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इतिहास बनने जा रहा 113 साल पुराना आगरा का ये रेलवे स्टेशन, अब यहां से पकड़नी होंगी ट्रेन
ब्यूरो/अमर उजाला आगरा
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:01 AM IST
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राजा की मंडी
- फोटो : amar ujala
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मथुरा-आगरा के बीच तीसरी रेल लाइन डालने के लिए आगरा के राजा की मंडी रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म को जल्द तोड़ने का काम शुरू किया जाएगा। राजा की मंडी रेलवे स्टेशन पर जगह न होने के कारण यहां प्लेटफार्म को हटाकर तीसरी लाइन डाली जाएगी। चामुंडा देवी मंदिर साइड की जगह दूसरी ओर का चुनाव किया गया है। राजा की मंडी स्टेशन की जगह रेलवे अब बिल्लोचपुरा स्टेशन पर यात्री सुविधाएं विकसित करेगा।
दिल्ली-पलवल के बीच चार रेल लाइनें हैं तो मथुरा तक तीसरी लाइन पड़ चुकी है। अब इसे आगे आगरा तक डालने का काम शुरू किया जा रहा है। तीसरी लाइन में राजा की मंडी स्टेशन पर जगह न होने के कारण प्लेटफार्म हटाने होंगे। यहां दिल्ली-आगरा और इटावा आगरा लाइन पर भी दोनों ओर प्लेटफार्म हैं। चामुंडा देवी मंदिर साइड में पर्याप्त जगह न होने के कारण इसकी जगह दूसरी ओर रेलवे लाइन डालने का काम किया जाएगा।
उस ओर स्टेशन से सटी कई निजी इमारतें भी तोड़ी जाएंगी। पूर्व में रेलवे की जमीन को कई लोगों के घेरने का मुद्दा दिवंगत डीके जोशी उठा चुके थे, लेकिन अब इन इमारतों पर रेलवे का बुलडोजर चल सकता है। हाल में दस सालों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण राजा की मंडी स्टेशन के पास ही किया गया है। राजा की मंडी स्टेशन पर कोई लूप लाइन नहीं है।
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दिल्ली-पलवल के बीच चार रेल लाइनें हैं तो मथुरा तक तीसरी लाइन पड़ चुकी है। अब इसे आगे आगरा तक डालने का काम शुरू किया जा रहा है। तीसरी लाइन में राजा की मंडी स्टेशन पर जगह न होने के कारण प्लेटफार्म हटाने होंगे। यहां दिल्ली-आगरा और इटावा आगरा लाइन पर भी दोनों ओर प्लेटफार्म हैं। चामुंडा देवी मंदिर साइड में पर्याप्त जगह न होने के कारण इसकी जगह दूसरी ओर रेलवे लाइन डालने का काम किया जाएगा।
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उस ओर स्टेशन से सटी कई निजी इमारतें भी तोड़ी जाएंगी। पूर्व में रेलवे की जमीन को कई लोगों के घेरने का मुद्दा दिवंगत डीके जोशी उठा चुके थे, लेकिन अब इन इमारतों पर रेलवे का बुलडोजर चल सकता है। हाल में दस सालों में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण राजा की मंडी स्टेशन के पास ही किया गया है। राजा की मंडी स्टेशन पर कोई लूप लाइन नहीं है।
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113 साल पहले बना राजा की मंडी
ब्रिटिश राज के दौरान आगरा-दिल्ली कॉर्ड में 1904 में राजा की मंडी रेलवे स्टेशन की स्थापना की गई थी। फरीदाबाद-मथुरा-आगरा रेल रूट पर 1983-84 में विद्युतीकरण किया गया था। वहीं इटावा वाली लाइन पर इस स्टेशन पर 1998-99 में विद्युतीकरण किया गया। शहर के प्रमुख और दैनिक यात्रियों के लिए मुफीद हो चुके राजा की मंडी स्टेशन पर करीब 40 ट्रेनों का ठहराव होता है।
बिल्लोचपुरा स्टेशन बनेगा सेटेलाइट स्टेशन
बिल्लोचपुरा
- फोटो : amar ujala
रेलवे पीआरओ संचित त्यागी के मुताबिक राजा की मंडी स्टेशन के विकल्प के रूप में बिल्लोचपुरा स्टेशन को विकसित किया जाएगा। राजा की मंडी पर जगह न होने के कारण बिल्लोचपुरा पर यात्री सुविधाओं का विकसित किया जाएगा। रेलवे के मुताबिक बिल्लोचपुरा पर दोनों ओर जगह है।
वहीं आईएसबीटी से नजदीक होने के कारण बस यात्रियों को भी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में आसानी हो जाएगी। वहीं सिकंदरा की ओर बढ़ रहे शहर के लोगों को भी ट्रेन के लिए आगरा कैंट तक की दूरी तय नहीं करनी होगी। बिल्लोचपुरा स्टेशन पर रेलवे के पास ज्यादा जगह है, जहां वेटिंग एरिया के साथ अन्य सुविधाओं को विकसित किया जा सकता है।
वहीं आईएसबीटी से नजदीक होने के कारण बस यात्रियों को भी रेलवे स्टेशन तक पहुंचने में आसानी हो जाएगी। वहीं सिकंदरा की ओर बढ़ रहे शहर के लोगों को भी ट्रेन के लिए आगरा कैंट तक की दूरी तय नहीं करनी होगी। बिल्लोचपुरा स्टेशन पर रेलवे के पास ज्यादा जगह है, जहां वेटिंग एरिया के साथ अन्य सुविधाओं को विकसित किया जा सकता है।