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बारिश ने बढ़ाई सर्दी, गेहूं को नुकसान
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16एमएनपी-07-मंडी में बारिश के बाद भीगे बोरों को हटाते पल्लेदार
- फोटो : MAINPURI
मैनपुरी। नए साल की शुरुआत के साथ ही मौसम विभाग ने बारिश की चेतावनी जारी की थी। हालांकि जनवरी का पहला पखवाड़ा राहत भरा रहा, लेकिन दूसरे पखवाड़े के पहले दिन ही मौसम का मिजाज बदल गया। बुधवार शाम को शुरू हुई रिमझिम बारिश पूरी रात हुई। बृहस्पतिवार को सुबह भी बारिश जारी रही।
बुधवार शाम को बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। ये बूंदाबांदी पूरी रात होती रही। बृहस्पतिवार को भी इससे राहत नहीं मिल सकी। पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होती रही। बारिश के चलते एक ओर जहां जनजीवन अस्त व्यस्त रहा तो वहीं सर्दी ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। न्यूनतम तापमान भले ही 12 डिग्री सेल्सियस पर बना हुआ है, लेकिन अधिकतम तापमान दो डिग्री की गिरावट के साथ 17 पर रहा। इससे सर्दी का अधिक अहसास हुआ। दिन में कुछ समय के लिए बारिश रुकी तो लोग अपने काम निपटाने में लगे रहे। मौसम साफ न होने से शाम तक लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
सुबह से ही शुरू हुई बारिश ने स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी। सुबह जहां बच्चे रिमझिम बारिश में भीगते हुए पहुंचे तो वहीं छुट्टी के बाद भीगते हुए ही लौटे। अभिभावकों को भी बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में बारिश में भीगना पड़ा।
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बारिश गेहूं की फसल के लिए जहां संजीवनी साबित होगी तो वहीं सरसों की फसल में भारी नुकसान की आशंका से किसान परेशान हैं। हवा के साथ हुई बारिश के चलते सरसों की फसल गिर गई है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने की बात कही जा रही है। अगर जल्द ही मौसम साफ न हुआ तो ये नुकसान और भी बढ़ सकता है।
जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं और सरसों की खेती की जाती है। लगभग डेढ़ लाख किसान रबी की फसल से जुड़े हुए हैं। बारिश शुरू होने जहां गेहूं की फसल करने वाले किसान खुश हैं तो वहीं सरसों की फसल करने वाले किसानों को झटका लगा है। दरअसल गेहूं की फसल डेढ़ से दो माह की हो चुकी है।
अब इसमें सिंचाई की आवश्यकता है। जिन फसलों की सिंचाई नहीं हुई थी उन्हें तो बारिश से फायदा होगा है, लेकिन जो गेहूं पहले ही सिंचित किया जा चुका था, उसमें भी कोई नुकसान नहीं है। लेकिन सरसों की फसल की अगर बात करें तो इसमें बारिश और हवा ने नुकसान किया है। बारिश से सरसों के पौधे का वजन बढ़ जाता है और हवा से ये गिर जाती है। इससे पौधा सडने के साथ ही सरसों का उत्पादन भी गिर जाता है। वहीं अभी तक मौसम साफ न होने से इसमें और नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है।
सामान्य है आलू के लिए बारिश
आलू की फसल की अगर बात करें तो इसमें फायदा नुकसान नहीं है, लेकिन देरी जरूरी होगी। बारिश के चलते आलू की खोदाई का काम रुक गया है। इसके चलते बाजार में आलू की आवक रुक जाएगी। इससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
मंडी में भीगे धान के बोरे
बुधवार रात हुई बारिश नवीन मंडी में बिक्री के लिए आया किसानों का धान भीग गया। खुले में पड़े धान के ढेर और बोरे बारिश से गीले हो गए। अचानक हुई बारिश के चलते किसानों को धान भीगने से बचाने का मौका भी नहीं मिला। वहीं मंडी में कई जगह जलभराव होने से भी आढ़ती और किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
बोले विशेषज्ञ
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि बुधवार रात से ही बूंदाबांदी हो रही है। इससे गेहूं की फसल को तो नुकसान नहीं है। जो फसल सिंचाई के अभाव में सूख रही थी, वह बारिश के बाद लहलहाने लगी है। वहीं सरसों की फसल गिरने से नुकसान तो होगा, लेकिन कितना नुकसान होगा, ये तो आंकलन के बाद ही पता चल सकेगा।
किसानों की बात
बेमौसम बारिश से हमेशा फसलों में नुकसान ही होता है। लेकिन इस पर किसी का कोई जोर नहीं है। हर साल किसी न किसी फसल में नुकसान जरूर होता है।
किशनदेव।
गेहूं की फसल में तो नुकसान नहीं है। लेकिन सरसों की फसल के गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। इससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
रामनिवास।
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बुधवार शाम को बूंदाबांदी शुरू हो गई थी। ये बूंदाबांदी पूरी रात होती रही। बृहस्पतिवार को भी इससे राहत नहीं मिल सकी। पूरे दिन रुक-रुककर बारिश होती रही। बारिश के चलते एक ओर जहां जनजीवन अस्त व्यस्त रहा तो वहीं सर्दी ने एक बार फिर दस्तक दे दी है। न्यूनतम तापमान भले ही 12 डिग्री सेल्सियस पर बना हुआ है, लेकिन अधिकतम तापमान दो डिग्री की गिरावट के साथ 17 पर रहा। इससे सर्दी का अधिक अहसास हुआ। दिन में कुछ समय के लिए बारिश रुकी तो लोग अपने काम निपटाने में लगे रहे। मौसम साफ न होने से शाम तक लोगों को परेशानी उठानी पड़ी।
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सुबह से ही शुरू हुई बारिश ने स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए भी मुसीबत खड़ी कर दी। सुबह जहां बच्चे रिमझिम बारिश में भीगते हुए पहुंचे तो वहीं छुट्टी के बाद भीगते हुए ही लौटे। अभिभावकों को भी बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने में बारिश में भीगना पड़ा।
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बारिश गेहूं की फसल के लिए जहां संजीवनी साबित होगी तो वहीं सरसों की फसल में भारी नुकसान की आशंका से किसान परेशान हैं। हवा के साथ हुई बारिश के चलते सरसों की फसल गिर गई है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने की बात कही जा रही है। अगर जल्द ही मौसम साफ न हुआ तो ये नुकसान और भी बढ़ सकता है।
जिले में बड़े पैमाने पर गेहूं और सरसों की खेती की जाती है। लगभग डेढ़ लाख किसान रबी की फसल से जुड़े हुए हैं। बारिश शुरू होने जहां गेहूं की फसल करने वाले किसान खुश हैं तो वहीं सरसों की फसल करने वाले किसानों को झटका लगा है। दरअसल गेहूं की फसल डेढ़ से दो माह की हो चुकी है।
अब इसमें सिंचाई की आवश्यकता है। जिन फसलों की सिंचाई नहीं हुई थी उन्हें तो बारिश से फायदा होगा है, लेकिन जो गेहूं पहले ही सिंचित किया जा चुका था, उसमें भी कोई नुकसान नहीं है। लेकिन सरसों की फसल की अगर बात करें तो इसमें बारिश और हवा ने नुकसान किया है। बारिश से सरसों के पौधे का वजन बढ़ जाता है और हवा से ये गिर जाती है। इससे पौधा सडने के साथ ही सरसों का उत्पादन भी गिर जाता है। वहीं अभी तक मौसम साफ न होने से इसमें और नुकसान की भी आशंका जताई जा रही है।
सामान्य है आलू के लिए बारिश
आलू की फसल की अगर बात करें तो इसमें फायदा नुकसान नहीं है, लेकिन देरी जरूरी होगी। बारिश के चलते आलू की खोदाई का काम रुक गया है। इसके चलते बाजार में आलू की आवक रुक जाएगी। इससे कीमतें बढ़ सकती हैं।
मंडी में भीगे धान के बोरे
बुधवार रात हुई बारिश नवीन मंडी में बिक्री के लिए आया किसानों का धान भीग गया। खुले में पड़े धान के ढेर और बोरे बारिश से गीले हो गए। अचानक हुई बारिश के चलते किसानों को धान भीगने से बचाने का मौका भी नहीं मिला। वहीं मंडी में कई जगह जलभराव होने से भी आढ़ती और किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ा।
बोले विशेषज्ञ
जिला कृषि अधिकारी डॉ. गगनदीप सिंह ने बताया कि बुधवार रात से ही बूंदाबांदी हो रही है। इससे गेहूं की फसल को तो नुकसान नहीं है। जो फसल सिंचाई के अभाव में सूख रही थी, वह बारिश के बाद लहलहाने लगी है। वहीं सरसों की फसल गिरने से नुकसान तो होगा, लेकिन कितना नुकसान होगा, ये तो आंकलन के बाद ही पता चल सकेगा।
किसानों की बात
बेमौसम बारिश से हमेशा फसलों में नुकसान ही होता है। लेकिन इस पर किसी का कोई जोर नहीं है। हर साल किसी न किसी फसल में नुकसान जरूर होता है।
किशनदेव।
गेहूं की फसल में तो नुकसान नहीं है। लेकिन सरसों की फसल के गिरने से उत्पादन प्रभावित होगा। इससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा।
रामनिवास।