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लॉकडाउनः रमजान में घर पहुंचने की चाहत, लंबे सफर पर पैदल ही निकल पड़े कामगार
Wed, 29 Apr 2020 02:06 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फिरोजाबाद
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 29 Apr 2020 02:06 PM IST
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आगरा में पैदल पहुंचे श्रमिक
- फोटो : अमर उजाला
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लॉकडाउन के चलते दूसरे राज्य में रहने वाले कामगारों का सब्र जवाब दे गया तो उन्होंने भी पैदल ही अपनी मंजिल तय करने की ठान ली। जयपुर और अजमेर के लोग रमजान में अपने घर तक जाना चाहते हैं। किसी को बिहार जाना है तो किसी को सहारनपुर तक पहुंचना है। रास्ते में खाने-पीने का सामान भी नहीं मिल पा रहा है, लेकिन उनका हौसला कम नहीं हो पा रहा है।
लॉकडाउन का पहला चरण खत्म होने के बाद भी लोग दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं। मंगलवार को ऐसे ही कामगारों का एक दल एनएच-2 पर सिकंदरा के पास मिला। 20 लोगों के दल में ज्यादातर सदस्य मुस्लिम थे। उनका कहना था कि वह जयपुर से बिहार जाने के लिए निकले हैं।
एक सप्ताह पहले खाने का कुछ सामान लेकर निकले थे। दूसरा दल 10 लोगों का था, यह लोग अजमेर से सहारनपुर जाने को निकले हैं। उनका कहना है कि अब तो घर पहुंचकर ही रोजा रखेंगे।
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लॉकडाउन का पहला चरण खत्म होने के बाद भी लोग दूसरे प्रदेशों में फंसे हुए हैं। मंगलवार को ऐसे ही कामगारों का एक दल एनएच-2 पर सिकंदरा के पास मिला। 20 लोगों के दल में ज्यादातर सदस्य मुस्लिम थे। उनका कहना था कि वह जयपुर से बिहार जाने के लिए निकले हैं।
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एक सप्ताह पहले खाने का कुछ सामान लेकर निकले थे। दूसरा दल 10 लोगों का था, यह लोग अजमेर से सहारनपुर जाने को निकले हैं। उनका कहना है कि अब तो घर पहुंचकर ही रोजा रखेंगे।
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पैदल चले, ट्रक वाले भी नहीं बैठा रहे
अजमेर से पैदल चलने से पैर में छाले पड़ गए हैं। तकरीबन चार सौ किलोमीटर का सफर तय किया है। अब तो ट्रक वाले भी नहीं बैठाते हैं। अजमेर में फैक्टरी में काम करते थे। अब घर लौटना चाहते हैं। -मोहम्मद अरशद, सहारनपुर
लॉकडाउन खुलने की उम्मीद थी
गया (बिहार) के रहने वाले हाशिम अंसारी का कहना है कि जयपुर में पांच साल से रह रहे थे। लाकडाउन शुरू होने पर उम्मीद थी कि पांच अप्रैल को घर लौट जाएंगे, लेकिन अब रमजान में अपने घर जाने के लिए निकले हैं। कई जगह पुलिस ने रोका मगर हमें घर पहुंचना है।
पैरों में पड़ गए हैं छाले
कामगार अनीस मोहम्मद का दर्द था कि साहब पैरों में छाले पड़ गए हैं। गांवों और कस्बों में भी लोग खाना तो दूर पानी तक पीने को नहीं देते हैं। किसी तरह जो कुछ साथ लेकर आए थे, वह खाकर आगे बढ़ रहे हैं। दो दिन से केवल बिस्किट ही खाए हैं, लेकिन हमें तो अपने घर पहुंचना है।
अजमेर से पैदल चलने से पैर में छाले पड़ गए हैं। तकरीबन चार सौ किलोमीटर का सफर तय किया है। अब तो ट्रक वाले भी नहीं बैठाते हैं। अजमेर में फैक्टरी में काम करते थे। अब घर लौटना चाहते हैं। -मोहम्मद अरशद, सहारनपुर
लॉकडाउन खुलने की उम्मीद थी
गया (बिहार) के रहने वाले हाशिम अंसारी का कहना है कि जयपुर में पांच साल से रह रहे थे। लाकडाउन शुरू होने पर उम्मीद थी कि पांच अप्रैल को घर लौट जाएंगे, लेकिन अब रमजान में अपने घर जाने के लिए निकले हैं। कई जगह पुलिस ने रोका मगर हमें घर पहुंचना है।
पैरों में पड़ गए हैं छाले
कामगार अनीस मोहम्मद का दर्द था कि साहब पैरों में छाले पड़ गए हैं। गांवों और कस्बों में भी लोग खाना तो दूर पानी तक पीने को नहीं देते हैं। किसी तरह जो कुछ साथ लेकर आए थे, वह खाकर आगे बढ़ रहे हैं। दो दिन से केवल बिस्किट ही खाए हैं, लेकिन हमें तो अपने घर पहुंचना है।