{"_id":"5ebe134a8ebc3e908c6416d9","slug":"patient-dies-due-to-lack-of-treatment-in-district-hospital-agra","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आगरा: जिला अस्पताल में तीन घंटे भटकता रहा बेटा, इलाज में देरी से बीमार पिता की मौत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आगरा: जिला अस्पताल में तीन घंटे भटकता रहा बेटा, इलाज में देरी से बीमार पिता की मौत
Fri, 15 May 2020 01:14 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 15 May 2020 01:14 PM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Flickr
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आगरा के जिला अस्पताल में गुरुवार को मूक-बधिर मरीज शाहिद (59) ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि मरीज को भर्ती कराने के लिए तीन घंटे तक जिला अस्पताल में भटकते रहे। जब भर्ती किया तो मृत घोषित कर दिया।
रकाबगंज के कटघर ईदगाह निवासी 59 साल के जूता फैक्ट्री में काम करने वाले शाहिद अली को पेट की बीमारी थी। बेटे सलमान खान का आरोप है कि सुबह सात बजे जिला अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन काउंटर नहीं खुला। बताया कि साढ़े आठ बजे काउंटर खुलेगा, इस पर वह इंतजार करने लगा।
काउंटर खुलने के बाद पर्चा बनवाया तो उसमें 35 नंबर लिख दिया। मरीज को लेकर 35 नंबर के कमरे में गए तो वहां डाक्टरों ने 31 नंबर के लिए भेज दिया और पर्चे पर भी करेक्शन कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
रकाबगंज के कटघर ईदगाह निवासी 59 साल के जूता फैक्ट्री में काम करने वाले शाहिद अली को पेट की बीमारी थी। बेटे सलमान खान का आरोप है कि सुबह सात बजे जिला अस्पताल पहुंच गए थे, लेकिन काउंटर नहीं खुला। बताया कि साढ़े आठ बजे काउंटर खुलेगा, इस पर वह इंतजार करने लगा।
विज्ञापन
काउंटर खुलने के बाद पर्चा बनवाया तो उसमें 35 नंबर लिख दिया। मरीज को लेकर 35 नंबर के कमरे में गए तो वहां डाक्टरों ने 31 नंबर के लिए भेज दिया और पर्चे पर भी करेक्शन कर दिया।
विज्ञापन
31 नंबर पर गया तो उनको 30 नंबर वाले कमरे में लेकर जाने को कहा। यहां भी मरीज को भर्ती नहीं किया और डाक्टरों ने 24 नंबर वाले कमरे में भेज दिया। जहां डॉक्टरों ने जांच की तो बताया कि इनकी मौत हो गई है।
'तुरंत भर्ती करते तो पापा की जान बच जाती
बेटे फरमान ने बताया कि पापा आठ-दस दिन से बीमार चल रहे थे, पास के ही डाक्टर से ड्रिप भी लगवाई थी। सुबह हालत ज्यादा खराब हो गई। अगर समय पर इनको भर्ती कर लिया जाता तो जान बच जाती।
देरी नहीं हुई, भर्ती करते ही दम तोड़ दिया - एसआईसी
एसआईसी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि देरी नहीं की गई है। मरीज का साढ़े नौ बजे के करीब का पर्चा बना है। मरीज और तीमारदारों को सैनिटाइज कराके भर्ती करवाया, चिकित्सकों ने देखा लेकिन मरीज की पहले ही मौत हो गई थी, इनके परिजनों को पोस्टमार्टम भी कराने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।
'तुरंत भर्ती करते तो पापा की जान बच जाती
बेटे फरमान ने बताया कि पापा आठ-दस दिन से बीमार चल रहे थे, पास के ही डाक्टर से ड्रिप भी लगवाई थी। सुबह हालत ज्यादा खराब हो गई। अगर समय पर इनको भर्ती कर लिया जाता तो जान बच जाती।
देरी नहीं हुई, भर्ती करते ही दम तोड़ दिया - एसआईसी
एसआईसी डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि देरी नहीं की गई है। मरीज का साढ़े नौ बजे के करीब का पर्चा बना है। मरीज और तीमारदारों को सैनिटाइज कराके भर्ती करवाया, चिकित्सकों ने देखा लेकिन मरीज की पहले ही मौत हो गई थी, इनके परिजनों को पोस्टमार्टम भी कराने को कहा था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।