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अव्यवस्था: गोद में और कंधों पर लेकर आए मरीज
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अमर उजाला ब्यूरो
आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में तीन दिन में भी ओपीडी की व्यवस्थाएं नहीं सुधारी जा सकीं। चलने फिरने में लाचार मरीजों को परिजन कंधे और गोद में लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए आए।
बुधवार को 684 मरीजों के पर्चे बने। 11 बजे ही गेट बंद होने से बाहर भीड़ जमा हो गई। गार्ड से मरीजों की बहस भी हुई, लेकिन पर्चा नहीं बना। परिसर में मरीजों के लिए व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और वार्ड ब्वाय की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में तीमारदारों को मरीजों को खुद ही कंधे और गोद में लेकर जाना पड़ा।
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- ओपीडी में सुबह 11 बजे तक ही पर्चे बनते हैं, ऐसे में दूरदराज से आने वाले कई मरीजों की इसकी जानकारी नहीं है। 11 बजे के बाद आने वाले मरीजों को लौटना पड़ा, ऐसे करीब 160 से अधिक मरीज रहे।
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बोदला के राजवीर सिंह की पत्नी बेबी की हालत खराब होने के कारण वह चल फिर नहीं पा रही थीं। गेट पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं दिखे तो गार्ड से उपलब्ध कराने को कहा। सुनवाई न होने पर गोद में ही पत्नी को डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर गया।
यमुनापार के मुबारक अली के अपने भाई मुश्ताक को लेकर ओपीडी पहुंचा। गेट से बमुश्किल घुसकर पर्चा बनवाया। वार्ड ब्वाय न होने पर मरीज को कंधे पर लेकर ही डॉक्टरों के चैंबर तक ले गया। इससे परेशान होने पर उसने व्यवस्थाओं को भी कोसा।
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ओपीडी में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर रखवाए गए थे, इनकी संख्या और बढ़ा देता हूं। चलने-फिरने में लाचार मरीजों की मदद के लिए स्टाफ को भी निर्देशित किया है। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य
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आगरा। एसएन मेडिकल कॉलेज में तीन दिन में भी ओपीडी की व्यवस्थाएं नहीं सुधारी जा सकीं। चलने फिरने में लाचार मरीजों को परिजन कंधे और गोद में लेकर डॉक्टर को दिखाने के लिए आए।
बुधवार को 684 मरीजों के पर्चे बने। 11 बजे ही गेट बंद होने से बाहर भीड़ जमा हो गई। गार्ड से मरीजों की बहस भी हुई, लेकिन पर्चा नहीं बना। परिसर में मरीजों के लिए व्हीलचेयर, स्ट्रेचर और वार्ड ब्वाय की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में तीमारदारों को मरीजों को खुद ही कंधे और गोद में लेकर जाना पड़ा।
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- ओपीडी में सुबह 11 बजे तक ही पर्चे बनते हैं, ऐसे में दूरदराज से आने वाले कई मरीजों की इसकी जानकारी नहीं है। 11 बजे के बाद आने वाले मरीजों को लौटना पड़ा, ऐसे करीब 160 से अधिक मरीज रहे।
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बोदला के राजवीर सिंह की पत्नी बेबी की हालत खराब होने के कारण वह चल फिर नहीं पा रही थीं। गेट पर स्ट्रेचर और व्हीलचेयर नहीं दिखे तो गार्ड से उपलब्ध कराने को कहा। सुनवाई न होने पर गोद में ही पत्नी को डॉक्टर को दिखाने के लिए लेकर गया।
यमुनापार के मुबारक अली के अपने भाई मुश्ताक को लेकर ओपीडी पहुंचा। गेट से बमुश्किल घुसकर पर्चा बनवाया। वार्ड ब्वाय न होने पर मरीज को कंधे पर लेकर ही डॉक्टरों के चैंबर तक ले गया। इससे परेशान होने पर उसने व्यवस्थाओं को भी कोसा।
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ओपीडी में स्ट्रेचर और व्हीलचेयर रखवाए गए थे, इनकी संख्या और बढ़ा देता हूं। चलने-फिरने में लाचार मरीजों की मदद के लिए स्टाफ को भी निर्देशित किया है। - डॉ. संजय काला, प्राचार्य