Pollution in Agra: धूल-धुएं के कारण कोख में ही बीमार हो रहे शिशु, गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान
प्रदूषित हवा के कारण गर्भवती महिलाओं की सेहत पर ही नहीं गर्भ में पल रहे शिशु भी बीमार हो रहे हैं। महिला जिला अस्पताल की ओर से 1080 गर्भवती महिलाओं पर किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
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आगरा में कार्बन-धूल के कण हवा की सेहत बिगाड़ रहे हैं। इसका असर कोख में पल रहे शिशुओं पर भी पड़ रहा है। ये गर्भ में ही बीमार हो रहे हैं। सात फीसदी गर्भवती महिलाओं में वायु प्रदूषण का दुष्प्रभाव मिला है। इनके गर्भस्थ शिशु का दिमागी-शारीरिक विकास कम हुआ। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हुई। ऐसे शिशुओं को भविष्य में दमा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप संबंधी बीमारियों का खतरा तीन गुना है।
महिला जिला अस्पताल की मुख्य अधीक्षक डॉ. रेखा गुप्ता ने बताया कि बीते एक साल में शहरी 1080 गर्भवती महिलाओं पर अध्ययन किया। इनमें से वायु प्रदूषण के कारण 78 गर्भवती महिलाओं में समय पूर्व प्रसव, गर्भपात, शिशु का वजन कम और विकास प्रभावित मिला। इनमें चार से छह सप्ताह पूर्व प्रसव हुआ, शिशु में 400-600 ग्राम तक वजन कम मिला।
छह गर्भवती महिलाओं का गर्भपात हुआ और शिशु कमजोर मिले। पूछने पर घर में परिजन धूम्रपान करते हैं, आसपास निर्माण कार्य होने, कचरा जलाने, घरों में हवा की निकासी बेहतर नहीं होना और सड़क किनारे घर बताया गया। गर्भावस्था में इनको सांस लेने में परेशानी, घबराहट जैसी परेशानी हुई, लेकिन वायु प्रदूषण से बचने को सजग नहीं रहीं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता भी हो रही कम
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि कोख में शिशु के लिए बाहरी वायुमंडल स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक प्रदूषित हवा से गर्भस्थ शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होने के साथ ऐसे बच्चों में भविष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दमा की बीमारी का भी खतरा तीन गुना से अधिक है।ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है प्रभावित
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि धुआं में कार्बन मोनोऑक्साइड, लैड, कार्बन डाय ऑक्सायड, धूल के 2.5 पीएम से कम कण सांस नलिकाओं को संकुचित कर देती हैं। इससे गर्भस्थ शिशु तक आवश्यक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे हृदय, दिमाग, फेफड़े समेत अन्य शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। प्रदूषित हवा में रहने वाली महिलाओं के शिशुओं में फेफड़े संबंधी बीमारी का खतरा भी अधिक है।इन बातों का रखें ध्यान
- झाड़ू लगाने, चादर-पर्दे झाड़ते वक्त मुंह ढककर रखें।
- घर में कोई धूम्रपान करें तो उसका विरोध कर बंद करवाएं।
- निर्माण कार्य वाले क्षेत्र में खिड़की-दरवाजे बंद रखें, पर्दे लगाएं।
- धुएं वाले क्षेत्र में जाएं तो मास्क लगाकर रखें, जांच भी कराएं।
- नियमित सांस संबंधी योग करने की आदत डालें।
- घर में हवा की निकासी का बेहतर इंतजाम करें।
75 दिन एक्यूआई रहा संतोषजनक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार मई 2021 से जून 2022 तक महज 75 दिन ही हवा की गुणवता संतोषजनक रही। इन दिनों में एक्यूआई 51 से 100 रहा। महज पांच दिन ही हवा सेहतमंद रही और एक्यूआई 20 से कम रहा। बाकी के 290 दिन एक्यूआई मानक से कई गुना ज्यादा रहा।
दिन एक्यूआई
15 दिन: 401 से 489
26 दिन: 301-400
131 दिन: 201-300
115 दिन: 101-200
75 दिन: 50 से 100
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)
धूम्रपान का पड़ा असर
जगदीशपुरा की 23 साल की गर्भवती महिला का दो महीने पहले एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रसव हुआ। इनके शिशु का वजन 2.1 किलो था। इनके पति और ससुर धूम्रपान करते हैं। घर सीमित है और रहने वाले सदस्यों की संख्या भी अधिक है।
मंटोला की 21 साल की गर्भवती महिला ने दूसरे बच्चे को अप्रैल में महिला जिला अस्पताल में जन्म दिया। सवा सात महीने में प्रसव हो गया, शिशु का वजन भी दो किलो था। इन्होंने बताया कि पास में कबाड़ का काम होता है, कई बार तार भी जलाते हैं, धूल-धुएं से परेशान रहते हैं।