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आगरा: 'तुम आ जाओ बेटा, तो बन जाए वसंत', भावुक कर देगी प्रख्यात साहित्यकार के परिवार की कहानी
Tue, 16 Feb 2021 01:13 PM IST
मुकेश कुमार
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा
सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Tue, 16 Feb 2021 01:13 PM IST
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राज बहादुर सिंह राज, पत्नी रुक्मणि देवी (हाथ में बेटे की तस्वीर), पुत्रवधु सुमन, नातिन विशाखा व नाती सौम्य सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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कहां गया बेटा मेरा, बोलो हे भगवान, बंद कर लिए क्यों प्रभु, तुमने अपने कान। हिंदुस्तानी एकेडमी, प्रयागराज के सदस्य राज बहादुर सिंह राज जब आगरा के बल्केश्वर स्थित अपने मकान में अपनी लिखी इन पंक्तियों को गुनगुनाते हैं, तो परिवार के एक-एक सदस्य की आंखें नम हो जाती हैं। दस साल पहले लापता हुए बेटे प्रमेंद्र सिंह के आने की उम्मीद में पत्नी सुमन सिंह, मां रुक्मिणी देवी और दो छोटे बच्चों की आंखें बार-बार फाटक पर इसलिए जाती हैं कि वसंत में शायद वो आ जाएं, तो उनकी जिंदगी वासंती हो जाए।
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मां रुक्मिणी देवी बताती हैं कि वसंत हमारे लिए इसलिए काफी मायने रखता है क्योंकि बेटे को वसंत के मौसम से काफी प्यार था। वसंत आने से एक दिन पहले ही मेरा बेटा गेंदें के फूल लाता था। मुझे हमेशा कहता था कि मां, वसंत वाले दिन पीली साड़ी पहनना। अब तो हर वसंत पर बस ये ही कहते हैं कि तुम आ जाओ बेटा, तो बन जाए वसंत।
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... और सपने मत दिखाना : पिता राज बहादुर सिंह राज
देश के प्रख्यात साहित्यकार राज बहादुर सिंह राज अपनी कई कविताओं में अपना दर्द लिख चुके हैं। सौ कुंडलियों, सौ दोहों और 20 गीतों के साथ उनकी प्रकाशित हुई पुस्तक ‘त्रिधारा’ में अपने बेटे को याद करते हुए राज ने बताया कि ‘हार कर हम सो रहे हैं, अब हमें तुम न जगाना, नयन दीपक बुझ रहे हैं, और सपने मत दिखाना’ को दिन में कई बार गाते हैं।
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संस्कार भारती के राष्ट्रीय संयोजक का कार्यभार संभाल रहे साहित्यकार राज की आंखें यह कहते हुए नम हो जाती हैं कि न जाने किस गुमनामी में चला गया मेरे जिगर का टुकड़ा।
रुला देती है पीली साड़ी : मां रुक्मिणी
वासंती प्रेम में पागल होने वाला मेरा बेटा मुझे पागल कर गया है। हर बार वसंत शुरू होते ही साहित्यकार राज की पत्नी रुक्मिणी देवी अपने बेटे को बसंत को बहुत याद करती हैं। रुक्मिणी की आंखों से यह बताते हुए आंसू झलक आए कि हर वसंत पर मुझे उसकी यही आवाज सुनाई देती है कि मां, तुम पीली साड़ी पहनना। मुझे लगता है कि वो लौट आया।
एक दिन जरूर आएंगे वो : पत्नी सुमन सिंह
सरस्वती शिशु मंदिर, कमला नगर में अध्यापिका सुमन सिंह उन लम्हों को याद कर अभी भी सिहर उठती हैं। वो कहती हैं कि मेरे पति प्रमेंद्र को वसंत से काफी लगाव है। इसलिए मुझे उम्मीद रहती है कि वो वसंत में जरूर आएंगे। जिस समय सुमन के पति प्रमेंद्र लापता हुए, उस समय सुमन आठवीं पास थी। वो कहती हैं कि मेरे ससुर राज बहादुर सिंह राज ने मुझे पोस्ट ग्रेजुएशन कराई। मैं इस काबिल बन सकी कि मैं एक अध्यापिका हूं।
रुला देती है पीली साड़ी : मां रुक्मिणी
वासंती प्रेम में पागल होने वाला मेरा बेटा मुझे पागल कर गया है। हर बार वसंत शुरू होते ही साहित्यकार राज की पत्नी रुक्मिणी देवी अपने बेटे को बसंत को बहुत याद करती हैं। रुक्मिणी की आंखों से यह बताते हुए आंसू झलक आए कि हर वसंत पर मुझे उसकी यही आवाज सुनाई देती है कि मां, तुम पीली साड़ी पहनना। मुझे लगता है कि वो लौट आया।
एक दिन जरूर आएंगे वो : पत्नी सुमन सिंह
सरस्वती शिशु मंदिर, कमला नगर में अध्यापिका सुमन सिंह उन लम्हों को याद कर अभी भी सिहर उठती हैं। वो कहती हैं कि मेरे पति प्रमेंद्र को वसंत से काफी लगाव है। इसलिए मुझे उम्मीद रहती है कि वो वसंत में जरूर आएंगे। जिस समय सुमन के पति प्रमेंद्र लापता हुए, उस समय सुमन आठवीं पास थी। वो कहती हैं कि मेरे ससुर राज बहादुर सिंह राज ने मुझे पोस्ट ग्रेजुएशन कराई। मैं इस काबिल बन सकी कि मैं एक अध्यापिका हूं।