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मथुरा: पानी की समस्या को लेकर सड़कों पर उतरीं महिलाएं, जाम लगाकर किया प्रदर्शन
Tue, 27 Jul 2021 10:59 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 27 Jul 2021 10:59 AM IST
सार
मथुरा में पानी की समस्या से स्थानीय नागरिक परेशान हैं। मंगलवार को एक बार फिर पानी के लिए महिलाओं को प्रदर्शन करना पड़ा। भरतपुर गेट के समीप गंज वाला प्लाजा के सामने पानी की समस्या को लेकर एक बार फिर लोग सड़क पर उतरे। टकला गली, शंकर गली, ऊंट गली, सूर्याना मोहल्ला के लोगों ने एक घंटे से अधिक समय तक सड़क जाम रखी।
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पानी की समस्या पर जाम लगाते लोगों को समझाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मथुरा के महापौर अपने आसपास रहने वालों को एक बूंद पीने का पानी भी मुहैया कराने में समर्थ नहीं दिख रहे हैं। यही कारण है कि भरतपुर गेट के आसपास शंकर गली, ऊंट वाली गली और चुरियाना मोहल्ले के लोगों ने मंगलवार को पानी के लिए सड़क पर उतर कर प्रदर्शन किया और बर्तन रख कर जाम लगा दिया। महापौर को विफल बताते हुए नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पुलिस के आश्वासन पर आक्रोशित भीड़ ने सड़क से अपने बर्तन उठाए, तब यातायात बहाल हो सका।
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भरतपुर गेट वार्ड नंबर चार के निवासियों ने करीब डेढ़ माह पूर्व पेयजल सममस्या के चलते भरतपुर गेट से जंक्शन रोड पर जाम लगाकर महापौर डॉ. मुकेश आर्य बंधु के खिलाफ आक्रोश जताया था। तब पुलिस ने लोगों को विश्वास दिलाकर जाम खुलवा दिया। इसके बावजूद नगर निगम पेयजल की सप्लाई सुचारु नहीं कर सका।
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क्षेत्रीय पार्षद माला माहौर का आरोप है कि इस मामले को पिछली बोर्ड बैठक में भी बड़ी गर्मजोशी से रखा, लेकिन महापौर लगातार उनकी इस प्रमुख समस्या को अनदेखा कर रहे हैं। फिर एक बार चुरियाना मोहल्ला, ऊंटवाली गली और शंकर गली के वासियों का गुस्सा फिर फूट पड़ा। आक्रोशित सैकड़ों लोग अपने क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति न कराने के विरोध में महापौर और नगर निगम के जलकल अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए भरतपुर गेट से केआर कॉलेज वाले मार्ग पर जमा लगा दिया।
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चंद कदम दूरी पर है महापौर का घर
लोगों का आरोप था कि महापौर इस स्थान से चंद कदमों की दूरी पर ही रहते हैं, लेकिन न जाने क्यों वह हमारी प्रमुख समस्या से अनजान बने हुए हैं। माला माहौर का आरोप है कि वह यह सोचकर लोकदल से भाजपा में शामिल हुई थीं कि मोदी का नारा था, सबका साथ सबका विकास, लेकिन लगता है कि महापौर अपने विकास के अलावा कुछ और देखना पसंद ही नहीं करते।
आक्रोशित लोगों ने नगर निगम को कोसते हुए नारेबाजी की और सड़क पर अपने-अपने बाल्टी, डिब्बे, पतीले लेकर सड़क पर बैठ गए। जब पुलिस को सड़क जाम करने की सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंच गई। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि शाम तक उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
एक हजार परिवार प्रभावित
क्षेत्र के करीब एक हजार परिवार पानी के लिए लंबे समय से परेशान हैं। ज्यादातर परिवार ऊंचाई वाले स्थान पर हैं, जहां पर पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचती है। नगर निगम टैंकर पहुंचवाता है लेकिन घरों तक पानी ढोना पड़ता है। इसीलिए सैकड़ों आक्रोशित महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा।
नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि फिलहाल पानी के टैंकर भिजवाकर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। ऊंचाई वाले स्थानों पर कैसे पानी पहुंचे, स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
लोगों का आरोप था कि महापौर इस स्थान से चंद कदमों की दूरी पर ही रहते हैं, लेकिन न जाने क्यों वह हमारी प्रमुख समस्या से अनजान बने हुए हैं। माला माहौर का आरोप है कि वह यह सोचकर लोकदल से भाजपा में शामिल हुई थीं कि मोदी का नारा था, सबका साथ सबका विकास, लेकिन लगता है कि महापौर अपने विकास के अलावा कुछ और देखना पसंद ही नहीं करते।
आक्रोशित लोगों ने नगर निगम को कोसते हुए नारेबाजी की और सड़क पर अपने-अपने बाल्टी, डिब्बे, पतीले लेकर सड़क पर बैठ गए। जब पुलिस को सड़क जाम करने की सूचना मिली तो वह मौके पर पहुंच गई। उन्होंने लोगों को आश्वासन दिया कि शाम तक उनकी समस्या का समाधान हो जाएगा।
एक हजार परिवार प्रभावित
क्षेत्र के करीब एक हजार परिवार पानी के लिए लंबे समय से परेशान हैं। ज्यादातर परिवार ऊंचाई वाले स्थान पर हैं, जहां पर पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंचती है। नगर निगम टैंकर पहुंचवाता है लेकिन घरों तक पानी ढोना पड़ता है। इसीलिए सैकड़ों आक्रोशित महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा।
नगर आयुक्त अनुनय झा ने बताया कि फिलहाल पानी के टैंकर भिजवाकर वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। ऊंचाई वाले स्थानों पर कैसे पानी पहुंचे, स्थायी समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है।