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Agra: डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल की दहेज हत्या के आरोपियों को राहत, सीबीआई ने जांच के बाद लगाई थी क्लोजर रिपोर्ट

Sun, 21 Apr 2024 07:25 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा
अमर उजाला न्यूज नेवर्क, आगरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 21 Apr 2024 07:25 AM IST
सार

डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल की मौत के मामले में कोर्ट ने दहेज हत्या के आरोपी पति, सास-ससुर सहित अन्य ससुराल वालों को राहत दी है। कोर्ट ने उन्मोचित करने (डिस्चार्ज यानी प्रथम दृष्टया मामला न बनना) के आदेश दिए हैं। 
 

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Relief to the accused of dowry murder of Dr. Deepti Aggarwal CBI filed closure report after investigation
डॉक्टर दीप्ति अग्रवाल (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आगरा के जिला जज ने महिला चिकित्सक डॉ. दीप्ति की मौत के चर्चित प्रकरण में दहेज हत्या और अन्य आरोपों में प्रतापपुरा निवासी पति डॉ. सुमित अग्रवाल, सास अनीता अग्रवाल, ससुर डॉ. एससी अग्रवाल, जेठ डॉ. अमित अग्रवाल व जेठानी डॉ. तूलिका अग्रवाल को उन्मोचित करने (डिस्चार्ज यानी प्रथम दृष्टया मामला न बनना) के आदेश दिए हैं। चिकित्सक की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। बाद में सीबीआई ने भी जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट लगाई थी।
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मथुरा के डॉ. नरेश कुमार मंगला ने ताजगंज थाने में तहरीर दी थी। कहा कि उन्होंने बेटी डॉ. दीप्ति की शादी 3 नवंबर 2014 को डॉ. सुमित अग्रवाल पुत्र डॉ. एससी अग्रवाल के साथ की थी। शादी में करीब डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक व्यय किया। आरोप है कि पति, सास, ससुर, जेठ, जेठानी अतिरिक्त दहेज के लिए बेटी का उत्पीड़न कर एक करोड़ रुपये की मांग करने लगे। मारपीट कर कई बार घर से निकाल दिया। समाज के लोगों ने भी आरोपियों को कई बार समझाने का प्रयास किया। बेटी की परेशानी को देखते हुए उन्होंने ससुराल वालों को समय-समय पर चेक के माध्यम से कई बार रुपये भी दिए। इसके बावजूद 2017 में पति व अन्य ससुरालीजन ने बेटी के साथ मारपीट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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संतान नहीं होने पर बेटी ने एक बच्ची को गोद लिया। इसका भी ससुराल वालों ने विरोध किया। 3 अगस्त 2020 को आरोपियों ने मयूर अपार्टमेंट, ताजगंज में बेटी के साथ मारपीट कर उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। उचित उपचार नहीं मिलने पर वह बेटी को सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद इलाज के लिए लेकर गए। जहां इलाज के दौरान 6 अगस्त 2020 को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी पति, सास, ससुर, जेठ और जेठानी के विरुद्ध केस दर्ज किया। विवेचना सीओ सदर ने की। सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की विवेचना सीबीआई से कराने के आदेश दिए थे। सीबीआई ने मामले में विवेचना के बाद क्लोजर रिपोर्ट (एफआर) लगाकर अदालत में पेश की।
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आरोपियों के अधिवक्ता विजय आहूजा, साजिद अहमद और विमु आहूजा ने अदालत में उन्मोचन प्रार्थनापत्र प्रस्तुत कर आरोपियों को उन्मोचित करने का अदालत से आग्रह किया। मृतका के पिता ने भी इस पर कोई एतराज नहीं किया।


 
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