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इस्कॉन मंदिर के पास साधु बनकर रह रहा था बांग्लादेशी, सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला वृंदावन (मथुरा)
Updated Thu, 22 Nov 2018 04:02 PM IST
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पकड़ा गया बांग्लादेशी नागरिक
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन पुलिस ने एलआईयू टीम की मदद से साधु वेशधारी बांग्लादेशी नागरिक को इस्कॉन मंदिर के पास से गिरफ्तार किया है। उसके पास से भारतीय पहचान पत्र, दो एटीएम कार्ड व दो सिम के साथ ही बैंकों की दो पासबुक भी बरामद हुईं हैं। बांग्लादेशी वृंदावन के इस्कॉन मंदिर में संकीर्तन मंडली में काम कर रहा था।
मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने इस्कॉन मंदिर क्षेत्र में एक साधु वेशधारी व्यक्ति को संदिग्ध पाया। पुलिस द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके बांग्लादेशी होने की बात सामने आई। जिसके बाद पुलिस उसे कोतवाली ले आई।
यहां उसने अपना नाम फाल्गुन विकास वैद्य पुत्र रंगजीत वैध निवासी ग्राम छलहाठ, पोस्ट पाटली कोटा थाना अनवराह जिला छिटगगांव बांग्लादेश बताया, जबकि वह वृंदावन में पवित्रदास पुत्र प्रफुलदास निवासी इस्कॉन मंदिर उज्जैन के नाम से रह रहा था। वह वर्ष 2010 से वृंदावन में ही रह रहा था।
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मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने इस्कॉन मंदिर क्षेत्र में एक साधु वेशधारी व्यक्ति को संदिग्ध पाया। पुलिस द्वारा कड़ाई से पूछताछ करने पर उसके बांग्लादेशी होने की बात सामने आई। जिसके बाद पुलिस उसे कोतवाली ले आई।
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यहां उसने अपना नाम फाल्गुन विकास वैद्य पुत्र रंगजीत वैध निवासी ग्राम छलहाठ, पोस्ट पाटली कोटा थाना अनवराह जिला छिटगगांव बांग्लादेश बताया, जबकि वह वृंदावन में पवित्रदास पुत्र प्रफुलदास निवासी इस्कॉन मंदिर उज्जैन के नाम से रह रहा था। वह वर्ष 2010 से वृंदावन में ही रह रहा था।
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दलाल को पांच हजार देकर भारत आया
इस्कॉन में संकीर्तन करने वाले पवित्रदास ने बताया कि दलाल को 5 हजार रुपये देकर भारतीय सीमा में प्रवेश पाया। उसका आईडी कार्ड और पेन कार्ड इस्कॉन वृंदावन के गोपाल प्रभु और धर्मात्मादास द्वारा जारी पत्र के बाद बने थे। इस संबंध में धर्मात्मादास ने कहा कि उज्जैन इस्कॉन से आने के बाद वृंदावन के मंदिर में पवित्र संकीर्तन करता था। हमने सिर्फ यह लिखकर दिया था कि वह यहां सेवा करते हैं।
आठ वर्ष से वृंदावन में रहा रहा था
पवित्रदास नाम से बांग्लादेशी लगभग आठ वर्षों से वृंदावन में ही रह रहा था। वो इस्कॉन की संकीर्तन मंडली में काम करता था। हालांकि पुलिस को इस बारे में कोई भनक तक नहीं थी।
दूसरी ओर बांग्लादेशी गिरफ्तारी पर पुलिस भले अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन पवित्रदास की माने तो उसने स्वयं खुफिया विभाग के समक्ष समर्पण किया। उसका एक साथी भी था, जो शायद मौके से भाग गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।
आठ वर्ष से वृंदावन में रहा रहा था
पवित्रदास नाम से बांग्लादेशी लगभग आठ वर्षों से वृंदावन में ही रह रहा था। वो इस्कॉन की संकीर्तन मंडली में काम करता था। हालांकि पुलिस को इस बारे में कोई भनक तक नहीं थी।
दूसरी ओर बांग्लादेशी गिरफ्तारी पर पुलिस भले अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन पवित्रदास की माने तो उसने स्वयं खुफिया विभाग के समक्ष समर्पण किया। उसका एक साथी भी था, जो शायद मौके से भाग गया। पुलिस उसकी तलाश कर रही है।