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राष्ट्रीय प्रदूषण दिवस पर विशेष- फिर हवाओं में घुलने लगा प्रदूषण का जहर, एक्यूआई का स्तर बढ़ा
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कासगंज। ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है। मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 245 माइक्रो प्रति घन मीटर तक पहुंच गया। हालांकि एक पखवाड़े पूर्व एक्यूआई स्तर बारिश के कारण 87 माइक्रो प्रति घन मीटर तक ही रह गया था।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी इसके पीछे तीन वजहें मान रहे हैं। एक तो ठंडे मौसम में धुंध छाना, दूसरा कूड़ा-करकट का धुआं और तीसरा वाहनों से उड़ती धूल और धुआं है। पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह का कहना है कि ठंडे मौसम में प्रदूषण की समस्या अधिक रहती है। यदि बारिश हो जाए तो धुंध छट जाती है और फिर प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। एक पखवाड़े पहले बारिश से जिले का एक्यूआई स्तर 87 ही रह गया था, लेकिन अब फिर से प्रदूषण बढ़ गया है।
कम ऊंचाई पर जमा हो जाते धूल के कण
ठंडे मौसम में धूल के कण अधिक ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते। जब सड़कों पर वाहन दौड़ते हैं, धूल और धुआं उड़ता है तो धूल के कण कम ऊंचाई पर जमा हो जाते हैं। जिस कारण एक्यूआईस्तर बढ़ जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक्यूआई स्तर बढने का सबसे अहम कारण यही माना है। क्योंकि इन दिनों सहालगों का दौर है। सड़कों पर वाहनों की कतारें हैं।
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सांस रोगी बरतें विशेष सतर्कता
सोरों के चिकित्साधीक्षक डॉ. हरीश कुमार का कहना है कि सर्द मौसम में सांस रोगियों को समस्या बढ़ जाती है। जब प्रदूषण बढ़ रहा है तो सांस रोगियों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। क्योंकि ऐसे में उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा भी रहता है।
दो दिन का एक्यूआई स्तर
- 146 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआई सोमवार शाम
- 245 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआई स्तर था मंगलवार।
- 50 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआईस्तर पर्यावरण के लिए रहता है बेहतर।
ठंड बढ़ रही है, रात में कोहरा भी छाने लगा है। इसके अलावा वाहनों का धुआं और उड़ती धूल भी वातावरण में छा रही है। इस कारण एक्यूआई स्तर बढ़ रहा है। हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर पौधों का संरक्षण करना चाहिए। इससे प्रदूषण का स्तर कम कर सकते हैं।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) के अधिकारी इसके पीछे तीन वजहें मान रहे हैं। एक तो ठंडे मौसम में धुंध छाना, दूसरा कूड़ा-करकट का धुआं और तीसरा वाहनों से उड़ती धूल और धुआं है। पर्यावरणविद राजेंद्र सिंह का कहना है कि ठंडे मौसम में प्रदूषण की समस्या अधिक रहती है। यदि बारिश हो जाए तो धुंध छट जाती है और फिर प्रदूषण का स्तर कम हो जाता है। एक पखवाड़े पहले बारिश से जिले का एक्यूआई स्तर 87 ही रह गया था, लेकिन अब फिर से प्रदूषण बढ़ गया है।
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कम ऊंचाई पर जमा हो जाते धूल के कण
ठंडे मौसम में धूल के कण अधिक ऊंचाई तक नहीं पहुंच पाते। जब सड़कों पर वाहन दौड़ते हैं, धूल और धुआं उड़ता है तो धूल के कण कम ऊंचाई पर जमा हो जाते हैं। जिस कारण एक्यूआईस्तर बढ़ जाता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक्यूआई स्तर बढने का सबसे अहम कारण यही माना है। क्योंकि इन दिनों सहालगों का दौर है। सड़कों पर वाहनों की कतारें हैं।
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सांस रोगी बरतें विशेष सतर्कता
सोरों के चिकित्साधीक्षक डॉ. हरीश कुमार का कहना है कि सर्द मौसम में सांस रोगियों को समस्या बढ़ जाती है। जब प्रदूषण बढ़ रहा है तो सांस रोगियों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। क्योंकि ऐसे में उन्हें कोरोना संक्रमण का खतरा भी रहता है।
दो दिन का एक्यूआई स्तर
- 146 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआई सोमवार शाम
- 245 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआई स्तर था मंगलवार।
- 50 माइक्रो प्रतिघन मीटर एक्यूआईस्तर पर्यावरण के लिए रहता है बेहतर।
ठंड बढ़ रही है, रात में कोहरा भी छाने लगा है। इसके अलावा वाहनों का धुआं और उड़ती धूल भी वातावरण में छा रही है। इस कारण एक्यूआई स्तर बढ़ रहा है। हमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक होकर पौधों का संरक्षण करना चाहिए। इससे प्रदूषण का स्तर कम कर सकते हैं।
- रामगोपाल, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड।