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Agra News: रिकवरी की हो चुकी संस्तुति, कब होगी कार्रवाई
Wed, 22 May 2024 05:09 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Updated Wed, 22 May 2024 05:09 AM IST
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मैनपुरी।
दो ब्लॉक की चार ग्रामसभाओं में मनरेगा के कामों में हुए 18.42 लाख के घोटाले में सोशल ऑडिट टीमें संबंधितों से धनराशि की रिकवरी कराने की संस्तुति कर चुकी हैं। रिपोर्ट जमा होने के बाद भी दोषियों के खिलाफ अभी तक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। कानूनी कार्रवाई नहीं होने से जानकार लोग अचंभे में हैं। उनका मानना है कि केवल रिकवरी ही नहीं दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जानी चाहिए।
मनरेगा के तहत कराए गए कामों में सोशल ऑडिट में मैनपुरी विकास खंड की ग्रामसभा जसरऊ, लहरा महुअन, परौंख तथा सुल्तानगंज विकासखंड की ग्रामसभा नगला सेमर में गड़बड़ी सामने आई है। 18.42 लाख का घोटाला किए जाने की रिपोर्ट सोशल ऑडिट टीमों ने देकर संबंधितों से धनराशि की रिकवरी कराने की संस्तुति भी कर दी है। लेकिन सोशल ऑडिट रिपोर्ट जमा होने के बाद भी आज तक दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। मनरेगा के तहत कराए गए निर्माण और विकास कार्यों के लिए तत्कालीन प्रधान, पंचायत सचिव सहित रोजगार सेवक की जवाबदेही तय होती है। घोटाले वाली दो ग्रामसभा जसरऊ और लहरा महुअन में सुखवीर सिंह यादव की काम के दौरान पंचायत सचिव के रूप में तैनाती रही है। अमर उजाला में 18 मई को मनरेगा में घोटाले का समाचार प्रकाशित होने के बाद हालांकि डीएम अविनाश कृष्ण सिंह ने संज्ञान लेकर डीसी मनरेगा से विस्तृत और स्पष्ट आख्या भी मांगी है।
मजदूरी का फर्जीवाड़ा भी शामिल
सोशल ऑडिट में पता चला कि मनरेगा मजदूरों को मजदूरी देने में भी फर्जीबाड़ा हुआ है। ग्रामसभा लहरा महुअन में मनरेगा मजदूरी के नाम पर 1.25 लाख रुपया, ग्रामसभा परौंख में 5200 रुपया मनरेगा मजदूरी के नाम पर फर्जी तरीके से निकाला गया है। इसकी पुष्टि के बाद सोशल ऑडिट टीमों की जांच रिपोर्ट सोशल ऑडिट निदेशालय भी भेजी जा चुकी है। अन्य ग्रामसभाओं में भी घोटाला किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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दोषियों पर दर्ज होनी चाहिए रिपोर्ट
मनरेगा के तहत घोटाला सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। संबंधितों के खिलाफ सरकारी धन का गबन करने, सरकारी धन का दुरुपयोग करने, कराए गए काम के नाम पर फर्जी अभिलेख तैयार करने, फर्जी अभिलेखों का असली के रूप में प्रयोग करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए। केवल रिकवरी कराना ही अपराध की सजा नहीं है। - पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डीजीसी फौजदारी
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दो ब्लॉक की चार ग्रामसभाओं में मनरेगा के कामों में हुए 18.42 लाख के घोटाले में सोशल ऑडिट टीमें संबंधितों से धनराशि की रिकवरी कराने की संस्तुति कर चुकी हैं। रिपोर्ट जमा होने के बाद भी दोषियों के खिलाफ अभी तक कानूनी कार्रवाई नहीं की गई है। कानूनी कार्रवाई नहीं होने से जानकार लोग अचंभे में हैं। उनका मानना है कि केवल रिकवरी ही नहीं दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई जानी चाहिए।
मनरेगा के तहत कराए गए कामों में सोशल ऑडिट में मैनपुरी विकास खंड की ग्रामसभा जसरऊ, लहरा महुअन, परौंख तथा सुल्तानगंज विकासखंड की ग्रामसभा नगला सेमर में गड़बड़ी सामने आई है। 18.42 लाख का घोटाला किए जाने की रिपोर्ट सोशल ऑडिट टीमों ने देकर संबंधितों से धनराशि की रिकवरी कराने की संस्तुति भी कर दी है। लेकिन सोशल ऑडिट रिपोर्ट जमा होने के बाद भी आज तक दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई है। मनरेगा के तहत कराए गए निर्माण और विकास कार्यों के लिए तत्कालीन प्रधान, पंचायत सचिव सहित रोजगार सेवक की जवाबदेही तय होती है। घोटाले वाली दो ग्रामसभा जसरऊ और लहरा महुअन में सुखवीर सिंह यादव की काम के दौरान पंचायत सचिव के रूप में तैनाती रही है। अमर उजाला में 18 मई को मनरेगा में घोटाले का समाचार प्रकाशित होने के बाद हालांकि डीएम अविनाश कृष्ण सिंह ने संज्ञान लेकर डीसी मनरेगा से विस्तृत और स्पष्ट आख्या भी मांगी है।
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मजदूरी का फर्जीवाड़ा भी शामिल
सोशल ऑडिट में पता चला कि मनरेगा मजदूरों को मजदूरी देने में भी फर्जीबाड़ा हुआ है। ग्रामसभा लहरा महुअन में मनरेगा मजदूरी के नाम पर 1.25 लाख रुपया, ग्रामसभा परौंख में 5200 रुपया मनरेगा मजदूरी के नाम पर फर्जी तरीके से निकाला गया है। इसकी पुष्टि के बाद सोशल ऑडिट टीमों की जांच रिपोर्ट सोशल ऑडिट निदेशालय भी भेजी जा चुकी है। अन्य ग्रामसभाओं में भी घोटाला किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
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दोषियों पर दर्ज होनी चाहिए रिपोर्ट
मनरेगा के तहत घोटाला सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होनी चाहिए। संबंधितों के खिलाफ सरकारी धन का गबन करने, सरकारी धन का दुरुपयोग करने, कराए गए काम के नाम पर फर्जी अभिलेख तैयार करने, फर्जी अभिलेखों का असली के रूप में प्रयोग करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की जानी चाहिए। केवल रिकवरी कराना ही अपराध की सजा नहीं है। - पुष्पेंद्र सिंह चौहान, डीजीसी फौजदारी