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रैगिंगः मेडिकल कॉलेज में सीनियरों ने जूनियरों को भेजे अश्लील मैसेज, एकांत में पढ़वाते हैं
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
Updated Wed, 03 Oct 2018 03:38 AM IST
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के पहली साल के छात्रों के साथ रैगिंग का मामला सामने आया है। सीनियरों ने जूनियर छात्रों को व्हाटसएप पर अश्लील भाषा में मैसेज भेजे हैं। इन मैसेज में ड्रेस, हेयर स्टाइल तक तय किए हैं। एकांत में बुलाकर जूनियरों से इन मैसेजों को पढ़वाते हैं और विरोध करने वालों को प्रताड़ित किया जाता है।
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सीनियरों की ओर से तैयार सात पेज के शपथपत्र के पहले पेज पर याद रखने योग्य बातें लिखी हैं। दूसरे पर परिचय और एसएन की शपथ है। तीसरे पर शारीरिक अंगों की परिभाषा, लड़कियों के प्रकार, पांचवें पेज पर मेडिकल कोर्स की परिभाषा, छठवें पेज पर लॉ ऑफ न्यूटन और दोहे और सातवें पेज पर युवती का फोटो है। ये सभी अश्लील भाषा में लिखे गए हैं।
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कक्षा खत्म होने पर सीनियर एक-एक को फोन कर जूनियर को एकांत में बुलाते हैं। इनको पत्र पढ़वाया जाता है। विरोध करने पर बाइक पर बैठाकर ले जाकर मारपीट करते हैं। छात्रों ने अपने अभिभावकों को जानकारी देने के साथ ही प्राचार्य कार्यालय में बिना नाम लिखे इसकी शिकायत की है।
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एंटी रैगिंग सेल अध्यक्ष डॉ. एसके कठारिया का कहना है कि लिखित में शिकायत नहीं मिली है। इसकी जांच कराता हूं।
ये दी है जूनियर छात्रों को हिदायत
- बॉस इज ऑलवेज राइट, बॉस को सिर्फ सॉरी और कोई शब्द नहीं।
- काला पेंट, हल्के रंग की शर्ट, काले रंग के फीते, छोटे-छोटे बाल।
- नजर हमेशा शर्ट की तीसरी बटन पर, वाहन से पढ़ने नहीं आएंगे।
- अंग्रेजी में बिल्कुल न बोलें, सीनियरों से ज्ञान लेकर ही आगे बढ़ें।
हाईटेक हुआ रैगिंग का तरीका
- रैगिंग पर सख्ती के बाद इसका तरीका बदल लिया है। अब व्हाटसएप के जरिये जूनियरों की रैगिंग की जा रही है। एक-एक कर जूनियर को बुलाया जाता है,
जिससे उनकी कारस्तानी पकड़ में न आए। विरोध करने वाले जूनियरों को पीटा जाता और शिकायत न करने को धमकाया जाता है।
पूर्व में हुई रैगिंग में सस्पेंड किए थे छात्र
- एसएन में पूर्व में भी रैगिंग की घटनाएं हुई हैं। 2015 में जूनियरों को पीटने पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल ने पांच छात्रों को सस्पेंड कर दिया
था। 2016 में कक्षा के पहले दिन ही सीनियरों ने एसएन के गेस्ट हाउस के पास दो जूनियर छात्रों से रैगिंग की, उनको गाड़ी पर बैठाकर पीटा भी था।
- काला पेंट, हल्के रंग की शर्ट, काले रंग के फीते, छोटे-छोटे बाल।
- नजर हमेशा शर्ट की तीसरी बटन पर, वाहन से पढ़ने नहीं आएंगे।
- अंग्रेजी में बिल्कुल न बोलें, सीनियरों से ज्ञान लेकर ही आगे बढ़ें।
हाईटेक हुआ रैगिंग का तरीका
- रैगिंग पर सख्ती के बाद इसका तरीका बदल लिया है। अब व्हाटसएप के जरिये जूनियरों की रैगिंग की जा रही है। एक-एक कर जूनियर को बुलाया जाता है,
जिससे उनकी कारस्तानी पकड़ में न आए। विरोध करने वाले जूनियरों को पीटा जाता और शिकायत न करने को धमकाया जाता है।
पूर्व में हुई रैगिंग में सस्पेंड किए थे छात्र
- एसएन में पूर्व में भी रैगिंग की घटनाएं हुई हैं। 2015 में जूनियरों को पीटने पर तत्कालीन प्राचार्य डॉ. अजय अग्रवाल ने पांच छात्रों को सस्पेंड कर दिया
था। 2016 में कक्षा के पहले दिन ही सीनियरों ने एसएन के गेस्ट हाउस के पास दो जूनियर छात्रों से रैगिंग की, उनको गाड़ी पर बैठाकर पीटा भी था।