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'अगर कश्मीर में पत्थर उठाने वाले आतंकी, तो गोरक्षा की आड़ में हत्या करने वाले कौन'

Sun, 12 Aug 2018 10:25 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Updated Sun, 12 Aug 2018 10:25 AM IST
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poet munawwar rana statement on mob lynching incidents
MUNAWWAR RANA

मशहूर शायर मुनव्वर राना का कहना है कि सियासी बाजीगरी सबसे पहले जुबान (भाषा) को तबाह करती है, फिर तहजीब को और फिर मुल्क को। इससे बचना चाहिए। सियासत ने ही इस हिंदुस्तान को ही कई हिंदुस्तान में बांट दिया है। असम, कश्मीर, बंगाल इसका ताजा उदाहरण हैं। आगरा में शनिवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कश्मीर में जो पत्थर उठा रहे हैं, वो आतंकवादी नहीं हैं। ये समझना होगा कि जिनके पास असलाह नहीं होता, वो आतंकवादी नहीं हो सकता। अगर, वो आतंकवादी हैं तो गोरक्षा की आड़ में हत्या करने वाले क्या हैं? 

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उन्होंने कहा कि जब सरकारें यह नहीं समझेंगी कि कश्मीर के साथ-साथ यहां रहने वाले भी हमारे हैं, तब तक कश्मीर हासिल नहीं हो सकता। स्थिति तो यह है कि अब तक हमारे देश में यह फैसला नहीं हो सका है कि आतंकवादी कौन हैं? मुनव्वर राना ने प्रदेश सरकार पर भी निशाना साधा और कहा कि वर्तमान में प्रदेश में जो एनकाउंटर हो रहे हैं वो फर्जी हैं। केंद्र या राज्य, दोनों को देखकर लगता है कि आज भी अंग्रेजी हुकूमत चल रही है। 
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उर्दू भाषा की उपेक्षा पर उनका कहना हे कि उर्दू पर दो बार गाज गिरी है। एक बार सन् 1947 में। जब इस भाषा को पाकिस्तान की बेटी कहा गया। दूसरी बार बाबरी मस्जिद से इस भाषा के प्रति नफरतों का सिलसिला शुरू हुआ। इसे आतंकवादी की जुबान कहा दिया गया। क्यों नहीं समझते कि मुसलमान की जुबान उर्दू नहीं है। यह हिंदुस्तान में ही पली और बड़ी हुई। सियासत के चलते इस भाषा को लेकर भेद किया जाने लगा। 
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उन्होंने कहा कि जो ऊर्दू को पाकिस्तान की जुबा कहते हैं, उन्हें समझना होगा कि पाकिस्तान मुल्क नहीं है। वो हिंदुस्तान का ही एक हिस्सा रहा है, वो अलग से कोई देश नहीं है। 
वर्तमान शेर, शायरी और कवि सम्मेलनों के संबंध में उनका कहना है कि कविताओं के स्तर में खराबी आई है। पहले कविता बाजार नहीं थी। संस्कार गायब हो गए हैं। फूहड़पन आ गया है। शायरी तो है ही नहीं, तमाशा बन गया है जो दिखाया जा रहा है। 

नीरज मरते नहीं, पर्दा कर लेते हैं  मुनव्वर राना ने गोपाल दास नीरज के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि जब तक शायरी और कविता में सच बोला जाएगा, नीरज जी याद रखे जाएंगे। ऐसे लोग मरते नहीं, पर्दा कर लेते हैं। नीरज ऐसी शख्सियत थीं, जिनसे हमेशा कुछ न कुछ सीखने को मिला। 


उनके बारे में अगर यह कहा जाए कि वह संस्कार सिखाने वाले कवि थे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। उन्होंने हमेशा अपने कनिष्ठ कवियों को सिखाया। एक जिंदादिल इंसान थे गोपाल दास नीरज। वो जितने अच्छे कवि थे, उतने ही अच्छे शायर।

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