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धौ, कदंब, तमाल से हरा-भरा दिखेगा गोवर्धन पर्वत, ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने शुरू की कवायद
Sat, 04 May 2019 02:05 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा/मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 04 May 2019 02:05 PM IST
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गोवर्धन पर्वत
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कांटेदार बबूल की जगह गोवर्धन पर्वत क्षेत्र में धौ, कदंब, तमाल जैसे ब्रजभूमि के प्राचीन पौधों के जरिए इसे हरा भरा करने की कवायद हो रही है। ब्रज तीर्थ विकास परिषद ने वन विभाग के सहयोग से गोवर्धन पर्वत पर लगे धौ के पौधों की ‘सर्जरी’ कर इनके तेजी से बढ़ने का रास्ता खोला है तो वहीं, परिक्रमा मार्ग के किनारे तमाल, कदंब, पीलू जैसे देसी प्रजाति के पौधे लगाए जा रहे हैं।
गोवर्धन पर्वत पर ऊपर धौ के पौधे बड़ी संख्या में लगे हैं, लेकिन बंदरों के आतंक और डालियों के तोड़ देने के कारण यह बढ़ नहीं पाए। पर्वत के पौराणिक और धार्मिक महत्व के कारण ऊपर जाकर पौधों की देखरेख भी कम हो पाई। इससे धौ का पौधा नीचे कारपेट की तरह ही बना रहा। अब धौ के पौधों की सर्जरी और जरूरी प्रक्रिया अपनाकर धौ के तेजी से बढ़ने की कवायद की गई है।
वन विभाग के कर्मचारी नंगे पांव कांटेदार बबूल के बीच से निकलकर पर्वत पर लगे धौ के पौधों को सहेज रहे हैं। पर्वत के नीचे सड़क और पर्वत के बीच के क्षेत्र में जहां भी बबूल के पेड़ हैं, उनके पास देसी कदंब, तमाल, पीलू जैसे पौधे लगाए जा रहे हैं।
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गोवर्धन पर्वत परिक्रमा मार्ग के किनारे खुशबूदार फूलों की प्रजातियों को लगाया जा रहा है ताकि परिक्रमा करने वालों को सुखद एहसास हो सके। इस बार 12,500 एकड़ क्षेत्र में 8 हजार पौधों को यहां लगाने की तैयारी है।
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गोवर्धन पर्वत पर ऊपर धौ के पौधे बड़ी संख्या में लगे हैं, लेकिन बंदरों के आतंक और डालियों के तोड़ देने के कारण यह बढ़ नहीं पाए। पर्वत के पौराणिक और धार्मिक महत्व के कारण ऊपर जाकर पौधों की देखरेख भी कम हो पाई। इससे धौ का पौधा नीचे कारपेट की तरह ही बना रहा। अब धौ के पौधों की सर्जरी और जरूरी प्रक्रिया अपनाकर धौ के तेजी से बढ़ने की कवायद की गई है।
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वन विभाग के कर्मचारी नंगे पांव कांटेदार बबूल के बीच से निकलकर पर्वत पर लगे धौ के पौधों को सहेज रहे हैं। पर्वत के नीचे सड़क और पर्वत के बीच के क्षेत्र में जहां भी बबूल के पेड़ हैं, उनके पास देसी कदंब, तमाल, पीलू जैसे पौधे लगाए जा रहे हैं।
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गोवर्धन पर्वत परिक्रमा मार्ग के किनारे खुशबूदार फूलों की प्रजातियों को लगाया जा रहा है ताकि परिक्रमा करने वालों को सुखद एहसास हो सके। इस बार 12,500 एकड़ क्षेत्र में 8 हजार पौधों को यहां लगाने की तैयारी है।
पांच हेक्टेयर में हटाया जाना था बबूल
एक साल पहले ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सुझाव पर वन विभाग ने गोवर्धन पर्वत के पास प्रयोग के तौर पर पांच हेक्टेयर जमीन से विलायती बबूल को हटाकर देसी प्रजाति के चौड़ी पत्तियों वाले पौधे लगाने का प्रोजेक्ट बनाया था, लेकिन इसके लिए शासन से अनुमति नही मिली।
गोवर्धन पर्वत क्षेत्र दरअसल, ताज ट्रिपेजियम जोन का भी हिस्सा है। ऐसे में यहां किसी भी पेड़ को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से गोवर्धन पर्वत पर ऐसे प्रयोग की अनुमति चाहिए होगी। गोवर्धन पर्वत की ज्यादातर याचिकाएं एनजीटी में ही हैं।
गोवर्धन पर्वत क्षेत्र दरअसल, ताज ट्रिपेजियम जोन का भी हिस्सा है। ऐसे में यहां किसी भी पेड़ को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से गोवर्धन पर्वत पर ऐसे प्रयोग की अनुमति चाहिए होगी। गोवर्धन पर्वत की ज्यादातर याचिकाएं एनजीटी में ही हैं।
'गोवर्धन पर्वत क्षेत्र में धौ, तमाल, पीलू, कदंब आदि पौधों के जरिए प्राचीन रूप को साकार करने का प्रयास हो रहा है। देसी और ब्रज में लगे पुराने पौधों की प्रजातियों को ही लगाया जा रहा है ताकि यह क्षेत्र हरा भरा रहे। परिक्रमा मार्ग पर खुशबूदार फूलों को लगाया जा रहा है।'- अभय कुमार सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक