस ऑपरेटरों ने 146 बसों को एआरटीओ कार्यालय में अभिलेख जमा कर सरेंडर कर दिया है। सरेंडर की गई रोडवेज की बसों में मैनपुरी डिपो की 34, बेवर डिपो की 26 और शिकोहाबाद डिपो की दस बसें शामिल हैं। इन सभी को 31 जुलाई तक के लिए सरेंडर किया गया है। इस अवधि में बस स्वामियों और रोडवेज को टैक्स अदा नहीं करना होगा। औसतन एक बस पर एक माह का टैक्स चार सौ रुपये प्रति सीट के हिसाब से लगता है। ये टैक्स हजारों में चुकाना पड़ता है। ऐसे में बिना कमाई के ये टैक्स अदा नहीं करना होगा।
संचालन हुआ तो छह गुना जुर्माना
सरेंडर की गई बसों के अभिलेख तो एआरटीओ कार्यालय में जमा कर दिए गए हैं, लेकिन बसों का स्वामित्व रोडवेज या निजी बस मालिकों के पास ही है। ऐसे में अगर कहीं संचालन होता पाया जाता है तो टैक्स के साथ ही छह गुना जुर्माना वसूल किया जाएगा।
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हाईलाइट्स
-70 बसें रोडवेज ने की सरेंडर
-146 निजी बसें भी की गईं सरेंडर
-250 हैं जिले में कुल निजी बसें
रोडवेज ने 70 और प्राइवेट 146 बसों को विभाग में अभिलेख जमा कर सरेंडर किया गया है। अगर इनका संचालन किया जाता है तो पूरी तरह अवैध माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कर्दम, एआरटीओ।
15 लाख का खर्चा, सात लाख की कमाई
मैनपुरी। अनलॉक-1 में रोडवेज को घाटे का सामना करना पड़ा है। एक महीने में परिवहन निगम की बसों ने 15 लाख का डीजल फूंक दिया। यात्रियों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज एक महीने में 7.40 लाख की आमदनी ही कर सकी। सवारियों की संख्या कम होने से रोडवेज को घाटे का सामना करना पड़ा है। एक लीटर डीजल इन दिनों 72. 65 रुपये में मिल रहा है। इस हिसाब से रोडवेज एक दिन में 50 हजार का डीजल खर्च कर देती है।
घाटे वाले रूटों पर बसें होंगी कम
परिवहन विभाग ने घाटे वाले रूटों पर बसों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। अनलॉक में जिन रूटों पर सवारियां कम निकली हैं। उन बसों की संख्या कम होगी। विभाग के निर्देश पर रोडवेज ने ऐसे मार्गों की पहचान कर ली है।
गाइड लाइन केे तहत बसों का संचालन हो रहा है। खर्च के सापेक्ष आय कम हो रही है। बसों को तय मार्गों पर ही भेजा जा रहा है। घाटे वाले रुटों पर विभाग के निर्देश के बाद ही बसें कम की जाएंगी।
पीके श्रीवास्तव, एआरएम
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रोडवेज बसों के संचालन से परिवहन निगम को जिले से बड़ी आमदनी होती है। लॉकडाउन के दौरान बसों का संचालन बंद होने काफी नुकसान हो चुका है। हाल ये है कि सवारियां कम होने के कारण रोडवेज को डीजल निकालना भी मुश्किल हो रहा है। निजी बस संचालकों को भी यही समस्या आ रही है। इसे देखते हुए रोडवेज ने 70 और निजी बस ऑपरेटरों ने 146 बसों को एआरटीओ कार्यालय में अभिलेख जमा कर सरेंडर कर दिया है। सरेंडर की गई रोडवेज की बसों में मैनपुरी डिपो की 34, बेवर डिपो की 26 और शिकोहाबाद डिपो की दस बसें शामिल हैं। इन सभी को 31 जुलाई तक के लिए सरेंडर किया गया है। इस अवधि में बस स्वामियों और रोडवेज को टैक्स अदा नहीं करना होगा। औसतन एक बस पर एक माह का टैक्स चार सौ रुपये प्रति सीट के हिसाब से लगता है। ये टैक्स हजारों में चुकाना पड़ता है। ऐसे में बिना कमाई के ये टैक्स अदा नहीं करना होगा।
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संचालन हुआ तो छह गुना जुर्माना
सरेंडर की गई बसों के अभिलेख तो एआरटीओ कार्यालय में जमा कर दिए गए हैं, लेकिन बसों का स्वामित्व रोडवेज या निजी बस मालिकों के पास ही है। ऐसे में अगर कहीं संचालन होता पाया जाता है तो टैक्स के साथ ही छह गुना जुर्माना वसूल किया जाएगा।
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हाईलाइट्स
-70 बसें रोडवेज ने की सरेंडर
-146 निजी बसें भी की गईं सरेंडर
-250 हैं जिले में कुल निजी बसें
रोडवेज ने 70 और प्राइवेट 146 बसों को विभाग में अभिलेख जमा कर सरेंडर किया गया है। अगर इनका संचालन किया जाता है तो पूरी तरह अवैध माना जाएगा और कार्रवाई की जाएगी।
राजेश कर्दम, एआरटीओ।
15 लाख का खर्चा, सात लाख की कमाई
मैनपुरी। अनलॉक-1 में रोडवेज को घाटे का सामना करना पड़ा है। एक महीने में परिवहन निगम की बसों ने 15 लाख का डीजल फूंक दिया। यात्रियों की संख्या कम होने के कारण रोडवेज एक महीने में 7.40 लाख की आमदनी ही कर सकी। सवारियों की संख्या कम होने से रोडवेज को घाटे का सामना करना पड़ा है। एक लीटर डीजल इन दिनों 72. 65 रुपये में मिल रहा है। इस हिसाब से रोडवेज एक दिन में 50 हजार का डीजल खर्च कर देती है।
घाटे वाले रूटों पर बसें होंगी कम
परिवहन विभाग ने घाटे वाले रूटों पर बसों की संख्या कम करने का निर्णय लिया है। अनलॉक में जिन रूटों पर सवारियां कम निकली हैं। उन बसों की संख्या कम होगी। विभाग के निर्देश पर रोडवेज ने ऐसे मार्गों की पहचान कर ली है।
गाइड लाइन केे तहत बसों का संचालन हो रहा है। खर्च के सापेक्ष आय कम हो रही है। बसों को तय मार्गों पर ही भेजा जा रहा है। घाटे वाले रुटों पर विभाग के निर्देश के बाद ही बसें कम की जाएंगी।
पीके श्रीवास्तव, एआरएम