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Pitru Paksha 2020: हरिपदी गंगा में स्नान कर श्रद्धालुओं ने पितरों का किया श्राद्ध
Tue, 01 Sep 2020 06:10 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 01 Sep 2020 06:10 PM IST
सार
कुश, तिल, चावल आदि सामग्री श्रद्धालुओं को देकर मंत्रोच्चारण के साथ पूर्वजों का स्मरण कराया और श्रद्धालुओं ने जल तर्पण किया। श्रद्धालुओं ने तर्पण कर ब्राह्मणों को भोजन कराकर वस्त्र आदि दान किए।
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सोरों के हरिपदी घाट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्राद्ध पूर्णिमा शुरू होते ही मंगलवार को तीर्थनगरी सोरों में श्राद्ध करने श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने हरिपदी के घाट पर गंगास्नान कर पितरों को जल तर्पण किया। पूर्वजों की आत्मशांति के लिए मां गंगा से प्रार्थना की। पुरोहितों ने विधि विधानपूर्वक कर्मकांड करवाए।
मंगलवार सुबह 9:28 बजे पूर्णिमा शुरू हुई। शास्त्र वर्णित है कि मध्यकाल में ही पितरों को तर्पण करना विशेष शुभ माना गया है। पुरोहितों ने मंगलवार दोपहर को हरिपदी के घाट पर विधि विधानपूर्वक अनुष्ठानों का आयोजन किया। कुश, तिल, चावल आदि सामग्री श्रद्धालुओं को देकर मंत्रोच्चारण के साथ पूर्वजों का स्मरण कराया और श्रद्धालुओं ने जल तर्पण किया।
श्रद्धालुओं ने तर्पण कर ब्राह्मणों को भोजनकराकर वस्त्र आदि दान किए। श्रद्धालुओं ने हरिपदी घाट की परिक्रमा लगाते हुए मंदिरों में दर्शन किए और अपने परिवार की खुशहाली के लिए आशीष मांगा। वराह मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, पंचमहाशक्ति, बालाजी दरबार, बटुकनाथ मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, चौरासी घंटेवाली माता आदि मंदिरों में दिनभर श्रद्धालु पहुंचे।
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मंगलवार सुबह 9:28 बजे पूर्णिमा शुरू हुई। शास्त्र वर्णित है कि मध्यकाल में ही पितरों को तर्पण करना विशेष शुभ माना गया है। पुरोहितों ने मंगलवार दोपहर को हरिपदी के घाट पर विधि विधानपूर्वक अनुष्ठानों का आयोजन किया। कुश, तिल, चावल आदि सामग्री श्रद्धालुओं को देकर मंत्रोच्चारण के साथ पूर्वजों का स्मरण कराया और श्रद्धालुओं ने जल तर्पण किया।
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श्रद्धालुओं ने तर्पण कर ब्राह्मणों को भोजनकराकर वस्त्र आदि दान किए। श्रद्धालुओं ने हरिपदी घाट की परिक्रमा लगाते हुए मंदिरों में दर्शन किए और अपने परिवार की खुशहाली के लिए आशीष मांगा। वराह मंदिर, द्वारिकाधीश मंदिर, सोमेश्वर मंदिर, पंचमहाशक्ति, बालाजी दरबार, बटुकनाथ मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, चौरासी घंटेवाली माता आदि मंदिरों में दिनभर श्रद्धालु पहुंचे।
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हमारा एक माह चंद्रमा का एक अहोरात्र होता है। इसलिए उध्रव भाग पर रह रहे पितरों के लिए कृष्ण पक्ष उत्तम होता है। कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उनके दिनों का उदय होता है। अमावस्या उसका मध्याह्न है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या को किया गया श्राद्ध, तर्पण, पिंड दान उन्हें संतुष्टि व ऊर्जा प्रदान करते हैं। - पंडित शशिधर द्विवेदी।
श्राद्ध के समय गाय, कौआ, कुत्ते को भोजन का अंश देना चाहिए। ये यम के नजदीक माने गए हैं। तर्पण से पूर्वज ही नहीं, अपितु, ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अविनी, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, ऋषि, पशु, पक्षी, सरीश्रप आदि तृप्त होते हैं। श्राद्ध पक्ष में पितर अपने घर के दरवाजे तक पहुंचते हैं- पंडित भारत किशोर, दुबे।
श्राद्ध के समय गाय, कौआ, कुत्ते को भोजन का अंश देना चाहिए। ये यम के नजदीक माने गए हैं। तर्पण से पूर्वज ही नहीं, अपितु, ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, अविनी, सूर्य, अग्नि, अष्टवसु, वायु, ऋषि, पशु, पक्षी, सरीश्रप आदि तृप्त होते हैं। श्राद्ध पक्ष में पितर अपने घर के दरवाजे तक पहुंचते हैं- पंडित भारत किशोर, दुबे।