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आध्यात्मिक विरासत के परिचायक हैं मथुरा, अयोध्या व काशी : रीता बहुगुणा
Sun, 17 Mar 2019 06:26 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 17 Mar 2019 06:26 PM IST
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पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को स्मृति चिन्ह प्रदान करते भागवताचार्य कौशिक महाराज
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश की पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि मथुरा, अयोध्या और काशी सिर्फ यूपी की ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत की धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत की परिचायक स्थली हैं। इन तीनों की पवित्र धरा से संपूर्ण विश्व में भारतीय आध्यात्मिक चेतना का प्रचार-प्रसार हो रहा है।
रीता बहुगुणा जोशी रविवार को वृंदावन में विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित गोतीर्थ तुलसी तपोवन गोशाला का उद्घाटन करने आईं थीं। उन्होंने कहा कि आज भारत की आध्यात्मिक, धार्मिक एवं भक्ति परंपरा का जो डंका पूरे विश्व में बज रहा है, वो संतों के कारण ही है।
उन्होंने बताया कि योगी सरकार के आने के बाद पर्यटन की दृष्टि से मथुरा, अयोध्या और काशी को एक नया रूप देने का जो कार्य किया जा रहा है, वो निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होगा। इससे पूर्व पर्यटन मंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया।
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आचार्य कौशिक महाराज ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पं. रामदेव शास्त्री, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, सुचित्रा देवी अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अशोक जिंदल, रमेश शाह, राकेश जैन, जीवनदास अरोड़ा, गोपाल, करमपाल गर्ग, ज्ञानचंद शर्मा आदि उपस्थित थे।
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रीता बहुगुणा जोशी रविवार को वृंदावन में विश्व जागरण मानव सेवा संघ चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित गोतीर्थ तुलसी तपोवन गोशाला का उद्घाटन करने आईं थीं। उन्होंने कहा कि आज भारत की आध्यात्मिक, धार्मिक एवं भक्ति परंपरा का जो डंका पूरे विश्व में बज रहा है, वो संतों के कारण ही है।
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उन्होंने बताया कि योगी सरकार के आने के बाद पर्यटन की दृष्टि से मथुरा, अयोध्या और काशी को एक नया रूप देने का जो कार्य किया जा रहा है, वो निश्चित रूप से सार्थक सिद्ध होगा। इससे पूर्व पर्यटन मंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य व्यासपीठ का पूजन-अर्चन किया।
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आचार्य कौशिक महाराज ने उन्हें स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर पं. रामदेव शास्त्री, लक्ष्मीनारायण अग्रवाल, सुचित्रा देवी अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अशोक जिंदल, रमेश शाह, राकेश जैन, जीवनदास अरोड़ा, गोपाल, करमपाल गर्ग, ज्ञानचंद शर्मा आदि उपस्थित थे।