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Agra News: दवाओं में 16 गुना तक मुनाफाखोरी, सुप्रीम कोर्ट में 23 को सुनवाई
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आगरा। जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में हो रही भारी मुनाफाखोरी और नियमों के उल्लंघन पर चिकित्सक, सर्जन डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। इस मामले में कोर्ट नंबर 2 में 23 जून को सुनवाई होगी।
डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि याचिका में उन्होंने दवा सप्लाई चेन में रिटेलर्स और अस्पतालों की ओर से किए जा रहे अनैतिक मुनाफे पर रोक लगाने और ड्रग्स प्राइसेज कंट्रोल ऑर्डर, 2013 का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है। फार्मा कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर दवाओं की वास्तविक कीमत का 16 गुना तक वसूली कर रही हैं।
उन्होंने याचिका में बताया कि एंटीबायोटिक दवा Tigebex की एमआरपी 5,635 तय की गई है। बड़े कॉरपोरेट अस्पताल इसकी यही कीमत वसूलते हैं, जबकि बाजार में और अस्पताल को यह दवा केवल 350 रुपये में उपलब्ध होती है। डीपीसीओ 2013 के मुताबिक रिटेलर का मुनाफा 16 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उन्होंने याचिका में यही सवाल पूछा है कि जब नियम 16 फीसदी मुनाफे का है तो 93 फीसदी तक का मार्जिन कैसे दिया जा रहा है।
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बड़े अस्पताल कर रहे शोषण
23 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए कोर्ट नंबर 2 में सूचीबद्ध इस मामले में डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बड़े और कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों का शोषण कर रहे हैं। अस्पताल बाध्य करते हैं कि मरीज अस्पताल के अंदर मौजूद फार्मेसी से ही दवाएं खरीदकर देंगे, जहां पूरी एमआरपी पर दवाएं बेची जा रही हैं। अस्पताल के बिल का 40 फीसदी तक का हिस्सा सिर्फ दवाओं का होता है। एंटीबायोटिक दवाओं में अत्यधिक मुनाफा होने के कारण इनका अनावश्यक और अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अनैतिक चलन देश में सुपरबग या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खतरे को बढ़ा रहा है, जिससे भविष्य में साधारण बीमारियां भी लाइलाज हो सकती हैं।
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डॉ. संजय कुलश्रेष्ठ ने बताया कि याचिका में उन्होंने दवा सप्लाई चेन में रिटेलर्स और अस्पतालों की ओर से किए जा रहे अनैतिक मुनाफे पर रोक लगाने और ड्रग्स प्राइसेज कंट्रोल ऑर्डर, 2013 का कड़ाई से पालन कराने की मांग की है। फार्मा कंपनियां नियमों को ताक पर रखकर दवाओं की वास्तविक कीमत का 16 गुना तक वसूली कर रही हैं।
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उन्होंने याचिका में बताया कि एंटीबायोटिक दवा Tigebex की एमआरपी 5,635 तय की गई है। बड़े कॉरपोरेट अस्पताल इसकी यही कीमत वसूलते हैं, जबकि बाजार में और अस्पताल को यह दवा केवल 350 रुपये में उपलब्ध होती है। डीपीसीओ 2013 के मुताबिक रिटेलर का मुनाफा 16 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। उन्होंने याचिका में यही सवाल पूछा है कि जब नियम 16 फीसदी मुनाफे का है तो 93 फीसदी तक का मार्जिन कैसे दिया जा रहा है।
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बड़े अस्पताल कर रहे शोषण
23 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के लिए कोर्ट नंबर 2 में सूचीबद्ध इस मामले में डॉ. कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बड़े और कॉरपोरेट अस्पताल मरीजों का शोषण कर रहे हैं। अस्पताल बाध्य करते हैं कि मरीज अस्पताल के अंदर मौजूद फार्मेसी से ही दवाएं खरीदकर देंगे, जहां पूरी एमआरपी पर दवाएं बेची जा रही हैं। अस्पताल के बिल का 40 फीसदी तक का हिस्सा सिर्फ दवाओं का होता है। एंटीबायोटिक दवाओं में अत्यधिक मुनाफा होने के कारण इनका अनावश्यक और अत्यधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। यह अनैतिक चलन देश में सुपरबग या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खतरे को बढ़ा रहा है, जिससे भविष्य में साधारण बीमारियां भी लाइलाज हो सकती हैं।