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मैनपुरी में पहली बार 45 रुपये किलो बिका आलू
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शहर के एक कोल्ड स्टोर में वाहन पर आलू के पैकेट लादते पल्लेदार
- फोटो : MAINPURI
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मैनपुरी। सब्जी के राजा आलू के दाम बढ़ने से सारे रिकॉर्ड टूट गए। मैनपुरी में पहली बार आलू 45 रुपये किलो बिक रहा है। आलू की कीमत बढ़ने से किसान खुश है, लेकिन खरीदार परेशान हैं। बुधवार को जिलेभर के शीतगृहों में करीब 55 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारित था। इसे 31 अक्तूबर तक निकालने की कवायद की जा रही है।
जिले के प्रमुख आलू व्यापारियों के अनुसार इस बार पहली बार आलू का यह भाव है। इससे पहले जिले में कभी भी आलू इस रेट पर नहीं बिका। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में भाव बढ़ा तो वह आखिर में बढ़ा। इस बार आलू पर महंगाई शुरू से ही रही। वर्ष 2005 में आलू आठ से नौ सौ रुपये पैकेट बिका। एक पैकेट करीब 50 किलो आलू होता है।
इसी तरह 2009 में एक हजार से 12 सौ रुपये, 2016 में एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति पैकेट आलू बिका। बीते वर्ष नवंबर महीने में आलू महंगा हुआ। उस समय आठ सौ से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल आलू बिका। इस साल 14 सौ रुपये से लेकर 17 सौ रुपये पैकेट आलू शीतगृहों में बिक रहा है। फुटकर बाजार में आलू की कीमत 45 रुपये प्रति किलो है।
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मुश्किल दिख रही है निकासी
आलू की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने भंडारण की अवधि घटाकर 31 अक्तूबर तक कर दी है। पहले यह अवधि 30 नवंबर थी। जिलेभर के शीतगृहों में करीब 55 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारित है। ऐसे में सरकार की ओर से निर्धारित किए गए समय में आलू की निकासी संभव नजर नहीं आ रही है। शीतगृह संचालकों का भी कहना है कि इस बार आलू महंगा है, अगर किसान निकासी नहीं करता है तो वह आलू बाहर तो फेंक नहीं देंगे। हालांकि किसानों को अधिक से अधिक निकासी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हाईलाइटर
- 20 हजार हेक्टेयर है आलू का क्षेत्रफल
- 05 लाख मीट्रिक टन होता है आलू का उत्पादन
- 03 लाख मीट्रिक टन आलू का था कोल्ड में भंडारण
- 55 हजार मीट्रिक टन आलू वर्तमान में है भंडारित
मुझे तो याद नहीं है कि कभी आलू इतना महंगा बिका हो। जिले में पहली बार ही इतना महंगा आलू बिक रहा है।
-आशाराम, नगला रमन कुर्रा
पहले कभी भी इतना महंगा आलू नहीं बिका है। पूर्व के वर्षों में अधिकतम 28 से 30 रुपये प्रति किलो तक ही आलू बिका है।
- मालती शर्मा, देवी रोड
आलू पर इतनी महंगाई पहले कभी नहीं देखी। इस बार किसान काफी खुश है और खुशी-खुशी अगली फसल की तैयारी कर रहा है।
- पियूष चंदेल, डॉयरेक्टर चंदेल कोल्ड स्टोर
देश में आलू की इस वर्ष पैदावर कम हुई है। इस कारण आलू रिकॉर्ड तोड़ महंगा हुआ है। अब नए आलू से ही उम्मीद है।
- सुमित बंसल, शीतगृह संचालक
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जिले के प्रमुख आलू व्यापारियों के अनुसार इस बार पहली बार आलू का यह भाव है। इससे पहले जिले में कभी भी आलू इस रेट पर नहीं बिका। उन्होंने बताया कि बीते वर्षों में भाव बढ़ा तो वह आखिर में बढ़ा। इस बार आलू पर महंगाई शुरू से ही रही। वर्ष 2005 में आलू आठ से नौ सौ रुपये पैकेट बिका। एक पैकेट करीब 50 किलो आलू होता है।
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इसी तरह 2009 में एक हजार से 12 सौ रुपये, 2016 में एक हजार से 11 सौ रुपये प्रति पैकेट आलू बिका। बीते वर्ष नवंबर महीने में आलू महंगा हुआ। उस समय आठ सौ से एक हजार रुपये प्रति क्विंटल आलू बिका। इस साल 14 सौ रुपये से लेकर 17 सौ रुपये पैकेट आलू शीतगृहों में बिक रहा है। फुटकर बाजार में आलू की कीमत 45 रुपये प्रति किलो है।
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मुश्किल दिख रही है निकासी
आलू की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने भंडारण की अवधि घटाकर 31 अक्तूबर तक कर दी है। पहले यह अवधि 30 नवंबर थी। जिलेभर के शीतगृहों में करीब 55 हजार मीट्रिक टन आलू भंडारित है। ऐसे में सरकार की ओर से निर्धारित किए गए समय में आलू की निकासी संभव नजर नहीं आ रही है। शीतगृह संचालकों का भी कहना है कि इस बार आलू महंगा है, अगर किसान निकासी नहीं करता है तो वह आलू बाहर तो फेंक नहीं देंगे। हालांकि किसानों को अधिक से अधिक निकासी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
हाईलाइटर
- 20 हजार हेक्टेयर है आलू का क्षेत्रफल
- 05 लाख मीट्रिक टन होता है आलू का उत्पादन
- 03 लाख मीट्रिक टन आलू का था कोल्ड में भंडारण
- 55 हजार मीट्रिक टन आलू वर्तमान में है भंडारित
मुझे तो याद नहीं है कि कभी आलू इतना महंगा बिका हो। जिले में पहली बार ही इतना महंगा आलू बिक रहा है।
-आशाराम, नगला रमन कुर्रा
पहले कभी भी इतना महंगा आलू नहीं बिका है। पूर्व के वर्षों में अधिकतम 28 से 30 रुपये प्रति किलो तक ही आलू बिका है।
- मालती शर्मा, देवी रोड
आलू पर इतनी महंगाई पहले कभी नहीं देखी। इस बार किसान काफी खुश है और खुशी-खुशी अगली फसल की तैयारी कर रहा है।
- पियूष चंदेल, डॉयरेक्टर चंदेल कोल्ड स्टोर
देश में आलू की इस वर्ष पैदावर कम हुई है। इस कारण आलू रिकॉर्ड तोड़ महंगा हुआ है। अब नए आलू से ही उम्मीद है।
- सुमित बंसल, शीतगृह संचालक