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सीएम साहब, शहर मांग रहा नए साल का तोहफा
ब्यूरो, अमर उजाला आगरा
Updated Tue, 29 Dec 2015 02:13 AM IST
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मुख्यमंत्री जी, ताजनगरी में आपका एक बार फिर स्वागत है। नए साल का मौका है। दो दिन बाद उम्मीदों से भरा 2016 दस्तक देगा। ऐसे में आपके पंसदीदा शहर के लोग आपसे कुछ सौगातों की आस लगाए बैठे हैं। विश्व के पर्यटन मानचित्र पर चमकने वाला आपके प्रदेश का यह सितारा (आगरा) सालों बाद भी सिविल एयरपोर्ट का इंतजार कर रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम के अभाव में दर्जनों प्रतिभाएं शहर से पलायन कर चुकी हैं। पर्यटन और उद्योग के क्षेत्र में भी विकास की राह तक रहा है ताजमहल का ये शहर। एलिवेटिड रोड और पर्याप्त जगहों पर ओवरब्रिज के न होने से लगने वाला जाम भरी सर्दी में लोगों का पसीना छुड़ा देता है। पानी की समस्या तो अब तक हल नहीं हो पाई। गंगाजल अब तक पाइपों में रुका हुआ है। मुख्यमंत्री जी आपको और क्या-क्या बताएं...मांगों की लिस्ट बहुत लंबी है। इनमें से आप किसी एक समस्या के समाधान की शुरुआत कर जाएं। ताकि ये शहर गुजरते 2015 की इस उपलब्धि को नये साल के तोहफे के रूप में याद रखे।
जमीन का अधिग्रहण हो तो खुलें सिविल एयरपोर्ट के रास्ते
आगरा। ताजनगरी में हर रोज हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच खेरिया हवाई अड्डे पर सिविल एंक्लेव के लिए सहमति बन चुकी है। मगर, राज्य सरकार की ओर से धनौली क्षेत्र में अब तक 55 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। यदि इसे प्राथमिकता पर लेते हुए भूमि अधिग्रहण करा दी जाए तो एयरपोर्ट के रास्ते खुल जाएंगे।
स्टेडियम हो तो निखरें प्रतिभाएं
शहर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम की सालों से मांग चल रही है। इसके लिए सर्वे भी हो चुका है। मगर, प्रस्ताव इससे आगे नहीं बढ़ सका है। अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के अभाव में ही शहर से खेलकूद के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभरकर सामने नहीं आ पा रही हैं। स्टेडियम के होने से सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को ही लाभ नहीं मिलेगा, शहर में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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लेदर पार्क की राह के दूर हों रोड़े
ताजमहल के वजह से अधिकांश उद्योग उजाड़ दिए गए। पर्यटन के अलावा चुनिंदा उद्योग ही रोजगार के साधन बचे हैं। राज्य सरकार की ओर से भरतपुर रोड पर लेदर पार्क के लिए जमीन भी अधिग्रहीत कर ली गई है। मगर, पर्यावरण क्लीयरेंस के कारण प्रस्ताव अटक गया है। इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए जल्द ही इसका निस्तारण किया जाए।
नाइट कल्चर को चाहिए बढ़ावा
शहर में आम दिनों में 15 हजार पर्यटक आते हैं। शनिवार-रविवार और अन्य छुट्टियों के मौके पर यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है। अधिकांश पर्यटक शाम को ही लौट जाते हैं। यदि शहर में नाइट कल्चर के लिए महताब बाग के हिस्से को विकसित किया जाए तो यह सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर स्थान हो सकता है। इस क्षेत्र में शासन के पास सात एकड़ जमीन है।
अमरूद का टीला पर पार्किंग हो
ताजमहल के पश्चिमी गेट की तरफ वाहनों की पार्किंग के लिए काफी कम जगह है। ऐसे में पूर्व में अमरूद का टीला पर पार्किंग के लिए अतिरिक्त जगह को हरी झंडी मिल चुकी है। मगर, बजट के अभाव में केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बता दें कि किसी-किसी दिन हाथीघाट तक सड़क किनारे पर्यटकों के वाहन खड़े हो जाते हैं।
एमजी रोड पर एलिवेडिट रोड की जरूरत
एमजी रोड शहर की धड़कन कही जाती है। मगर, ट्रैफिक के बढ़ते दबाव की वजह से जाम की स्थिति रहती है। एलिवेडिट रोड का सुझाव दिया जा चुका है। मगर, इस दिशा में शासन-प्रशासन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। यदि एलिवेडिट रोड बन जाए तो जाम नहीं रहेगा और पर्यावरण भी सुधरेगा।
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जमीन का अधिग्रहण हो तो खुलें सिविल एयरपोर्ट के रास्ते
आगरा। ताजनगरी में हर रोज हजारों देशी-विदेशी पर्यटक आते हैं। लेकिन अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट नहीं है। केंद्र और राज्य सरकार के बीच खेरिया हवाई अड्डे पर सिविल एंक्लेव के लिए सहमति बन चुकी है। मगर, राज्य सरकार की ओर से धनौली क्षेत्र में अब तक 55 एकड़ जमीन उपलब्ध नहीं कराई गई है। यदि इसे प्राथमिकता पर लेते हुए भूमि अधिग्रहण करा दी जाए तो एयरपोर्ट के रास्ते खुल जाएंगे।
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स्टेडियम हो तो निखरें प्रतिभाएं
शहर में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम की सालों से मांग चल रही है। इसके लिए सर्वे भी हो चुका है। मगर, प्रस्ताव इससे आगे नहीं बढ़ सका है। अंतर्राष्ट्रीय स्टेडियम के अभाव में ही शहर से खेलकूद के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभरकर सामने नहीं आ पा रही हैं। स्टेडियम के होने से सिर्फ स्थानीय प्रतिभाओं को ही लाभ नहीं मिलेगा, शहर में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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लेदर पार्क की राह के दूर हों रोड़े
ताजमहल के वजह से अधिकांश उद्योग उजाड़ दिए गए। पर्यटन के अलावा चुनिंदा उद्योग ही रोजगार के साधन बचे हैं। राज्य सरकार की ओर से भरतपुर रोड पर लेदर पार्क के लिए जमीन भी अधिग्रहीत कर ली गई है। मगर, पर्यावरण क्लीयरेंस के कारण प्रस्ताव अटक गया है। इस प्रस्ताव को प्राथमिकता के आधार पर लेते हुए जल्द ही इसका निस्तारण किया जाए।
नाइट कल्चर को चाहिए बढ़ावा
शहर में आम दिनों में 15 हजार पर्यटक आते हैं। शनिवार-रविवार और अन्य छुट्टियों के मौके पर यह संख्या एक लाख तक पहुंच जाती है। अधिकांश पर्यटक शाम को ही लौट जाते हैं। यदि शहर में नाइट कल्चर के लिए महताब बाग के हिस्से को विकसित किया जाए तो यह सांस्कृतिक आयोजनों के लिए बेहतर स्थान हो सकता है। इस क्षेत्र में शासन के पास सात एकड़ जमीन है।
अमरूद का टीला पर पार्किंग हो
ताजमहल के पश्चिमी गेट की तरफ वाहनों की पार्किंग के लिए काफी कम जगह है। ऐसे में पूर्व में अमरूद का टीला पर पार्किंग के लिए अतिरिक्त जगह को हरी झंडी मिल चुकी है। मगर, बजट के अभाव में केंद्र सरकार ने हाथ खड़े कर दिए हैं। बता दें कि किसी-किसी दिन हाथीघाट तक सड़क किनारे पर्यटकों के वाहन खड़े हो जाते हैं।
एमजी रोड पर एलिवेडिट रोड की जरूरत
एमजी रोड शहर की धड़कन कही जाती है। मगर, ट्रैफिक के बढ़ते दबाव की वजह से जाम की स्थिति रहती है। एलिवेडिट रोड का सुझाव दिया जा चुका है। मगर, इस दिशा में शासन-प्रशासन एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है। यदि एलिवेडिट रोड बन जाए तो जाम नहीं रहेगा और पर्यावरण भी सुधरेगा।