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सांसों पर संकट: धुंध से उखड़ रही सांस, तीन दिन में अस्थमा अटैक के 17 मरीज भर्ती; बुजुर्ग और बच्चों को खतरा
Thu, 13 Nov 2025 08:44 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Thu, 13 Nov 2025 08:44 AM IST
सार
नमी और हवा में कार्बन तत्व होने से रोगियों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। मरीजों की तेज खांसी से हालत खराब है। आलम ये है कि उन्हें ऑक्सीजन देनी पड़ रही है।
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गाजियाबाद की हवा हुई जहरीली
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बढ़ते प्रदूषण और बदले मौसम के कारण अस्थमा और सांस रोगियों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है। तीन दिन में अस्थमा अटैक के 17 मरीज भर्ती हुए हैं। सभी को ऑक्सीजन दी जा रही है। इनमें से 9 मरीजों की हालत खराब है। मर्ज बढ़ने पर सांस और अस्थमा मरीजों को दवाओं की डोज भी बढ़ाकर देनी पड़ रही है।
वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि ओपीडी में बीते तीन दिन में करीब 900 मरीज आए हैं। इसमें सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, तेज खांसी की परेशानी है। कुछ मरीजों को खांसते वक्त बलगम में खून भी आ रहा है। इनमें से अस्थमा अटैक के 17 मरीज हैं। सोमवार को 7, मंगलवार को 3 और बुधवार को 7 मरीज अस्थमा अटैक के भर्ती हुए। इनकी हालत ठीक नहीं है और हाईलेवल ऑक्सीजन पर हैं।
वक्ष एवं क्षय रोग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि ठंड और हवा में कार्बन तत्व होने से नाक में एलर्जी, सीने से घर्र-घर्र की आवाज आना, बलगम में संक्रमण भी मिल रहा है। सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हालत खराब होने पर मरीजों को इन्हेलर और दवाओं की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है।
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ये बरते सावधानी:
- इन्हेलकर की डोज एडजस्ट करा लें।
- बाहर जाते वक्त मास्क जरूर लगाएं।
- सुबह-शाम खिड़की-दरवाजा बंद रखें।
- गुनगुना पानी पीएं, रोजाना भाप जरूर लें।
- ठंडी सामग्री खाने-पीने से बचें। धूम्रपान न करें।
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वक्ष एवं क्षय रोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि ओपीडी में बीते तीन दिन में करीब 900 मरीज आए हैं। इसमें सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न, तेज खांसी की परेशानी है। कुछ मरीजों को खांसते वक्त बलगम में खून भी आ रहा है। इनमें से अस्थमा अटैक के 17 मरीज हैं। सोमवार को 7, मंगलवार को 3 और बुधवार को 7 मरीज अस्थमा अटैक के भर्ती हुए। इनकी हालत ठीक नहीं है और हाईलेवल ऑक्सीजन पर हैं।
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वक्ष एवं क्षय रोग के डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि ठंड और हवा में कार्बन तत्व होने से नाक में एलर्जी, सीने से घर्र-घर्र की आवाज आना, बलगम में संक्रमण भी मिल रहा है। सांस लेने में तकलीफ हो रही है। हालत खराब होने पर मरीजों को इन्हेलर और दवाओं की डोज बढ़ाकर देनी पड़ रही है।
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ये बरते सावधानी:
- इन्हेलकर की डोज एडजस्ट करा लें।
- बाहर जाते वक्त मास्क जरूर लगाएं।
- सुबह-शाम खिड़की-दरवाजा बंद रखें।
- गुनगुना पानी पीएं, रोजाना भाप जरूर लें।
- ठंडी सामग्री खाने-पीने से बचें। धूम्रपान न करें।