कोरोना का असर: आगरा में 110 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का काम पड़ा धीमा
कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण मजदूरों के पलायन से आगरा में 110 करोड़ रुपये की पांच परियोजनाओं का काम धीमा पड़ गया है। इनमें छोटे-मोटे काम ही हो रहे हैं।
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देशभर में संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के साथ कामगारों का पलायन भी हो रहा है। कामगार अपने शहर और गांवों की ओर लौट रहे हैं। इसका असर विभिन्न विभागों द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों पर भी पड़ने लगा है। आगरा में एनएचएआई फरीदाबाद खंड की ओर से मथुरा और आगरा में सिक्सलेन के कार्य, अंडरपास और फ्लाईओवर निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। इन साइटों पर अब श्रमिकों की कमी हो गई है। काफी संख्या में श्रमिक लौट गए हैं। ऐसे में कार्यदायी संस्थाओं के सामने भी संकट खड़ा हो गया है।
सिकंदरा मंडी अंडरपास के दोनों ओर सिक्सलेन का काम बंद हो गया है। अंडरपास पर डामरीकरण के बाद भी काम अधूरा पड़ा हुआ है। इसी तरह आईएसबीटी फ्लाईओवर के काम भी धीमा हो गया है। मजदूरों की कमी के कारण मशीनों से यहां छिटपुट काम चल रहा है। वहीं मदिया कटरा ओवरब्रिज का काम अभी चल रहा है।
यहां रेलवे के ब्रिज विभाग की टीम कार्य कर रही है। इस कार्य के लिए 39 दिन का ब्लॉक दिया गया है। दूसरी ओर, एनएचएआई आगरा खंड के परियोजना निदेशक अरुण कुमार यादव ने बताया कि फिलहाल कोई नया कार्य शुरू नहीं हुआ है। इनर रिंग रोड पर जमीन अधिग्रहण का कार्य किया जाना है। अन्य कार्य तो प्रभावित हुए हैं।
25 करोड़ के कार्य ठप हुए
संक्रमण के कारण मजदूरों के पलायन के बाद स्मार्ट सिटी के नाला निर्माण, पार्किंग और फुटपाथ समेत करीब 25 करोड़ रुपये के कार्य ठप हो गए हैं। कांट्रेक्टर कैलाश चंद्र ने बताया कि मजदूरों की कमी से कार्य रुके हैं। हालात सही होने पर इन्हें शुरू कराया जाएगा।
इन परियोजनाओं पर पड़ा प्रभाव
स्मार्ट सिटी के कार्य : 25 करोड़ रुपये
आईएसबीटी फ्लाईओवर : 35 करोड़ रुपये
सिकंदरा अंडरपास : 20 करोड़ रुपये
सिक्सलेन के बकाया काम : 10 करोड़ रुपये
मथुरा व आसपास चल रहे काम : 20 करोड़ रुपये
काम पर असर पड़ा है
एनएचएआई फरीदाबाद खंड के परियोजना निदेशक मनोज कुमार बंसल ने कहा कि महामारी के कारण पूरे देश में कार्य प्रभावित हो रहे हैं तो एनएचएआई से जुड़े कार्यों पर भी असर पड़ रहा है। निश्चित ही इसका असर निर्माण कार्य में देरी के रूप में सामने आएगा। कुछ परियोजनाओं पर असर पड़ा है। इसका कारण मजदूरों का पलायन है