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पितरों के तर्पण के बाद कई घाटों पर बनवाईं हैं श्रद्धालुओं ने छतरियां - रघुनाथ मंदिर, लाल घाट, श्याम वराह घाट सहित अन्य घाटों पर

Tue, 15 Sep 2020 11:35 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Tue, 15 Sep 2020 11:35 PM IST
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कासगंज के सोरों में श्रद्घालुओं द्वारा बनवाई गईं छतरियां - फोटो : KASGANJ
सोरों(कासगंज)। तीर्थनगरी सोरों पौराणिक काल से ही श्रद्धा का केंद्र रही है। यहां तमाम श्रद्धालुओं ने पितृों की याद में विभिन्न घाटों पर छतरियों का निर्माण कराया है। यह छतरियां रघुनाथ मंदिर, लाल घाट, श्याम वराह घाट, बरी घाट, नागालैंड मार्ग आदि क्षेत्र में बनी हैं।
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सोरों के जानकार बताते हैं कि इस तीर्थ से राजस्थान का गहरा नाता रहा है। राजस्थान की रियासतों के राजा और उनके वंशजों का आगमन यहां होता रहा है। वे अपने पितृों के हर संस्कार के लिए यहां पहुंचते हैं। इसी विशेषता के चलते स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा बुद्ध, स्वामी विट्ठलाचार्य एवं अन्य महान संतों ने यहां कल्पवास भी किया। श्राद्ध पक्ष में बड़ी संख्या में श्रद्धालु लगातार तीर्थनगरी में पहुंचकर अपने पितृों का श्राद्ध कर रहे हैं। इस समय तीर्थपुरोहित घाटों पर जगह-जगह श्राद्ध पूजा कराते नजर आते हैं।
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- तीर्थनगरी में सैकड़ों वर्ष पहले से श्राद्ध पूजा का महत्व शास्त्रों में बताया गया है। इसके चलते लोग यहां पहुंचकर श्राद्ध पूजा करते हैं। राजस्थान से यहां का विशेष जुड़ाव है। विभिन्न रियासतों के राजाओं का यहां आगमन हुआ है। श्रद्धालु पितृों की स्मृति में छतरी का निर्माण भी घाटों पर कराते हैं। - पंडित रामसरन शर्मा।
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- सोरों तीर्थ को पौराणिक काल से ही मोक्षस्थल के रूप में माना जाता है। इसी महत्व के चलते यहां प्राचीनकाल में तमाम संतों का आगमन हुआ है। संतों ने यहां कल्पवास भी किया है। विभिन्न राज्यों के लोग यहां पहुंचते हैं और पितृों की शांति की कामना करते हैं।
- पंडित अशोक तिवारी।
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