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अदालतों से बोझ घटा, इंसाफ को रफ्तार
ब्यूरो अमर उजाला, आगरा
Updated Sun, 13 Dec 2015 02:43 AM IST
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राष्ट्रीय लोक अदालत ने मुकदमे निपटाने का रिकार्ड बनाकर इंसाफ को नई रफ्तार दी है। अदालतों से मुकदमों का बोझ घट गया है। इसलिए तारीख तेजी से लगेंगी। फैसले भी जल्दी हो सकेंगे। सबसे बड़ा सुकून यह है कि लोक अदालत में निपटे मुकदमों में अपील नहीं होगी।
दो दिन पहले तक सिविल कोर्ट से 1.18 लाख केस लंबित थे। इनमें से 30 हजार राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाए गए। लगभग 90 फीसदी का निपटारा हो गया। अब संख्या लाख में नहीं, हजारों में रह गई है। अदालतों से बोझ कम हुआ है। खास बात यह रही कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए पुराने से पुराने केस प्राथमिकता पर लिए गए। इनमें गवाहों को ढूंढना, समन तामील कराना, गवाही कराना आसान नहीं होता। इनमें से कई केस तो 35-40 साल से चल रहे थे।
राजस्व के 13 हजार केस चिह्नित किए गए थे। बैंकों से 25 हजार नोटिस भेजे गए थे। न समन तामील कराने में पुलिस ने हीलाहवाली की और न ही बैंकों ने नोटिस भेजने में। पॉवर कारपोरेशन, बैंक, तहसील सभी से केस का बोझ कम हुआ है। मुकदमोें से परेशान लोगों ने भी बड़ा उत्साह दिखाया।
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चकबंदी की चक्की में पिस रहे किसानों के लिए तो यह आयोजन वरदान साबित हुआ है। चकबंदी के सैकड़ों मुकदमों को भी आपसी सहमति से निपटा लिया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल प्रभारी एवं एडीजे मुमताज अली इसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि इसमें सभी का सहयोग रहा है। इस बार लोगों ने काफी जागरूकता दिखाई। केस कम हो जाने से अदालतों का कामकाज और तेज हो सकेगा।
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दो दिन पहले तक सिविल कोर्ट से 1.18 लाख केस लंबित थे। इनमें से 30 हजार राष्ट्रीय लोक अदालत में लगाए गए। लगभग 90 फीसदी का निपटारा हो गया। अब संख्या लाख में नहीं, हजारों में रह गई है। अदालतों से बोझ कम हुआ है। खास बात यह रही कि राष्ट्रीय लोक अदालत के लिए पुराने से पुराने केस प्राथमिकता पर लिए गए। इनमें गवाहों को ढूंढना, समन तामील कराना, गवाही कराना आसान नहीं होता। इनमें से कई केस तो 35-40 साल से चल रहे थे।
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राजस्व के 13 हजार केस चिह्नित किए गए थे। बैंकों से 25 हजार नोटिस भेजे गए थे। न समन तामील कराने में पुलिस ने हीलाहवाली की और न ही बैंकों ने नोटिस भेजने में। पॉवर कारपोरेशन, बैंक, तहसील सभी से केस का बोझ कम हुआ है। मुकदमोें से परेशान लोगों ने भी बड़ा उत्साह दिखाया।
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चकबंदी की चक्की में पिस रहे किसानों के लिए तो यह आयोजन वरदान साबित हुआ है। चकबंदी के सैकड़ों मुकदमों को भी आपसी सहमति से निपटा लिया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल प्रभारी एवं एडीजे मुमताज अली इसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। उनका कहना है कि इसमें सभी का सहयोग रहा है। इस बार लोगों ने काफी जागरूकता दिखाई। केस कम हो जाने से अदालतों का कामकाज और तेज हो सकेगा।