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मथुरा: आयुष्मान से नहीं मिल रहा इलाज, 'हक' को भटक रहे लोग

Tue, 10 Sep 2019 12:04 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा Published by: Abhishek Saxena Updated Tue, 10 Sep 2019 12:04 AM IST
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pm modi arrives in mathura People wants home and treatment in ayushman and housing secme
झोपड़ी में रह रहे परिवार को नहीं मिला आवास, आयुष्मान योजना में गरीब को मिली दुत्कार - फोटो : अमर उजाला
प्रधानमत्रीजी जिले में अपनी उन योजनाओं का हाल भी जान लीजिए, जिन्हें आप की महत्वाकांक्षी योजनाएं बताया जा रहा हैं। इसमें गरीब आवास, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और मुद्रा ऋण योजनाएं शामिल हैं।
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जिनका लाभ मथुरा में गरीबों को नहीं मिल पा रहा है। गरीब सरकारी दफ्तरों के चक्कर तो लगा रहे हैं, लेकिन अफसर सुनने को तैयार ही नहीं हैं। अफसरों ने इस योजनाओं की कीमत तय कर दी है। 
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मथुरा वेटरनेरी यूनिवर्सिटी में 11 सितंबर को आ रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस धार्मिक स्थल की जनता बहुत कुछ कहना चाहती है। ये भी बताना चाहती है कि केंद्र सरकार द्वारा क्रियान्वित योजनाओं का जिले में क्या हाल है। आपकी योजनाओं का लाभ तो यहां गरीबों को नहीं दिया जा रहा है। योजना में शामिल करने के लिए गरीबों से कीमत वसूली जा रही है।

मथुरा महानगर क्षेत्र के हाईवे स्थित मिर्जापुर निवासी राकेश ने एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था। अब तक कोई जानकारी नहीं दी गई है कि इस योजना में उसका चयन हुआ है या नहीं। राकेश बताते हैं कि इसके लिए डूडा कार्यालय के चक्कर लगाते हुए थक गया हूं। कोई सुनने को तैयार नहीं है। दलाल पैसा मांग रहे हैं।  

महानगर क्षेत्र में यमुनापार स्थित ईशापुर निवासी सुमित ने आठ माह पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। थक गए हैं चक्कर लगाते हुए। बताते हैं कि डूडा कार्यालय में कोई कुछ बताने को तैयार ही नहीं है। अधिकारी से भी कई बार मिले हैं, यही कर दिया जाता है कि पैसा मिल जाएगा। 

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कोन्हई के रहने वाले त्रिलोकचंद्र का परिवार झोंपड़ी में रहता है। दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। हाथ कटा हुआ है, फिर भी किसी तरह परिवार का लालन-पालन कर रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पिछले तीन साल से 7 बार आवेदन किया है, लेकिन अब तक तो कुछ नहीं मिला है। त्रिलोकचंद्र के तीन और भाई इसी स्थिति में हैं। उनके पास भी रहने के लिए पक्का मकान नहीं है।

मोदी सरकार की आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारक जनरलगंज निवासी नौरंगीलाल को चार माह पहले पैर में फैक्चर हुआ था। इस कार्ड से घाव के उपचार के लिए एक माह तक निजी अस्पतालों के चक्कर लगाए, लेकिन किसी ने उपचार नहीं दिया।

जिला अस्पताल ने भी पैर का ऑपरेशन करने से मना कर दिया। पैसे के अभाव में परेशान नौरंगीलाल ने राजस्थान के जयपुर स्थित सवाई मानसिंह अस्पताल की शरण ली। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नौरंगीलाल का पैर काटा गया। कहा कि उपचार में देरी के इसका कारण बनी है।

आयुष्मान कार्ड धारक रिजवाना बच्चे को जन्म देने जा रही है। परिजनों ने उसे जिला महिला अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती कराया था, लेकिन एक दिन रखने के बाद सरकारी चिकित्सकों ने रात में ही उसे बाहर जाने के लिए कह दिया।

रिजवाना के परिजनों ने कहा उनके पास प्राइवेट इलाज के लिए पैसे नहीं है, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। आयुष्मान कार्ड को लेकर रिजवाना के परिजन कई निजी हॉस्पिटल गए, लेकिन किसी ने कार्ड से इलाज नहीं दिया। अब रिजवाना चैरिटेबिल हॉस्पिटल में भर्ती कराया है।
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