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पुलवामा शहीद के परिवार से मिले जयंत चौधरी: कहा- 7 दिन में मांगें पूरी नहीं हुईं तो करेंगे विरोध प्रदर्शन
Tue, 10 Aug 2021 04:10 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 10 Aug 2021 04:10 PM IST
सार
जयंत चौधरी ने कहा कि भाजपा राष्ट्रवादी मुद्दों पर वोट तो लेती है लेकिन शहीदों के परिवारों का ख्याल नहीं रखती।
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पुलवामा शहीद के परिवार से मिले जयंत चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने एलान किया कि अगर सात दिन में शहीद के परिजनों की मांगें पूरी नहीं कीं तो कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करेंगे। वह शहीद के परिजनों को लेकर राष्ट्रपति और राज्यपाल से मिलेंगे। मंगलवार को कहरई में परिजनों से जयंत मिले। वीरागंना की पत्नी ममता रावत से उनकी मांगों और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में अभद्रता के बारे में जाना। वीरांगना ने उन्हें बताया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में पुलिस ने उनसे अभद्रता की। इस जयंत ने कहा कि यह शर्मनाक है। सात दिन में शासन-प्रशासन मांगें पूरी नहीं करता है तो कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन करेंगे।
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अपराधी की तरह किया बर्ताव : ममता रावत
शहीद की वीरांगना ममता रावत ने कहा कि रविवार को शहर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की जानकारी मिलने पर वह उनसे मिलकर अपनी समस्याएं बताना चाहती थी, लेकिन पुलिस ने उनको मिलने नहीं दिया। थाने लेकर आए और अपराधियों की तरह बर्ताव किया। थाने में बैठाए रखा। पुलिस के इस व्यवहार से खिन्न हैं।
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वीरागंना ने बताई मांगें
- शहीद के स्मारक के लिए सरकारी जमीन दी जाए।
- जीवनयापन के लिए खेती करने के लिए जमीन मिले।
- बिजली का निशुल्क कनेक्शन दिलवाया जाए।
- एक दिन का वेतन देने की घोषणा करने वाले सरकारी विभागों के कर्मचारियों से जुटी राशि दिलाई जाए।
- स्मारक द्वार के निर्माण तेजी से कराएं और शहीद के नाम से चौराहा का नामकरण किया जाए।
राजनीतिक जमघट, खूब लगे नारे
आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। रालोद अध्यक्ष के शहीद के घर जाने को चुनावी स्टंट से जोड़ा जा रहा है। उनके पहुंचते ही राजनीतिक लोगों का जमघट लग गया, कार्यकर्ताओं ने जमकर धक्कामुक्की की। पार्टी और अपने नेता के जिंदाबाद के खूब नारे भी लगाए। पुलवामा कांड के वक्त जयंत परिजनों से मिले थे, लेकिन इसकेबाद ढाई साल में पार्टी को कोई कार्यकर्ता उनके हालचाल तक जानने नहीं पहुंचा।
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- शहीद के स्मारक के लिए सरकारी जमीन दी जाए।
- जीवनयापन के लिए खेती करने के लिए जमीन मिले।
- बिजली का निशुल्क कनेक्शन दिलवाया जाए।
- एक दिन का वेतन देने की घोषणा करने वाले सरकारी विभागों के कर्मचारियों से जुटी राशि दिलाई जाए।
- स्मारक द्वार के निर्माण तेजी से कराएं और शहीद के नाम से चौराहा का नामकरण किया जाए।
राजनीतिक जमघट, खूब लगे नारे
आगामी विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां शुरू हो गई हैं। रालोद अध्यक्ष के शहीद के घर जाने को चुनावी स्टंट से जोड़ा जा रहा है। उनके पहुंचते ही राजनीतिक लोगों का जमघट लग गया, कार्यकर्ताओं ने जमकर धक्कामुक्की की। पार्टी और अपने नेता के जिंदाबाद के खूब नारे भी लगाए। पुलवामा कांड के वक्त जयंत परिजनों से मिले थे, लेकिन इसकेबाद ढाई साल में पार्टी को कोई कार्यकर्ता उनके हालचाल तक जानने नहीं पहुंचा।
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