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पटना-कोटा एक्सप्रेस में यात्रियों की मौत: दौड़ती ट्रेन में चिल्लाते रहे यात्री, कानपुर से आगरा तक न मिला इलाज
Mon, 21 Aug 2023 09:41 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
अमर उजाला नेटवर्क, आगरा
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 21 Aug 2023 09:41 AM IST
सार
पटना से कोटा जा रही ट्रेन में दूषित भोजन से छत्तीसगढ़ के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। वहीं उल्टी दस्त के कारण 20 लोगों की हालत खराब हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यात्रियों का इलाज किया। बेहोशी की हालत में 6 यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज और कैंट स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।
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patna kota express
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कोटा-पटना एक्सप्रेस में वाराणसी से मथुरा जा रहे तीर्थयात्रियों के दल के सदस्यों की हालत कानपुर से स्टेशन से ट्रेन के रवाना होने के बाद बिगड़ना शुरू हो गई थी। ट्रेन इटावा, फतेहाबाद, भांडई होते हुए आगरा कैंट पर पहुंचीं, तब यात्रियों को इलाज मिल सका। इस दौरान रेलवे के स्टाफ ने भी यात्रियों की बिगड़ रही हालत पर ध्यान नहीं दिया, जबकि इस दौरान स्लीपर कोच में चेकिंग टीम के सदस्य भी पहुंचे होंगे।
कोटा-पटना एक्सप्रेस में 90 तीर्थयात्रियों के दल के सदस्य ट्रेन के कोच संख्या एस-1, एस-2, एस-3 में सवार थे। तीनों ही कोचों में सवार यात्रियों की तबीयत रात का खाना खाने के बाद बिगड़ी थी। सहयात्री मीनाराम ने बताया कि ज्यादातर यात्रियों ने रात में खाना खाया था।
सुबह जागने पर करीब आठ बजे से कुछ यात्रियों को उल्टी-दस्त लगे तो लोगों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी, मगर जब कई लोगों की हालत बिगड़ने लगी तो वह परेशान हो गए। इस दौरान कानपुर से आगे एक स्टेशन पर ट्रेन के रुकने पर कुछ लोगों ने पानी लिया। तब स्टेशन पर कोई कर्मचारी नहीं नजर आया।
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ट्रेन इटावा स्टेशन पर भी रुकी थी। इस दरम्यान टीटी भी कोचों में आए थे। चेकिंग दल भी ट्रेन में था। यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी रास्ते में हो गई थी तो नजदीकी स्टेशन पर उतारकर इलाज के लिए भेजा जा सकता था। गाड़ी के आगरा कैंट स्टेशन पहुंचने तक एक महिला तीर्थयात्री ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे यात्री को कैंट स्टेशन पर मृत घोषित किया गया।
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कोटा-पटना एक्सप्रेस में 90 तीर्थयात्रियों के दल के सदस्य ट्रेन के कोच संख्या एस-1, एस-2, एस-3 में सवार थे। तीनों ही कोचों में सवार यात्रियों की तबीयत रात का खाना खाने के बाद बिगड़ी थी। सहयात्री मीनाराम ने बताया कि ज्यादातर यात्रियों ने रात में खाना खाया था।
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सुबह जागने पर करीब आठ बजे से कुछ यात्रियों को उल्टी-दस्त लगे तो लोगों ने ज्यादा तवज्जो नहीं दी, मगर जब कई लोगों की हालत बिगड़ने लगी तो वह परेशान हो गए। इस दौरान कानपुर से आगे एक स्टेशन पर ट्रेन के रुकने पर कुछ लोगों ने पानी लिया। तब स्टेशन पर कोई कर्मचारी नहीं नजर आया।
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ट्रेन इटावा स्टेशन पर भी रुकी थी। इस दरम्यान टीटी भी कोचों में आए थे। चेकिंग दल भी ट्रेन में था। यात्रियों की तबीयत बिगड़ने की जानकारी रास्ते में हो गई थी तो नजदीकी स्टेशन पर उतारकर इलाज के लिए भेजा जा सकता था। गाड़ी के आगरा कैंट स्टेशन पहुंचने तक एक महिला तीर्थयात्री ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरे यात्री को कैंट स्टेशन पर मृत घोषित किया गया।
कैंट स्टेशन से पहले इन यात्रियों को इलाज मिल जाता तो शायद यात्रियों की जान बचाई जा सकती थी। ग्रुप लीडर जयराम नैनवानी ने उमस भरी गर्मी को भी यात्रियों की तबीयत बिगड़ने का कारण बताया है।
आगरा कैंट पर इलाज करने पहुंची डॉ. आवंतिका सिन्हा ने बताया कि ट्रेन में इलाज किया गया। इस संबंध में पीआरओ प्रशस्ति श्रीवास्तव का कहना है कि कंट्रोल रूम में मैसेज आने के बाद गाड़ी के कैंट स्टेशन पहुंचते ही प्राथमिक उपचार दिलाया गया था।
पटना-कोटा एक्सप्रेस में दूषित भोजन से दो यात्रियों की मौत, पांच गंभीर
पटना से कोटा जा रही ट्रेन में दूषित भोजन से छत्तीसगढ़ के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। वहीं उल्टी दस्त के कारण 20 लोगों की हालत खराब हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यात्रियों का इलाज किया। बेहोशी की हालत में 6 यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज और कैंट स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।
पटना से कोटा जा रही ट्रेन में दूषित भोजन से छत्तीसगढ़ के दो तीर्थयात्रियों की मौत हो गई। वहीं उल्टी दस्त के कारण 20 लोगों की हालत खराब हो गई। ट्रेन के आगरा कैंट पहुंचने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यात्रियों का इलाज किया। बेहोशी की हालत में 6 यात्रियों को एसएन मेडिकल कॉलेज और कैंट स्थित मंडलीय रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें 5 की हालत गंभीर बनी हुई है।
आगरा कैंट स्टेशन पर तैनात आरपीएफ इंस्पेक्टर शिशिर कुमार झा ने बताया कि यात्रियों से पूछताछ में पता चला है कि 90 लोगों का जत्था छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से तीर्थयात्रा के लिए 14 अगस्त की रात को ट्रेन से रवाना हुआ था। ये सभी एस-1, एस-2 और एस-3 में सवार थे।
16 अगस्त को जत्था बनारस पहुंचा और काशी विश्वनाथ समेत अन्य मंदिरों के दर्शन के लिए दो दिन ठहरे। 19 अगस्त को दोपहर में किसी धर्मशाला में चावल और कद्दू की सब्जी का भोजन बनाया गया। भोजन को डिब्बों में पैक करने के बाद सभी यात्री शाम 5 बजे मथुरा के लिए ट्रेन में सवार हो गए। रात में भोजन कर सभी सो गए।
देर रात 20 से 25 यात्रियों को घबराहट, उल्टी और दस्त होने लगे। इस पर लोगों ने साथ लाई दवाएं पीड़ितों को दीं। इससे कुछ को राहत मिली। आगरा कैंट स्टेशन से 20 किमी पहले कुमारी बाई नेताम (62) की हालत बिगड़ गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। 7 यात्री बेहोश हो गए। यह देख चीखपुकार मच गई और कुछ यात्रियों ने कंट्रोल रूम पर फोन कर दिया।
आगरा कैंट स्टेशन पर ट्रेन रुकी तब तक रामा निषाद (65) की भी मौत हो गई। बाकी के 6 मरीजों को एसएन मेडिकल कॉलेज और रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया है। 5 मरीजों की हालत गंभीर है। बाकी के यात्रियों को मथुरा रवाना कर दिया गया।
मृतकों का पोस्टमार्टम कराया
आगरा मंडल के रेलवे वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि गाड़ी संख्या 13237 पटना-कोटा एक्सप्रेस के आगरा पहुंचने से पहले कुछ लोगों के बीमार होने की सूचना मिली थी। गाड़ी के आगरा कैंट पहुंचने पर दो यात्री मृत पाए गए। इनका पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह का पता चलेगा।
आगरा मंडल के रेलवे वाणिज्य प्रबंधक प्रशस्ति श्रीवास्तव ने बताया कि गाड़ी संख्या 13237 पटना-कोटा एक्सप्रेस के आगरा पहुंचने से पहले कुछ लोगों के बीमार होने की सूचना मिली थी। गाड़ी के आगरा कैंट पहुंचने पर दो यात्री मृत पाए गए। इनका पोस्टमार्टम कराया गया है। रिपोर्ट आने के बाद मौत की वजह का पता चलेगा।
ये हैं भर्ती
रेलवे अस्पताल में लोकेंद्र यादव (52), सोनिया बघेल(65), प्रभा बाई साहू (60), रंभा बाई साहू (60), हीरा बाई निषाद (50) और एसएन मेडिकल कॉलेज में उत्तम साहू (40) भर्ती हैं।
रेलवे अस्पताल में लोकेंद्र यादव (52), सोनिया बघेल(65), प्रभा बाई साहू (60), रंभा बाई साहू (60), हीरा बाई निषाद (50) और एसएन मेडिकल कॉलेज में उत्तम साहू (40) भर्ती हैं।