Ram Mandir: मंदिर बनवाने के लिए पहली बार 1984 में निकली थी राम-जानकी रथ यात्रा, आज भी सुरक्षित हैं मूर्तियां
राम मंदिर बनवाने के लिए पहली बार 1984 में श्रीराम-जानकी रथ यात्रा निकाली गई थी। उस समय की मूर्तियां आज भी सुरक्षित रखी हुई हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कई दशक बाद अयोध्याधाम में राम मंदिर बनने का सौभाग्य रामभक्तों को मिला है। मगर राम मंदिर बनवाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति की ओर से पहली बार श्रीराम-जानकी रथ यात्रा वर्ष 1984 में निकाली गई थी। प्रशासन की पाबंदी के बाद भी रथ का पहिया नहीं रुक रहा था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मुत्यु होने पर रथ का पहिया थमा। तब से श्रीराम-जानकी रथयात्रा में शामिल राम दरबार की मूर्तियां बल्केश्वर, आगरा में घर पर ही रखी हैं। इसके मंदिर में स्थापित होने का आज भी इंतजार है।
अयोध्या में 22 जनवरी को रामलला टाट से निकलकर भव्य-दिव्य मंदिर में विराजमान होंगे। बल्केश्वर निवासी विश्व हिंदू परिषद के सह केंद्रीय मंत्री रहे रामेश्वर दयाल के बेटे संजय शर्मा बताते हैं कि तब विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष अशोक सिंघल थे। मेरे पिता अशोक सिंघल के निजी सचिव थे। श्रीराम-जानकी रथयात्रा निकाली गई थी। वह आगरा भी आई थी।
इंदिरा गांधी की मृत्यु होने पर रथयात्रा रोक दी गई थी। फिर दिल्ली स्थित आरके पुरम में राम दरबार व भारत माता की मूर्ति रख दी गई थी। बाद में अशोक सिंघल ने मेरे पिता को राम दरबार व भारत माता की मूर्ति, गंगाजल कलश पूजा करने के लिए दे दिया था। तब से आज तक मूर्तियां हमारे घर के मंदिर में रखी हुईं हैं। हमारी मांग है कि राम दरबार व भारत माता की मूर्ति मंदिर बनवाकर स्थापित की जाए।
झेलनी पड़ी थीं कई यातनाएं
राम मंदिर के लिए पहली बार रथयात्रा निकाली गई थी। राम जन्मभूमि बनवाने के लिए लोगों को संकल्प दिलाया गया था। कई यातनाएं झेलनी पड़ी थीं। रथ और मूर्तियां छिपाकर रखनी पड़ती थी। हम लोग भी चाहते हैं कि रामेश्वर दयाल के बेटे के घर पर रखी मूर्तियां मंदिर में स्थापित हों। -प्रदीप अरोड़ा, माईथान निवासी