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Radha Ashtami 2022: राधारानी के जन्मोत्सव पर झूमा बरसाना, ब्रह्ममुहूर्त में हुआ महाभिषेक

Sun, 04 Sep 2022 01:27 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Sun, 04 Sep 2022 01:27 PM IST
सार

जन्म के साथ ही राधारानी के श्री विग्रह को चांदी की चौकी पर विराजमान किया गया। इसके बाद मंदिर के पुजारियों द्वारा साढ़े पांच बजे मंत्रोच्चारण के मध्य सवा सौ किलो दूध, दही, घी, शहद, बूरा आदि से अभिषेक किया गया।

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Radhashtami 2022 Celebrations In Mathura Of Radharani Birth
राधा अष्टमी के मौके पर रावल में पंचामृत किया गया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राधारानी के गांव रावल में राधारानी का जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। सुबह साढ़े चार बजे मंगला आरती के दर्शन हुए। आरती के बाद घंटे और घड़ियाल बजने लगे। जन्म के साथ ही राधारानी के श्री विग्रह को चांदी की चौकी पर विराजमान किया गया। इसके बाद मंदिर के पुजारियों द्वारा साढ़े पांच बजे मंत्रोच्चारण के मध्य सवा सौ किलो दूध, दही, घी, शहद, बूरा आदि से अभिषेक किया गया। महाभिषेक आरती की गई। लाडली को माखन मिश्री, दूध का भोग लगाया गया। 11 बजे छप्पन भोग के दर्शन के बाद 12:30 राजभोग आरती का आयोजन हुआ। 
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राधारानी के जन्मोत्सव पर लाडलीजी मंदिर बधाइयों और वेद की ऋचाओं से गूंज उठा। गर्भ गृह में घंटे-घड़ियाल बजने लगे। गर्भगृह से उठीं ध्वनि प्राचीन भवन की प्राचीरों से टकराती हुई वातावरण में आस्था की हिलोरें भर रही थी। मूल नक्षत्र में जन्मी राधारानी की जन्मस्थली रावल गांव में ऐतिहासिक मंदिर प्रांगण में प्रातः 5:30 बजे पंचामृत अभिषेक किया गया इस अवसर पर दर्शन करने वालों की लंबी कतार थी।
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कीरत नंदनी के जन्म के साथ ही आचार्यों ने वेद मंत्रों का उच्चारण किया।  दूध व दही,  शहद,  इत्र, बूरा, 27 पेड़ों की पत्तियों,  27 जगह की रज, 27 कुओं का जल, सप्त अनाज, सात मेवा, सात फल से वृषभान नंदनी के विग्रह का अभिषेक किया। आचार्यों ने नवग्रह देवताओं का आह्वान किया।श्रीविग्रह को यमुनाजल से स्नान कराया। पुष्पों की वर्षा के साथ सुबह छह बजे महाआरती हुई। बधाइयों का गायन हुआ। इसमें दाई, मान, सवासनी, नाईन, नामकरण आदि लीलाओं के पद गाए गए।

सीताराम मंदिर, गोपालजी मंदिर, राधारस मंदिर, जयपुर मंदिर, मानगढ़, मोरकुटी, दानगढ़, लाड़िलीजी मंदिर, महीभानजी मंदिर, अष्टसखी मंदिर, वृषभानजी मंदिरों में राधाजी का जन्माभिषेक किया गया। मंदिर में आयोजित दधिकांधा में नंदगांव और बरसाना वासियों ने संयुक्त रूप से 'वृषभान के हो आंगन मंगल भीर, देश-देश के भिक्षुक आए' बधाई पद प्रस्तुत किया। जन्म के बाद लाड़लीजी मंदिर में प्रात: प्राकट्य विग्रह की शोभायात्रा धूमधाम से निकाली गई। राधारानी ने मंदिर प्रांगण में स्थित सफेद संगमर की छतरी से भक्तों पर अपनी कृपा का सागर उड़ेला। 
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