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रामवृक्ष के नक्सल कनेक्शन ने उड़ाई खुफिया एजेंसियों की नींद

Tue, 07 Jun 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला आगरा
अमर उजाला आगरा Updated Tue, 07 Jun 2016 02:29 AM IST
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Ramvriksh intelligence sleep flown by the Maoist connection
jawahar bagh - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
केंद्र की खुफिया एजेंसियां भी 
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लगी जवाहर बाग की पड़ताल में

चंद्रमोहन शर्मा 
मथुरा में डीएम-एसएसपी आवास से समीप स्थित 270 एकड़ के जवाहर बाग पर 2.5 साल तक जमे रहे कब्जाधारियों के नक्सलियों से रिश्ते बताए जा रहे हैं। इसका पता चलने पर प्रदेश के साथ केंद्र की खुफिया एजेंसियां भी हरकत में आ गई हैं। केंद्रीय एजेंसियों के अफसरों ने तीन दिन से मथुरा में डेरा डाल रखा है। आपरेशन जवाहर बाग का सच जानने की कोशिश भी हो रही है। इसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जानी   है। कब्जाधारियों से जवाहर बाग तब खाली हो सका जब दो पुलिस अफसरों समेत 29 लाशें बिछ गई। कब्जाधारियों का दबंग नेता रामवृक्ष यादव भी मर गया। सर्च आपरेशन में बाग से हथियारों के जखीरे के साथ विस्फोटक सामग्री भी मिली। इसी के साथ यह जानकारी आई कि कब्जाधारियों को नक्सली कमांडर ने ट्रेनिंग दी। इस पर पहले प्रदेश की खुफिया एजेंसियां हरकत में आई। इसके बाद केंद्र की। खुफिया सूत्रों ने बताया कि गृह मंत्रालय ने इस पर रिपोर्ट मांगी है। कब्जाधारियों में से कई पूर्वांचल और बिहार के नक्सल प्रभावित जनपदों के भी बताए गए हैं। उनकी डिटेल तैयार की जा रही है। रामवृक्ष यादव के मोबाइल का नंबर भी मिल गया है। इसकी काल डिटेल निकलवाई गई है। इससे पता चलेगा कि  वह नक्सलियों के संपर्क में था या नहीं? अगर था तो किस गुट के? खुफिया एजेंसियों के अधिकारी घायल कब्जाधारियों से भी पहचान बदलकर बातचीत कर रहे हैं। यह मालूम करने का प्रयास किया जा रहा है कि उनकी भविष्य की योजनाएं क्या थीं?

इन बिन्दुओं पर जांच
- रामवृक्ष यादव नक्सलियों के किस गुट के संपर्क में था?
- जवाहर बाग में मिला हथियारों का जखीरा कहां से लाया गया?
- कब्जाधारियों ने विस्फोटक सामग्री किस मकसद से एकत्र की थी?
- रामवृक्ष यादव को हर महीने लाखों का फंड कहां से मिल रहा था?

 
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