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प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में 200 मिले अपात्र, जांच से मची खलबली
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कासगंज। प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के लिए लाभार्थियों के चयन में अपात्र लोग भी शामिल कर लिए गए। नगर निकायों के सर्वे में 250 अपात्र सूची में शामिल कर लिए गए, लेकिन सत्यापन में इनकी पोल खुल गई। अब नगरीय विकास विभाग ने उनके नाम काट दिए हैं।
शहरी गरीबों को आवासीय योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत धन दिया जाता है। योजना के लाभार्थियों के चयन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निकायों द्वारा सर्वे में पात्र बताए गए करीब 250 लाभार्थी सत्यापन में मिलीे ही नहीं। नगरीय विकास अभिकरण विभाग ने सत्यापन कराया तो इसका खुलासा हुआ है। सर्वे में शामिल अपात्रों के न तो नाम व पतों पर आवास मिल रहे और न ही आवेदनकर्ताओं का कुछ पता है।
डूडा ने ठिकाने न मिलने पर उन्हें अपात्र मानते हुए सूची से नाम काट दिए हैं। विभाग का दावा है कि किसी भी अपात्र को योजना का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। अपात्रों को सूची में शामिल करने की इस बड़ी गड़बड़ी के इतर देखा जाए तो तमाम पात्र आवेदन करने के बाद भटक रहे हैं।
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कई पात्रों के चयन में मनमानी की अनदेखी
तमाम पात्र जिले में ऐसे भी भटक रहे हैं जो सर्वे व सत्यापन के बाद पात्रता की श्रेणी में तो हैं, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों और अनदेखी के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे ही बबलू, मुनेश ने बताया कि उन्होंने आवेदन किया था। पहले तो नगरपालिका के कर्मचारियों ने काफी परेशान किया और फिर डूडा में कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा। कहा जाता है कि आवेदन मेंरह गई होगी।
आंकड़े की नजर से-
- 10 नगर निकाय हैं जिलेभर में।
- 8425 पात्रों को अब तक मिला है योजना का लाभ।
- 775 नए पात्रों के आवेदन स्वीकृति के लिए भेजे गए।
सत्यापन में जो भी अपात्र पाए गए हैं। उन सभी के नाम सूची से हटा दिए हैं। किसी भी अपात्र को योजना का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। चयनित नए पात्रों के नाम स्वीकृति के लिए शासन को भेजे हैं। सर्वे में अपात्रों के नाम शामिल करने की जांच होगी। - विद्याशंकर पाल, परियोजना अधिकारी, नगरीय विकास अभिकरण।
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शहरी गरीबों को आवासीय योजना का लाभ दिलाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत धन दिया जाता है। योजना के लाभार्थियों के चयन में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नगर निकायों द्वारा सर्वे में पात्र बताए गए करीब 250 लाभार्थी सत्यापन में मिलीे ही नहीं। नगरीय विकास अभिकरण विभाग ने सत्यापन कराया तो इसका खुलासा हुआ है। सर्वे में शामिल अपात्रों के न तो नाम व पतों पर आवास मिल रहे और न ही आवेदनकर्ताओं का कुछ पता है।
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डूडा ने ठिकाने न मिलने पर उन्हें अपात्र मानते हुए सूची से नाम काट दिए हैं। विभाग का दावा है कि किसी भी अपात्र को योजना का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। अपात्रों को सूची में शामिल करने की इस बड़ी गड़बड़ी के इतर देखा जाए तो तमाम पात्र आवेदन करने के बाद भटक रहे हैं।
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कई पात्रों के चयन में मनमानी की अनदेखी
तमाम पात्र जिले में ऐसे भी भटक रहे हैं जो सर्वे व सत्यापन के बाद पात्रता की श्रेणी में तो हैं, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों और अनदेखी के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा। ऐसे ही बबलू, मुनेश ने बताया कि उन्होंने आवेदन किया था। पहले तो नगरपालिका के कर्मचारियों ने काफी परेशान किया और फिर डूडा में कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा। कहा जाता है कि आवेदन मेंरह गई होगी।
आंकड़े की नजर से-
- 10 नगर निकाय हैं जिलेभर में।
- 8425 पात्रों को अब तक मिला है योजना का लाभ।
- 775 नए पात्रों के आवेदन स्वीकृति के लिए भेजे गए।
सत्यापन में जो भी अपात्र पाए गए हैं। उन सभी के नाम सूची से हटा दिए हैं। किसी भी अपात्र को योजना का लाभ नहीं लेने दिया जाएगा। चयनित नए पात्रों के नाम स्वीकृति के लिए शासन को भेजे हैं। सर्वे में अपात्रों के नाम शामिल करने की जांच होगी। - विद्याशंकर पाल, परियोजना अधिकारी, नगरीय विकास अभिकरण।