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कोरोना की दूसरी लहर: चिकित्सक की सलाह- गर्भवती महिलाएं अपना और गर्भस्थ शिशु का रखें विशेष ध्यान
Sat, 01 May 2021 12:03 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 01 May 2021 12:03 AM IST
सार
आगरा की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा का कहना है कि फोन पर परामर्श लें। जब डॉक्टर बुलाएं तभी क्लीनिक पर जाएं।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
कोरोना से जंग में फ्रंटलाइन पर महिलाएं भी खड़ी हैं। महिला डॉक्टर, नर्स मरीजों की जान बचा रहीं हैं। महिला पुलिसकर्मी व्यवस्था बनाए हुए हैं। कोरोना दर्द दे रहा है तो परिजनों का मनोबल भी महिलाएं ही बढ़ा रही हैं। सबका ध्यान रखने वाली महिला को खुद का ध्यान रखना भी जरूरी है। खासकर गर्भवती महिलाओं को। दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक है। अपना और गर्भस्थ शिशु का विशेष ध्यान रखें।
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आगरा के नवदीप हॉस्पिटल, साकेत कॉलोनी की निदेशक वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा का कहना है कि महिलाएं वायरस से बचाव की गाइड लाइन का हर हाल में पालन करें जैसे हाथ धोना, मास्क पहनना और दो गज की दूरी। भीड़भाड़ वाली जगह पर जाने से बचें। गर्भावस्था में चिकित्सकीय जांच जरूरी है पर जब डॉक्टर बुलाए तभी जाना चाहिए। जितना हो सके डॉक्टर से फोन पर परामर्श लें।
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उन्होंने बताया कि गर्भावस्था में वैक्सीनेशन के बारे में ज्यादा डाटा उपलब्ध नहीं है इसलिए अभी वैक्सीन गर्भवती महिलाओं को लगाई नहीं जा रही है। कोरोना के हल्के लक्षणों का गर्भावस्था में विशेष असर नहीं होता लेकिन गंभीर लक्षण हो जाने पर सावधानी जरूरी है।
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मां के दूध से नहीं होता संक्रमण
गर्भावस्था के दौरान बदलावों के चलते कोरोना की बीमारी मरीज में गंभीर रूप ले सकती है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है। कोरोना वायरस गर्भ में मां से बच्चे को ट्रांसफर नहीं होता है पर पैदा होने के बाद संक्रमित मां से बच्चे को हो सकता है। मां के दूध से संक्रमण बच्चे को नहीं होता है।
इन पांच बातों का ध्यान रखें
-व्यायाम करें, एरोबिक (तेज पैदल चलना), योगा एवं प्राणायाम 30-40 मिनट तक।
-संतुलित भोजन लें। दाल, हरी सब्जियां, पनीर के साथ विटामिन सप्लीमेंट लें।
-पानी अधिक से अधिक पीएं, घर के काम में और भी लोगों से मदद ले सकती हैं।
-सिर्फ जरूरी काम के लिए बाहर निकलें, बचाव के सभी नियमों का पालन करें।
-अगर डिप्रेशन लगे तो काउंसिलिंग जरूरी हो जाती है। अच्छी बातों के बारे में सोचें।
गर्भावस्था के दौरान बदलावों के चलते कोरोना की बीमारी मरीज में गंभीर रूप ले सकती है। यह गर्भवती महिलाओं के लिए ज्यादा खतरनाक है। कोरोना वायरस गर्भ में मां से बच्चे को ट्रांसफर नहीं होता है पर पैदा होने के बाद संक्रमित मां से बच्चे को हो सकता है। मां के दूध से संक्रमण बच्चे को नहीं होता है।
इन पांच बातों का ध्यान रखें
-व्यायाम करें, एरोबिक (तेज पैदल चलना), योगा एवं प्राणायाम 30-40 मिनट तक।
-संतुलित भोजन लें। दाल, हरी सब्जियां, पनीर के साथ विटामिन सप्लीमेंट लें।
-पानी अधिक से अधिक पीएं, घर के काम में और भी लोगों से मदद ले सकती हैं।
-सिर्फ जरूरी काम के लिए बाहर निकलें, बचाव के सभी नियमों का पालन करें।
-अगर डिप्रेशन लगे तो काउंसिलिंग जरूरी हो जाती है। अच्छी बातों के बारे में सोचें।