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UP: वादी और मुल्जिम नहीं हुए पेश, मिल रही तारीख पर तारीख; 30 वर्षों से की पत्रावलियां भी लंबित

Thu, 20 Jun 2024 03:34 PM IST
भूपेन्द्र सिंह दुर्गेश चाहर, अमर उजाला, आगरा
दुर्गेश चाहर, अमर उजाला, आगरा Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Thu, 20 Jun 2024 03:34 PM IST
सार

ताजनगरी में वादी और मुल्जिम कोर्ट में पेश नहीं हुए। उन्हें तारीख पर तारीख मिल रही हैं। 30 वर्ष पुरानी पत्रावलियां भी लंबित हैं। 

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plaintiff and accused did not appear in court in Agra files of 30 years also pending
कोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : एएनआई

विस्तार

उत्तर प्रदश के आगरा में जिला अदालतों में 20 से 25 साल पुराने काॅपीराइट एक्ट के मामलों में पुलिस की लापरवाही से कार्रवाई अधूरी पड़ी है। वादी और मुल्जिम सम्मन और गिरफ्तारी वारंट जारी होने पर भी पेश नहीं किए गए। सरकारी गवाह तक कोर्ट में हाजिर नहीं हो सके। जिन थानाध्यक्षों ने मुकदमे दर्ज कराए, वही गवाही के लिए नहीं आए। पत्रावलियां लंबित होने से अदालतों में तारीख पर तारीख लग रही हैं। पेश है एक 

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केस-1

न्यू आगरा थाना पुलिस ने कमला नगर के निवासी फूलचंद और सुरेश को नकली निरमा वाशिंग पाउडर व नकली नमक बिना लाइसेंस के बेचते हुए पकड़ा था। निशानदेही पर माल भी बरामद किया था। 10 अप्रैल 1992 को तत्कालीन थानाध्यक्ष जीएस राठी ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को जेल भेजा था। मामला सीजेएम कोर्ट में विचाराधीन है। कोर्ट ने 31 जुलाई 2004 को आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी और कॉपीराइट एक्ट में आरोप तय किए। वादी और गवाहों के लिए कई बार कोर्ट ने गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किए। पुलिस 20 साल के बाद भी तत्कालीन थानाध्यक्ष जीएस राठी व गवाहों को कोर्ट में पेश नहीं कर सकी।

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केस-2

छत्ता थाने में सोहेल अहमद कुरेशी रीजनल अधिकारी टाटा एग्रो ने 22 जून 1997 को धोखाधड़ी और कॉपीराइट एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपी अनिल कुमार गुप्ता टाटा की लेवल लगाकर नकली माल बेचते हुए पकड़ा था। माल भी बरामद किया था। कोर्ट में आरोपी के विरुद्ध 23 फरवरी 1999 को आरोप तय हुए। कोर्ट ने कई बार सम्मन, जमानती वारंट और गिरफ्तार वारंट भेजे। पत्रावली सीजेएम कोर्ट में लंबित है। 14 मार्च 2019 को एसएसपी आगरा को पत्र लिखकर गवाहों के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट भेजे थे। पुलिस 25 साल में वादी और एक भी गवाह पेश नहीं कर सकी।

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केस-3

मामला थाना न्यू आगरा का है, जिसमें 16 सितंबर 1999 का पुलिस ने दयालबाग सरन नगर निवासी प्रदीप और न्यू आगरा निवासी काके को फर्जी तरीके से डुप्लीकेट कैसेट बनाने की मशीनों के सहित गिरफ्तार किया था। आरोपी कंपनियों के लेवल लगाकर महंगे दामों में कैसेट बेचते थे। कोर्ट ने आरोपियों के विरुद्ध चार्ज 5 जनवरी 2000 में तय किया था। तब से पत्रावली गवाही में लंबित चल रही है। कोर्ट ने कई बार सम्मन और जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंट भेजे। इसके बावजूद भी पुलिस मुकदमे के वादी संजीव गवाही के लिए हाजिर नहीं कर सकी।

केस-4

5 अप्रैल 2000 को पुलिस ने जिमखाना छत्ता से आरोपी ताजुद्दीन को नकली ग्रीस पैकिंग करते हुए पकड़ा था। माल भी बरामद किया था। घटना की रिपोर्ट तत्कालीन छत्ता थाना अध्यक्ष नेमचंद गंगवार ने दर्ज कराई थी। कोर्ट ने आरोपी के विरुद्ध 15 जनवरी 2005 को आरोप तय किया। सीजेएम ने वादी गवाहों के लिए कई बार सम्मन, जमानती वारंट और गिरफ्तारी वारंट भेजे। 23 नवंबर 2019 को एसएसपी आगरा को पत्र लिखा। तत्कालीन थाना अध्यक्ष नेमचंद गंगवार के विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट तक भेजे। मगर, पुलिस 19 साल में में भी उन्हें भी गवाही के लिए पेश नहीं कर सकी।

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