आगरा की फल विक्रेता प्रीति के आत्मविश्वास से प्रभावित हुए प्रधानमंत्री, वर्चुअल संवाद में की तारीफ
प्रीति ने पीएम से कहा, आपने डूबते को तिनके का सहारा दिया है
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पीएम मोदी : प्रीति जी, आप क्या काम करती हैं। स्वनिधि योजना से आपकी किस तरह मदद हो पाई।
प्रीति : मैं आपको नमस्कार करती हूं। स्वागत करती हूं। आप ने महिलाओं को जो सम्मान दिया है, उसके लिए धन्यवाद।
पीएम मोदी : आप बताएं आप को स्वनिधि योजना से कैसे लाभ हुआ।
प्रीति : पहले हम सब्जी बेचते थे, लेकिन लॉकडाउन में जब हम पर विपदा, परेशानी आई तो हम डूबने लगे लेकिन आपने डूबते को तिनके का सहारा दिया सर। महिलाओं को आदर और सम्मान दिया। यह जो आपने योजना चलाई है, हमने नगर निगम जाकर पता किया। अधिकारियों ने भी मदद की। फॉर्म भरा और 10 हजार रुपये मिल गए। हमने सब्जी की जगह फलों की ठेल लगाई है। आपकी दुआओं से कुछ बनना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने दी शुभकामनाएं
प्रधानमंत्री : फलों का काम फिर शुरू हो गया होगा बराबर।
प्रीति : हां जी सर, आपकी दुआ से।
प्रधानमंत्री : नवरात्र में फल ज्यादा बिके होंगे।
प्रीति : जी, नवरात्र में अच्छी बिक्री हुई थी।
प्रधानमंत्री : बैंक में पैसे जमा करना शुरू कर दिया है।
प्रीति : हां जी सर, एक किस्त हमने अक्तूबर की भर दी है।
प्रधानमंत्री : अच्छा, आपने पीछे फलों के ऊपर क्या रखा है।
प्रीति : सर यह वह है, जो हमसे सामान लेने आता है। हमें बड़ा फोन चलाना आता नहीं, इसलिए जब वह हमसे कहते हैं कि पेटीएम में पैसे डाल दिए तो हम इसका बटन दबाकर देखते हैं कि पैसे मिले या नहीं। आपने सुना क्या।
प्रीति : सामने वाला इससे अब हमें पागल नहीं बना सकता।
प्रधानमंत्री : लॉकडाउन में घर को आपने कैसे संभाला।
प्रीति : लॉकडाउन में कुछ दिक्कतें आई थीं। मेरे पर क्या पूरे भारत पर आईं थीं, पर कुछ दिक्कतें आपने दूर कर दी। आपने जनधन योजना में पैसे डाले। खाने के पैकेट नगर निगम से मिल गए। पूरी सहायता मिली। हम फोन करते थे तो हमें खाना मिल जाता था।
प्रधानमंत्री : आपको राशन समय पर मिला।
प्रीति : जी, हमारे पास राशन कार्ड है।
प्रधानमंत्री : आपने अपने पैरों पर खड़ा होना तय किया, अच्छा है।
प्रीति : जब तक आप हमारी अंगुली पकड़े हैं, तो फिक्र किस बात की।
प्रधानमंत्री : आप डिजिटल पेमेंट करोगी तो कैशबैक मिलेगा यह जानकारी है ना।
प्रीति : जी, पता है, 1200 रुपये साल में मिलेंगे, इसका फायदा मिलेगा।
प्रधानमंत्री : आप ब्याज में फायदा ले सकती हैं। एक तरह से बिना ब्याज के पैसे मिल जाएंगे। आपके फल खाकर लोगों की सेहत सुधरती है। डिजिटल पेमेंट से कोरोना से सावधान कर रही हैं। मेरी शुभकामनाएं है कि आपका व्यापार बढ़े और बच्चों की शिक्षा अच्छी हो।
शिल्पग्राम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वर्चुअल संवाद करने के बाद प्रीति बेहद खुश नजर आई। बेहद सहज अंदाज में और आत्मविश्वास से लबरेज प्रीति ने अमर उजाला से कहा कि प्रधामनंत्री मोदी ने मुझसे बात की तो लगा कि आज भगवान से बात हो गई। स्वनिधि योजना से उसे बड़ा सहारा मिला है। पहले मन में डर था कि कैसे बात कर पाऊंगी।
प्रधानमंत्री क्या पूछेंगे, कैसे उनकी बात का जबाव देंगी। लेकिन जब प्रधानमंत्री ने हंसकर बात की तो आत्मविश्वास बढ़ता चला गया। प्रीति ने कहा कि इस लोन को वह समय पर चुकाएंगी, जिससे दोबारा इससे ज्यादा बड़ा लोन 20 या 50 हजार रुपये का उन्हें मिल पाए। प्रीति ने बातचीत के अंत में अपने पति राधेश्याम से प्रधानमंत्री को मिलवाया और उनकी परेशानी के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने उनके पति की परेशानी दूर करने के लिए योगी सरकार और अधिकारियों से कहा है।
देखा, आपके कहने से आवाज आने लगी
शिल्पग्राम में वर्चुअल संवाद में प्रीति को आवाज नहीं आई तो उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उनकी आवाज नहीं आ रही है। इस पर प्रधानमंत्री ने माइक ठीक किया और पूछा कि क्या अब आवाज आई। प्रीति ने हां में उत्तर दिया। इस पर प्रधानमंत्री ने हंसकर कहा कि यह आपकी शक्ति है कि आपके कहने भर से आवाज आने लगी।
स्वनिधि योजना में चाय की दुकान चलाने ताजगंज निवासी पवन भी प्रीति के साथ थे, लेकिन पवन से बात नहीं हुई। चाय स्टाल संचालक पवन ने कहा कि कोई बात नहीं, बात होती तो और अच्छा लगता। मोदी जी ने उन्हें देखा यही बहुत है उनकी योजना का सहारा लेकर मैंने नया ठेला खरीदा और सामान भी ज्यादा लाने लगा जिससे मुझे ज्यादा पैसे बच रहे हैं। इस बात की खुशी है कि मेरी बहन प्रीति से उन्होंने बात की।
बंदरों से बचाने के लिए डंडे लेकर खड़े रहे कर्मचारी
शिल्पग्राम में जिस समय प्रधानमंत्री मोदी प्रीति से संवाद कर रहे थे, उसी समय बंदरों का एक झुंड शिल्पग्राम में दुकानों की छत पर उछल कूद करने लगा, लेकिन नगर निगम के कई कर्मचारी हाथों में डंडे लेकर तैयार खड़े थे कि कहीं वह बातचीत के बीच में व्यवधान न कर दें या फलों के ठेल से फल उठाकर ना भाग जाएं। सुबह फलों की ठेल तैयार करते समय बंदर फल उठाकर ले जा चुके थे।