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दवाएं तो खूब बनीं, दर्द से निजात नहीं
अमर उजाला अागरा
Updated Thu, 26 May 2016 02:08 AM IST
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नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद लोगों को उन समस्याओं के समाधान की तो बड़ी उम्मीदें थीं, जो खुद इस शहर का सबसे बड़ा दर्द हैं। यूं तो राष्ट्रीय फलक पर केंद्र सरकार ने अपने कार्यकाल के इन दो वर्षों में तमाम लाभकारी योजनाएं दीं, पर आगरा का दर्द आज भी वहीं और उतना ही महसूस किया जा रहा है। एयरपोर्ट, आलू किसानों के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, पेयजल संकट का समाधान और पर्यटन विकास के मामलों में मोदी सरकार के नुस्खों से फायदा होता नजर नहीं आ रहा।
शहर की नब्ज पर अंगुली रखते हुए दो साल पहले (अब प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी ने शंखनाद रैली में कई मुद्दे उठाए थे। उनकी सरकार बनने पर सबसे ज्यादा उम्मीदें उन्हीं को लेकर थीं। एयरपोर्ट तो इंटरनेशनल बनाने का वादा था, लेकिन केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्री आगरा की जगह जेवर में एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी ले आए। इसी तरह आलू के लिए सेंटर आगरा में बनना था, लेकिन राज्य सरकार उसे कन्नौज ले गई। कें द्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री निरंजन ज्योति की आगरा के उद्यमियों से दो बार वार्ता भी हो चुकी, लेकिन आलू किसानों को न तो सीपीआरआई सेंटर ही मिला और न ही पोटेटो बोर्ड। पेयजल के लिए गंगाजल योजना का इंतजार अब भी है। भले यह राज्य सरकार का प्रोजेक्ट है, लेकिन केंद्र की जल योजनाओं से भी आगरा को जोड़ा तक नहीं गया। पर्यटन प्रोत्साहन में ताजमहल के शहर का नाम मोदी सरकार की किसी भी योजना में नहीं आया। अलबत्ता सर्विस टैक्स और बढ़ गया।
थोड़ा मिला, थोड़े की जरूरत है....
एकाउंट में सब्सिडी, दो लाख का बीमा
हर परिवार में बैंक खाता। योजना भले कांग्रेस सरकार ने शुरू की लेकिन इसे जन-जन तक प्रधानमंत्री जन-धन योजना के जरिए मोदी सरकार ने ही पहुंचाया। आगरा में 6.11 लाख बैंक खाते खोले गए। करीब 1.82 लाख एकाउंट जीरो बैलेंस पर लंबे समय से बने रहे। ये लैप्स न हो जाएं और इनसे जुड़ी योजनाओं का फायदा गरीबों तक पहुंचे, इसलिए बैंकों ने ही एक-एक रुपया जमा कर इन्हें एक्टिव रखा है। रसोई गैस सब्सिडी हो या मनरेगा का मानदेय इन खातों के जरिए सीधे उपभोक्ता तक पहुंच रहा है।
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बीमा योजनाओं से बढ़ी सामाजिक सुरक्षा
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के जरिए जन धन तथा बैंकों के अन्य खातेधारकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा गया। आगरा में 1,27,642 लोग प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना से तो 2,24,368 सुरक्षा बीमा योजना से जुड़े हैं। 25 मई से 31 मई के बीच इन दोनों योजनाओं के लिए प्रीमियम की कटौती बैंक खातों से होनी है। हर ग्राहक के मोबाइल पर इसके मैसेज भी पहुंच रहे हैं।
बीमा हिट पर अटल पेंशन योजना फ्लॉप
मोदी सरकार की वित्तीय योजनाओं में बीमा योजनाएं तो हाथों हाथ ली गईं, लेकिन अटल पेंशन योजना फ्लॉप ही रही। अब तक आगरा जिले में केवल 5698 लोगों ने इसका फायदा उठाया है। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा के लिए अटल पेंशन योजना लांच की गई थी। एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की पेंशन रिटायर होने के बाद मिलनी है, लेकिन कर्मचारी इस योजना से कम ही जुड़े।
ई-टेंडर से पारदर्शिता-प्रतिस्पर्धा बढ़ी
मोदी सरकार ने सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्र सरकार के हर विभाग को केंद्रीय वेबसाइट पर अपने टेंडर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। एएसआई हो या सेना, पेट्रोलियम मंत्रालय हो या नागरिक उड्डयन, मिलिट्री हॉस्पीटल हो या एमएसएमई अपने वेबसाइट के साथ इस वेबसाइट पर भी टेंडर अपलोड कर रहे हैं। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ी बल्कि पूलिंग खत्म हुई। पारदर्शिता भी बढ़ी।
भविष्य के भारत की नींव
उद्योग छोटे हों या बड़े, मोदी सरकार ने स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों से भारतीय उत्पादों को ब्रांड बनाने का प्रयास किया है। सरकार अब तक तो सही ट्रैक पर है। इसके फायदे भी आम लोगों को दिखेंगे
अशोक गोयल, अध्यक्ष, नेशनल चेंबर
मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप, मुद्रा योजना, डिजिटल इंडिया के रिजल्ट कुछ सालों में दिखाई देंगे। भविष्य की नींव तैयार हुई है। आगरा की जरूरतों पर काम हो रहा है, भले समय लग रहा हो पर ये काम होंगे।
पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक
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शहर की नब्ज पर अंगुली रखते हुए दो साल पहले (अब प्रधानमंत्री) नरेंद्र मोदी ने शंखनाद रैली में कई मुद्दे उठाए थे। उनकी सरकार बनने पर सबसे ज्यादा उम्मीदें उन्हीं को लेकर थीं। एयरपोर्ट तो इंटरनेशनल बनाने का वादा था, लेकिन केंद्र सरकार के पर्यटन मंत्री आगरा की जगह जेवर में एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी ले आए। इसी तरह आलू के लिए सेंटर आगरा में बनना था, लेकिन राज्य सरकार उसे कन्नौज ले गई। कें द्रीय खाद्य प्रसंस्करण राज्य मंत्री निरंजन ज्योति की आगरा के उद्यमियों से दो बार वार्ता भी हो चुकी, लेकिन आलू किसानों को न तो सीपीआरआई सेंटर ही मिला और न ही पोटेटो बोर्ड। पेयजल के लिए गंगाजल योजना का इंतजार अब भी है। भले यह राज्य सरकार का प्रोजेक्ट है, लेकिन केंद्र की जल योजनाओं से भी आगरा को जोड़ा तक नहीं गया। पर्यटन प्रोत्साहन में ताजमहल के शहर का नाम मोदी सरकार की किसी भी योजना में नहीं आया। अलबत्ता सर्विस टैक्स और बढ़ गया।
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एकाउंट में सब्सिडी, दो लाख का बीमा
हर परिवार में बैंक खाता। योजना भले कांग्रेस सरकार ने शुरू की लेकिन इसे जन-जन तक प्रधानमंत्री जन-धन योजना के जरिए मोदी सरकार ने ही पहुंचाया। आगरा में 6.11 लाख बैंक खाते खोले गए। करीब 1.82 लाख एकाउंट जीरो बैलेंस पर लंबे समय से बने रहे। ये लैप्स न हो जाएं और इनसे जुड़ी योजनाओं का फायदा गरीबों तक पहुंचे, इसलिए बैंकों ने ही एक-एक रुपया जमा कर इन्हें एक्टिव रखा है। रसोई गैस सब्सिडी हो या मनरेगा का मानदेय इन खातों के जरिए सीधे उपभोक्ता तक पहुंच रहा है।
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बीमा योजनाओं से बढ़ी सामाजिक सुरक्षा
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के जरिए जन धन तथा बैंकों के अन्य खातेधारकों को सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा गया। आगरा में 1,27,642 लोग प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना से तो 2,24,368 सुरक्षा बीमा योजना से जुड़े हैं। 25 मई से 31 मई के बीच इन दोनों योजनाओं के लिए प्रीमियम की कटौती बैंक खातों से होनी है। हर ग्राहक के मोबाइल पर इसके मैसेज भी पहुंच रहे हैं।
बीमा हिट पर अटल पेंशन योजना फ्लॉप
मोदी सरकार की वित्तीय योजनाओं में बीमा योजनाएं तो हाथों हाथ ली गईं, लेकिन अटल पेंशन योजना फ्लॉप ही रही। अब तक आगरा जिले में केवल 5698 लोगों ने इसका फायदा उठाया है। प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों की रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सुरक्षा के लिए अटल पेंशन योजना लांच की गई थी। एक हजार से लेकर पांच हजार रुपये तक की पेंशन रिटायर होने के बाद मिलनी है, लेकिन कर्मचारी इस योजना से कम ही जुड़े।
ई-टेंडर से पारदर्शिता-प्रतिस्पर्धा बढ़ी
मोदी सरकार ने सरकारी ठेकों में भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने को महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्र सरकार के हर विभाग को केंद्रीय वेबसाइट पर अपने टेंडर अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है। एएसआई हो या सेना, पेट्रोलियम मंत्रालय हो या नागरिक उड्डयन, मिलिट्री हॉस्पीटल हो या एमएसएमई अपने वेबसाइट के साथ इस वेबसाइट पर भी टेंडर अपलोड कर रहे हैं। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ी बल्कि पूलिंग खत्म हुई। पारदर्शिता भी बढ़ी।
भविष्य के भारत की नींव
उद्योग छोटे हों या बड़े, मोदी सरकार ने स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों से भारतीय उत्पादों को ब्रांड बनाने का प्रयास किया है। सरकार अब तक तो सही ट्रैक पर है। इसके फायदे भी आम लोगों को दिखेंगे
अशोक गोयल, अध्यक्ष, नेशनल चेंबर
मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप, मुद्रा योजना, डिजिटल इंडिया के रिजल्ट कुछ सालों में दिखाई देंगे। भविष्य की नींव तैयार हुई है। आगरा की जरूरतों पर काम हो रहा है, भले समय लग रहा हो पर ये काम होंगे।
पूरन डावर, अध्यक्ष, एफमेक