आगरा बना नकली माल की मंडी: घी-तेल, दवा ही नहीं, पीवीसी पाइप भी बिक रहे नकली, मुकदमा दर्ज
आगरा में नकली का कारोबार काफी फलफूल रहा है। एक साल के अंदर नकली मोबिल ऑयल की कई फैक्टरी पकड़ी जा चुकी हैं। सिकंदरा में नकली दवा का अवैध कारोबार भी पकड़ा गया था। इसके अलावा नकली सीमेंट, स्पेयर्स पार्ट्स, घी, रिफाइंड, सरसों का तेल, सैनिटाइजर तक नकली मिल चुके हैं। अब नकली पीवीसी पाइप बिक्री का खुलासा हुआ है।
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ताजनगरी में घी, तेल, मोबिल ऑयल, सीमेंट, शराब, दवा ही नहीं पीवीसी पाइप भी नकली बिक रहे हैं। सदर के देवरी रोड में एक बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर कंपनी के नाम से नकली पाइप बेचे जा रहे थे। शुक्रवार को पुलिस ने कंपनी के जांच अधिकारी की सूचना पर छापा मारा। इस मामले में कापीराइट एक्ट का मुकदमा दर्ज किया गया है।
थाना सदर के प्रभारी निरीक्षक अजय कौशल ने बताया कि पौड़ी, गढ़वाल निवासी कृष्णलाल अपनी टीम के साथ थाना में आए थे। वह गुरुग्राम की एक कंपनी के अधिक्रत प्रतिनिधि हैं। उन्हें आशीर्वाद पाइप प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने जांच अधिकारी के पद पर नियुक्त किया है। कृष्णलाल को मुखबिर से सूचना मिली थी कि देवरी रोड पर एक दुकान में कंपनी के नाम से नकली पाइप बेचे जा रहे हैं।
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इस पर पुलिस के साथ उखर्रा निवासी बादाम सिंह की फौजी बिल्डिंग मैटेरियल शॉप पर छापा मारा गया। टीम ने कंपनी के नाम से रखे 44 पाइप को कब्जे में लिया। इनके नकली होने की आशंका पर एक को सैंपल के लिए जब्त किया। बाकी को पुलिस ने सील कर दिया। दुकान पर एक कर्मचारी ही मौजूद था। उससे पूछताछ की गई। पुलिस ने बादाम सिंह के खिलाफ कापी राइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आगरा में नकली का पहला मामला नहीं
आगरा में नकली का कारोबार काफी फलफूल रहा है। एक साल के अंदर नकली मोबिल ऑयल की कई फैक्टरी पकड़ी जा चुकी हैं। सिकंदरा में नकली दवा का अवैध कारोबार भी पकड़ा गया था। इसके अलावा नकली सीमेंट, स्पेयर्स पार्ट्स, घी, रिफाइंड, सरसों का तेल, सैनिटाइजर तक नकली मिल चुके हैं।
पुलिस एक मामले में कार्रवाई पूरी नहीं कर पाती है, उससे पहले ही दूसरा मामला सामने आ जाता है। नकली शराब के मामले में आए दिन पकड़े जा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
ग्राहक नहीं कर पाते हैं पहचान
नकली का कारोबार शहर में ऐसे ही नहीं फलफूल रहा है। इसके पीछे एक वजह बड़ा मुनाफा है। दुकानदार सस्ते के लालच में नकली माल खरीदते हैं। नकली को भी असली की तरफ निर्धारित मूल्य पर बेचा जाता है। इससे मुनाफा अधिक होता है।
वहीं ग्राहक नकली की पहचान नहीं कर पाते हैं। वह सिर्फ सामान पर नाम और मुहर लगी हुई देखते हैं। पाइप के मामले में भी ऐसा ही था। पाइप पर कंपनी की मुहर लगी होती थी। इस कारण उनके नकली होने का पता नहीं चल पाता है।