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स्लैब पर जिंदगी: एक फुट चौड़ा पत्थर, नीचे पांच फीट गहरा नाला; फ्रीगंज में जान जोखिम में डालकर हो रही आवाजाही
Fri, 28 Aug 2026 10:26 AM IST
Dhirendra Singh
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा
Published by: Dhirendra Singh
Updated Fri, 28 Aug 2026 10:26 AM IST
सार
आगरा के फ्रीगंज में पांच फीट गहरे नाले को पार करने के लिए लोगों को महज एक फुट चौड़े प्री-कास्ट स्लैब का सहारा लेना पड़ रहा है। संतुलन बिगड़ने से कई लोग घायल हो चुके हैं और हाल में बुजुर्ग शीला देवी की नाले में गिरने से मौत भी हो गई थी।
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स्लैब पर जिंदगी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आगरा के फ्रीगंज में चिम्मन लाल का बाड़ा में जिस नाले में गिरकर बुजुर्ग महिला शीला देवी की जान चली गई, उस नाले पर हर घर के सामने नगर निगम ने केवल एक फुट चौड़ा प्री-कास्ट स्लैब रखवाया है। इस पर संतुलन बनाकर पांच फीट गहरे नाले को पार करने में कई लोग हादसों का शिकार हो चुके हैं।
घर या दुकान से बाहर आने-जाने पर इस नाले के ऊपर से एक बार में केवल एक व्यक्ति ही सधे कदमों से निकल पाता है। चिम्मन लाल बाड़ा निवासी रमन खुराना ने बताया कि नाले पर केवल एक फुट चौड़ा स्लैब रखा गया है। बच्चे और बुजुर्ग इससे निकलने में डरते हैं। जल्दबाजी में आने-जाने पर पैर किनारे पड़ते ही नाले में समा जाते हैं। उनके पेट में नाले में गिरने पर सरिया घुस गया था, जिसका इलाज तीन महीने से जारी है, वहीं बाड़ा निवासी तीन महिलाएं भी नाले में गिरने से चोटिल हो चुकी हैं।
पार्षद ने नगर आयुक्त को फिर दिया पत्र
फ्रीगंज की बसपा पार्षद पिंकी सोनी ने बताया कि शीला देवी की जान जाने के बाद बृहस्पतिवार को उन्होंने नगर आयुक्त को नाला ढकने के लिए फिर से पत्र दिया है। वह दो माह पहले भी घास की मंडी से फ्रीगंज होते हुए नीम दरवाजा तक नाला ढकने के लिए मांग कर चुकी हैं। पूर्व पार्षद मनोज कुमार सोनी ने शीला देवी के परिजन को नगर निगम की ओर से मुआवजा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि फ्रीगंज में पहले छोटी नाली बनी थी, जिसकी जगह डेढ़ साल पहले बड़ा और गहरा नाला बनाया गया। लोगों को नाली की आदत थी, गहरे नाले को न ढकने से हादसे हो रहे हैं।
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घर या दुकान से बाहर आने-जाने पर इस नाले के ऊपर से एक बार में केवल एक व्यक्ति ही सधे कदमों से निकल पाता है। चिम्मन लाल बाड़ा निवासी रमन खुराना ने बताया कि नाले पर केवल एक फुट चौड़ा स्लैब रखा गया है। बच्चे और बुजुर्ग इससे निकलने में डरते हैं। जल्दबाजी में आने-जाने पर पैर किनारे पड़ते ही नाले में समा जाते हैं। उनके पेट में नाले में गिरने पर सरिया घुस गया था, जिसका इलाज तीन महीने से जारी है, वहीं बाड़ा निवासी तीन महिलाएं भी नाले में गिरने से चोटिल हो चुकी हैं।
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पार्षद ने नगर आयुक्त को फिर दिया पत्र
फ्रीगंज की बसपा पार्षद पिंकी सोनी ने बताया कि शीला देवी की जान जाने के बाद बृहस्पतिवार को उन्होंने नगर आयुक्त को नाला ढकने के लिए फिर से पत्र दिया है। वह दो माह पहले भी घास की मंडी से फ्रीगंज होते हुए नीम दरवाजा तक नाला ढकने के लिए मांग कर चुकी हैं। पूर्व पार्षद मनोज कुमार सोनी ने शीला देवी के परिजन को नगर निगम की ओर से मुआवजा देने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि फ्रीगंज में पहले छोटी नाली बनी थी, जिसकी जगह डेढ़ साल पहले बड़ा और गहरा नाला बनाया गया। लोगों को नाली की आदत थी, गहरे नाले को न ढकने से हादसे हो रहे हैं।
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