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सो गई 'जन्म के अंगना अलग-अलग हैं, मरण का मरघट एक' बताने वाली आवाज

Wed, 26 Jul 2017 07:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला अलीगंज (एटा)
ब्यूरो/अमर उजाला अलीगंज (एटा) Updated Wed, 26 Jul 2017 07:54 PM IST
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poet of etah atma prakash shukla died in kanpur
आत्मप्रकाश शुक्ल - फोटो : अमर उजाला
‘जन्म के अंगना अलग-अलग हैं, मरण का मरघट एक।’ जीवन का सच हो या देश की चिंता, उनकी लेखनी ने समाज को संदेश दिया। छंद-व्यंग्य के माध्यम से उन्होंने समाज को नई दिशा देने की कोशिश की। जिले ने बुधवार को एक मानस पुत्र को खो दिया। 
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पूर्व राज्यमंत्री और राष्ट्रीय कवि आत्मप्रकाश शुक्ल के निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। कानपुर स्थित आवास पर मंगलवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस लीं। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके मूल आवास अलीगंज में शुभचिंतकों का तांता लग गया। बुधवार को पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े। देर शाम राष्ट्रीय कवि का अंतिम संस्कार किया गया।
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अलीगंज स्थित डीएवी इंटर कालेज में चार दशक तक अंग्रेजी के प्रवक्ता और प्रधानाचार्य रहे आत्मप्रकाश शुक्ल का जन्म वर्ष 1939 में कायमगंज के एक छोटे से गांव में हुआ। शुरू से हिंदी साहित्य में रुचि रही और छात्र जीवन से कविता की धुन सवार हो गई। 1952 में जहान नगर के एक किसान परिवार में शादी होने के बाद वह अलीगंज में रहने लगे। 
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1962 में लाल किले पर काव्यपाठ

poet of etah atma prakash shukla died in kanpur
आत्मप्रकाश शुक्ल - फोटो : अमर उजाला
पढ़ाई के साथ-साथ कविताओं में आत्मप्रकाश शुक्ल की रुचि बढ़ती गई। 1962 में कस्बे के डीएवी इंटर कॉलेज में अंग्रेजी के प्रवक्ता के रूप में नौकरी की और 1990 में विद्यालय प्रधानाचार्य बन गए। इस दौरान उनकी लेखनी और विचार कविताओं को जन्म देते रहे। वर्ष 1962 में आत्मप्रकाश शुक्ल को लाल किले पर काव्य पाठ का आमंत्रण मिला। 

यहां उन्होंने चीन के खिलाफ काव्य प्रस्तुति देकर झकझोर दिया। इसके बाद तो उन्होंने देश-विदेशों में कई काव्य पाठ किए। वर्ष 1997 में सेवानिवृत्त होने के बाद वह कानपुर रहने लगे। उनकी ख्याति का ही असर था कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने सपा सरकार में उन्हें दो बार राज्यमंत्री का दर्जा दिया। उनके तीन पुत्र और एक पुत्री है। जिले से बुधवार को साहित्य के एक बड़े हस्ताक्षर विदा हो गए। 
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